निजी जमीन पर खड़ा कर दिया 1.35 करोड़ का सरकारी भवन : लापरवाही उजागर

दमोह। तेंदूखेड़ा में सरकारी व्यवस्था की निगरानी और निर्माण कार्यों की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। ₹1 करोड़ 35 लाख की लागत से स्वीकृत SDM कार्यालय भवन का निर्माण ही निजी भूमि पर कराया जा रहा था। कलेक्टर प्रताप नारायण यादव के निरीक्षण में मामला सामने आने के बाद निर्माण प्रक्रिया में बरती गई लापरवाही को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है।
कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए EE, PIU, SDO और सब-इंजीनियर सहित संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए विभाग प्रमुख को पत्र लिखा है। साथ ही निजी भूमि पर हुए निर्माण से शासन को हुई अथवा संभावित वित्तीय क्षति की जिम्मेदारी तय कर वसूली की कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
बिना जमीन की जांच शुरू करा दिया निर्माण!
सवाल यह है कि सरकारी भवन के निर्माण से पहले NOC, खसरा-नक्शा और भूमि संबंधी जरूरी औपचारिकताओं की जांच आखिर किस स्तर पर हुई? शासन की राशि से बनने वाले भवन के लिए भूमि की वैधता सुनिश्चित करना संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी थी, लेकिन निर्माण निजी भूमि पर शुरू हो गया।
कलेक्टर यादव ने स्पष्ट किया कि शासकीय राशि का उपयोग केवल निर्धारित शासकीय भूमि पर शासकीय भवन निर्माण के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि निर्धारित शासकीय भूमि पर ही भवन निर्माण कराया जाए और प्रकरण में जिम्मेदारी तय कर नुकसान की भरपाई संबंधित से कराई जाए।
PIU पर सीधी जवाबदेही
कलेक्टर ने साफ किया कि सरकारी भवन के निर्माण के लिए राशि स्वीकृत कराने से लेकर उसे निर्धारित शासकीय भूमि पर बनवाने तक PIU की जिम्मेदारी और जवाबदेही है। निजी भूमि पर निर्माण आखिर क्यों और कैसे शुरू हुआ, इसकी जिम्मेदारी तय करना और संबंधित से वसूली की कार्रवाई करना PIU को अपने स्तर पर करनी होगी।
अब देखना यह होगा कि सरकारी राशि से निजी भूमि पर निर्माण शुरू कराने के मामले में किस अधिकारी की जवाबदेही तय होती है और शासन को हुई क्षति की कितनी वसूली होती है।







