रक्षाबंधन की पूर्णिमा पर कल लगेगा गहरा आंशिक चंद्रग्रहण, भारत में नहीं आएगा नजर

रक्षाबंधन की पूर्णिमा पर कल लगेगा गहरा आंशिक चंद्रग्रहण, भारत में नहीं आएगा नजर
– चंद्रमा का 96.3 प्रतिशत हिस्सा पृथ्वी की घनी छाया में रहेगा, तांबे जैसा लाल दिखेगा चांद; सुबह 8:03 से दोपहर 11:22 बजे तक चलेगा ग्रहण
भोपाल। रक्षाबंधन की पूर्णिमा यानी 28 अगस्त को इस साल का गहरा आंशिक चंद्रग्रहण देखने को मिलेगा। हालांकि भारत में इसकी दृश्यता शून्य रहेगी। खगोल विज्ञान प्रसारक एवं नेशनल अवार्ड प्राप्त सारिका घारू के अनुसार, भारतीय समयानुसार ग्रहण सुबह के समय होगा और उस दौरान चंद्रमा भारत में क्षितिज से नीचे रहेगा। इसलिए देश में लोग इस खगोलीय घटना को प्रत्यक्ष नहीं देख सकेंगे। सारिका ने बताया कि ग्रहण के दौरान चंद्रमा का करीब 96.3 प्रतिशत भाग पृथ्वी की घनी छाया में चला जाएगा। इसके चलते चंद्रमा तांबे जैसा लाल दिखाई दे सकता है। यह खगोलीय घटना उत्तरी एवं दक्षिणी अमेरिका, पश्चिमी यूरोप, पश्चिमी अफ्रीका और अटलांटिक महासागर के कुछ हिस्सों से देखी जा सकेगी। अनुमान के मुताबिक दुनिया की करीब 41 प्रतिशत आबादी को इसे देखने का अवसर मिलेगा।
तीन घंटे से अधिक चलेगा ग्रहण
भारतीय समय के अनुसार आंशिक चंद्रग्रहण सुबह 8 बजकर 3 मिनट 54 सेकंड पर शुरू होगा और दोपहर 11 बजकर 21 मिनट 59 सेकंड पर समाप्त होगा। इसकी कुल अवधि करीब 3 घंटे 18 मिनट रहेगी। भारत में इस दौरान चंद्रमा क्षितिज के नीचे होने के कारण ग्रहण दिखाई नहीं देगा।
15 दिन के अंतर से ग्रहण होना सामान्य
सारिका घारू ने बताया कि 12 अगस्त को हुए सूर्यग्रहण के करीब 15 दिन बाद यह चंद्रग्रहण हो रहा है। इसे लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की बातें सामने आ रही हैं, लेकिन वैज्ञानिक दृष्टि से 15 दिन के अंतराल में ग्रहण होना सामान्य प्रक्रिया है। कोई भी ग्रहण अकेला नहीं आता, बल्कि ग्रहणों का जोड़ा लगभग 15 दिन के अंतर से बनता है। इसलिए 28 अगस्त का चंद्रग्रहण कोई असामान्य या अनोखी घटना नहीं है।
आगे भी होंगे कई ग्रहण
आने वाले समय में भी कई खगोलीय घटनाएं देखने को मिलेंगी। 6 फरवरी 2027 को वलयाकार सूर्यग्रहण होगा, जो भारत में दिखाई नहीं देगा। 20-21 फरवरी 2027 को उपछाया चंद्रग्रहण होगा, जिसे भारत से देखा जा सकेगा, हालांकि भारत में उपछाया ग्रहण को ग्रहण की मान्यता नहीं दी जाती। इसके बाद 2 अगस्त 2027 को पूर्ण सूर्यग्रहण होगा, जो भारत में आंशिक सूर्यग्रहण के रूप में दिखाई देगा। 16-17 अगस्त 2027 का उपछाया चंद्रग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा।







