ई-रिक्शा की पुरानी व्यवस्था फेल, अब फिर नए रूट का खेल
9 हजार वाहनों के लिए नया ब्लूप्रिंट, पहले की नंबरिंग और रूट व्यवस्था रही बेअसर

जबलपुर, यश भारत। शहर की बिगड़ती यातायात व्यवस्था के बीच ई-रिक्शा के लिए एक बार फिर नए रूट, जोन और पार्किंग व्यवस्था बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। परिवहन और यातायात विभाग करीब 9 हजार ई-रिक्शा के संचालन को तीन जोन में बांटने की योजना बना रहे हैं। वाहनों की पहचान के लिए अलग-अलग रंग निर्धारित करने और प्रमुख मार्गों पर संचालन प्रतिबंधित करने की भी तैयारी है। सवाल यह है कि जब पहले तय किए गए रूट और नंबरिंग व्यवस्था ही जमीन पर लागू नहीं हो सकी, तो नई व्यवस्था का हश्र क्या होगा?
शहर में ई-रिक्शा संचालन को व्यवस्थित करने के लिए पहले भी रूट निर्धारित किए गए थे। रूट के आधार पर वाहनों की नंबरिंग तक की गई थी। चौराहों और प्रमुख स्थानों पर सवारी बैठाने के लिए स्थान भी निर्धारित किए गए, लेकिन समय बीतने के साथ पूरी व्यवस्था कागजों तक सिमट गई। ई-रिक्शा चालक मनमाने रूट पर दौड़ते रहे और सड़क किनारे कहीं भी सवारी के इंतजार में खड़े होते रहे। नतीजा यह है कि प्रमुख चौराहों और मार्गों पर यातायात दबाव लगातार बना हुआ है।
अब विभाग तीन जोन बनाकर प्रत्येक जोन में अलग रूट निर्धारित करने की तैयारी में है। रंग कोडिंग के जरिए जोन की पहचान और निर्धारित क्षेत्र से बाहर संचालन पर कार्रवाई का दावा भी किया जा रहा है। लेकिन असल चुनौती नियम बनाने की नहीं, उन्हें लागू कराने की है। पूर्व की व्यवस्थाओं की तरह यदि निगरानी कुछ दिनों तक चली और फिर कार्रवाई बंद हो गई, तो नया ब्लूप्रिंट भी फाइलों में दर्ज एक और व्यवस्था बनकर रह जाएगा।
आरटीओ रिंकु शर्मा के अनुसार ई-रिक्शा की बढ़ती संख्या को देखते हुए संचालन व्यवस्थित करना जरूरी है। विभाग संयुक्त रूप से रूट, जोन, पार्किंग और प्रतिबंधित मार्गों का ब्लूप्रिंट तैयार कर रहे हैं। अब देखना होगा कि इस बार व्यवस्था केवल घोषणा बनकर रह जाती है या वास्तव में सड़कों पर दिखाई देती है।







