सालो से अटकी अनुकंपा नियुक्तियां, कुलगुरु की कार्यप्रणाली पर कर्मचारियों ने उठाए सवाल…..देखें वीडियो
8 अक्टूबर तक नियुक्ति नहीं होने पर आत्मदाह की चेतावनी

8 अक्टूबर तक नियुक्ति नहीं होने पर आत्मदाह की चेतावनी
जबलपुर, यश भारत। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में अनुकंपा नियुक्ति का मामला एक बार फिर गंभीर विवाद का विषय बन गया है। विश्वविद्यालय के कर्मचारियों ने कुलगुरु प्रो. राजेश कुमार वर्मा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि पिछले करीब तीन वर्षों से अनुकंपा नियुक्ति के प्रकरण लंबित हैं। कर्मचारियों के मुताबिक करीब 20 से 25 आश्रित परिवार नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इसके अलावा पदोन्नति, समयमान वेतनमान, तकनीकी कर्मचारियों से जुड़े मामलों और स्थानांतरण सहित कई प्रकरणों में भी कार्रवाई लंबित होने का आरोप लगाया गया है। कर्मचारियों का कहना है कि फाइलों को बार-बार अलग-अलग स्तर पर लंबित रखा जा रहा है। उनका आरोप है कि विश्वविद्यालय में प्रशासनिक कामकाज को लेकर कर्मचारियों, शिक्षकों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों में भी असंतोष है। सेवानिवृत्ति के बाद भुगतान, पीएफ और पेंशन से जुड़े मामलों में भी देरी का आरोप लगाया गया है।
तीन साल से नियुक्ति का इंतजार
सबसे गंभीर मामला उन परिवारों का है, जिनके आश्रित अनुकंपा नियुक्ति की उम्मीद में वर्षों से इंतजार कर रहे हैं। एक महिला आवेदक ने कहा कि उनके पति की मृत्यु को तीन साल हो चुके हैं। उनके पास आय का कोई नियमित साधन नहीं है और बच्चे की स्कूल फीस तक जमा नहीं हो पा रही है। उन्होंने कुलगुरु से अपने पति के स्थान पर अनुकंपा नियुक्ति देने की मांग की है।
महिला ने कहा कि यदि 8 अक्टूबर तक नियुक्ति को लेकर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वह और अन्य आवेदक आत्मदाह जैसा कदम उठाने को मजबूर होंगे। यह बयान उनकी गंभीर आर्थिक और व्यक्तिगत परेशानी को दर्शाता है।
परीक्षाओं और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल
कर्मचारियों ने विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक कामकाज पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप लगाया गया कि समय पर परीक्षाएं नहीं हो रही हैं और छोटी-छोटी प्रशासनिक बातों पर नोटिस जारी किए जा रहे हैं। स्थानांतरण प्रक्रिया को लेकर भी मनमानी का आरोप लगाया गया है। कर्मचारियों का दावा है कि वरिष्ठ कर्मचारियों को हटाकर पसंदीदा लोगों को महत्वपूर्ण स्थानों पर पदस्थ किया गया।कर्मचारियों ने कुलगुरु की कार्यप्रणाली की न्यायिक जांच कराने और मध्यप्रदेश विश्वविद्यालय अधिनियम की धारा 52 लागू करने की मांग की है। उनका कहना है कि इस संबंध में मुख्यमंत्री, राज्यपाल, उच्च शिक्षा विभाग सहित अन्य स्तरों पर शिकायतें भेजी गई हैं।
जाने क्या है धारा 52
मध्यप्रदेश विश्वविद्यालय अधिनियम, 1973 की धारा 52 राज्य सरकार को विशेष परिस्थितियों में विश्वविद्यालय के बेहतर प्रशासन के लिए अधिनियम के प्रावधानों को संशोधित रूप में लागू करने की शक्ति देती है। यह तब लागू की जा सकती है, जब राज्य सरकार इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि विश्वविद्यालय का प्रशासन अधिनियम के अनुसार चलाना संभव नहीं है और इससे विश्वविद्यालय के हित प्रभावित हो रहे हैं। अधिनियम के तहत ऐसी अधिसूचना जारी होने पर विश्वविद्यालय की मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव हो सकते हैं और कुलपति के पद से जुड़े प्रावधान भी प्रभावित होते हैं।
कुलसचिव बोले- प्रक्रिया चल रही है
मामले में विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. रविशंकर सोनवाल ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति को लेकर प्रक्रिया चल रही है। एक बैठक हो चुकी है और दूसरी बैठक भी जल्द आयोजित की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह प्रकरण पिछले दो-तीन वर्षों से लंबित है और विश्वविद्यालय की ओर से जल्द से जल्द कार्रवाई का प्रयास किया जा रहा है।
कुलगुरु ने जिम्मेदारी कुलसचिव पर डाली
वहीं कुलगुरु प्रो. राजेश कुमार वर्मा ने कहा कि प्रशासकीय प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में कुलसचिव से जवाब मांगा गया है और सोमवार शाम तक बिंदुवार प्रस्तुतीकरण देने को कहा गया है। कुलगुरु के अनुसार जिम्मेदारी तय की जाएगी और यदि लापरवाही सामने आती है तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।







