सत्ता से संगठन तक भाजपा में महाभारत, प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों और नेताओं ने निकाले दिल के गुबार

भोपाल, यशभारत। नए प्रदेश प्रभारी और नए संगठन महामंत्री के आते ही भाजपा की आंतरिक राजनीति का पारा हाई हो गया है। राजधानी भोपाल में कल हुई कोर कमेटी की बैठक में सत्ता और संगठन में पड़ी दरारें खुलकर सामने आ गईं। प्रशासनिक अधिकारियों की मनमानी और पार्टी के नेताओं के बीच तालमेल को लेकर कहासुनी हुई तो दूसरी ओर अफसरशाही का मुद्दा इस कदर हावी रहा कि मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के बीच सीधी तीखी बहस की खबरें भी बाहर आ गईं।
सरकार के कुछ वरिष्ठ मंत्रियों ने खुलकर गुबार निकाले। बैठक में नेताओं के बीच बढ़ती तल्खियों को देख प्रदेश प्रभारी बिप्लव देव ने दो टूक कहा कि जल्द से जल्द इन हालातों में सुधार होना चाहिए, वरना जो नेता गुटबाजी में संलग्न पाए जाएंगे उनके नाम और मोबाइल बार सीधे दिल्ली भेज दिए जाएंगे। प्रभारी की इस ताकीद के बाद कुछ देर के लिए कोर ग्रुप में सन्नाटा पसर गया। प्रदेश संगठन महामंत्री चंद्रशेखर ने भी कहा कि संगठन और सरकार में बेहतर समन्वय की जरूरत है। प्रदेश की भाजपा में यह हलचल उस वक्त हुई है जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज रात भोपाल आ रहे हैं। वे कल राजधानी में आयोजित 5 कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। जाहिर है अमित शाह को राजनीतिक तौर पर सबकुछ ठीक दिखाने की कोशिशें शुरू हो चुकी हैं।
सूत्र बताते हैं कि बैठक की शुरुआत में प्रशासनिक रवैये पर नाराजगी जताते हुए उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि राज्य में अधिकारी जनप्रतिनिधियों और मंत्रियों की बातों को नजरअंदाज कर रहे हैं और मनमानी पर आमादा हैं। इस पर तुरंत पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सख्त लहजे में सवाल दागा – ‘जब आपके पास इतना महत्वपूर्ण विभाग है, तो फिर आपके विभाग में कफ सिरप जैसी गंभीर घटना कैसे घटित हो गई?’ मुख्यमंत्री के इस तीखे सवाल के बाद बैठक का माहौल पूरी तरह से गरमा गया।
परफॉर्मेंस के आधार पर होंगे फैसले
बैठक में आने वाली चुनौतियों से निपटने की योजना पर विशेष मंथन हुआ। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने स्पष्ट किया कि पार्टी में निर्णय परफॉर्मेंस के आधार पर ही किए जाते हैं। पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती हारे हुए बूथों को फिर से जीतना है। इसके अतिरिक्त जो वर्ग पार्टी से छूट गए हैं, उन्हें संगठन के साथ जोड़ना प्राथमिक लक्ष्य है। बीजेपी नेतृत्व का मुख्य उद्देश्य सरकार के कार्यों को जनता तक पहुंचाना और संगठन को जमीनी स्तर पर लगातार सक्रिय रखना है। सूत्र बताते हैं कि बैठक में नेता विपक्ष राहुल गांधी की बढ़ती सक्रियता पर भी चर्चा हुई। अलावा इसके आगामी नगरीय निकाय और विधानसभा उपचुनाव को लेकर भी पार्टी की रणनीति पर फोकस किया गया।
संगठन का अल्टीमेटम: 3 महीने में सुधरो वरना होगी कार्रवाई
बैठक में नेताओं की आपसी खींचतान और बयानों के बीच पार्टी के प्रदेश प्रभारी बिप्लव कुमार देव ने बेहद कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि 3 महीने के भीतर संगठन से हर प्रकार की गुटबाजी खत्म हो जानी चाहिए। बिप्लव देव ने साफ कर दिया कि जो नेता या पदाधिकारी गुटबाजी में शामिल पाए जाएंगे, उनके नाम और मोबाइल नंबर सीधे प्रदेश नेतृत्व एवं केंद्रीय आलाकमान को भेजे जाएंगे।
शिवराज और कैलाश ने भी खोली शिकायतों की फाइल
केवल उपमुख्यमंत्रियों ही नहीं, पार्टी के अन्य कद्दावर नेताओं ने भी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अफसरशाही पर हवाला बोलते हुए कल कि जब सांसद या वरिष्ठ नेता अपने संसदीय क्षेत्रों में जाते हैं, तो स्थानीय कलेक्टर प्रोटोकॉल तक का पालन नहीं करते। कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने संवादहीनता का दुख उठाते हुए दर्द बयां किया कि तमाम कोशिशों के बावजूद मुख्यमंत्री से 15-15 दिनों तक सीधी बात या मुलाकात नहीं हो पाती है।
दतिया हार का मुद्दा भी गरमाया
सूत्र बताते हैं कि बैठक में दतिया उपचुनाव की हार का मामला भी उठा। दतिया हार को संगठन की कमजोरी और तालमेल के अभाव के रूप में देखा जा रहा है। कोर ग्रुप की बैठक में पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा को नहीं बुलाया गया, जबकि इससे पहले वे कोर ग्रुप के सदस्य थे। ज्योतिरादित्य सिंधिया निजी कारणों से बैठक में नहीं पहुंचे। सूत्र यह भी बता रहे हैं कि वरिष्ठ मंत्री प्रहलाद पटेल ने भी अपनी नाखुशी जाहिर की। प्रदेश प्रभारी बिप्लव देव ने सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों की शिकायतें सुनने के बाद ही इनमें सुधार के लिए 3 माह का वक्त दिया।








