मौत का अस्पताल, जच्चा और बच्चा की मौत!: सवालों के घेरे में अस्पताल प्रशासन ….

रीवा | रीवा में अस्पताल में बड़ी लापरवाही सामने आई है। हटवा निवासी कल्पना मिश्रा गांधी स्मृति चिकित्सालय के डॉक्टरों की लापरवाही का शिकार हो गईं। जूनियर डॉक्टरों ने आपरेशन कर दिया। लेकिन एनेस्थीसिया का ऐसा डोज दिया कि वह होश में ही नहीं आई।
जानकारी के अनुसार सीनियर डॉक्टर सोनल अग्रवान की नाइट में ड्यूटी थी। वह दिन और रात दोनों समय नहीं आईं। उनकी गैर मौजूदगी में जूनियर डॉक्टरों ने आपरेशन किया और जच्चा और बच्चा की मौत हो गई।
यहां यह पहली मौत नहीं है। यहां आए दिन इसी तरह की घटनाएं होती रहती है। इस बार तो हद ही पार हो गई। एनेस्थीसिया से लेकर आपरेशन तक जूनियरों ने किया। इसका परिणाम यह रहा कि महिला और बच्चे दोनों की मौत हो गई। मौत के बाद मामले को छुपाने की कोशिश की गई। फाइल बदली गई। सुबह परिजन ने हंगामा किया तो अस्पताल का बचाव करने मनगवां विधायक तक पहुंच गए। उन्होंने प्रदर्शन करने वाले परिजनों के विपरीत बयान देकर अस्पताल का समर्थन किया। मामले को शांत कराने के लिए खानापूर्ति की गई। दो नर्सों को निलंबित किया गया और मामले की जांच के निर्देश दिए गए। अब पांच सदस्यीय टीम मामले की जांच करेगी।
हंगामा के बाद अधीक्षक कक्ष में डीन डॉ सुनील अग्रवाल, मनगवां विधायक नरेन्द्र प्रजापति पहुंचे। परिजनों को भी बुलाया गया। इस दौरान शिकायत के आधार पर दो नर्सों पर अभद्रता और दुव्र्यहार करने की बात सामने आई। इन दोनों नर्सों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का निर्णय लिया गया। जिन्हें निलंबन करने का आदेश जारी किया गया है। उसमें श्रीमती साधना वर्मा नर्सिंग आफीसर और श्रीमती सोनाली मुजाल्दे शामिल हैं। दोनों को निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि में मुख्यालय प्रमुख परिचारिका कार्यालय जीएमएच बनाया गया हैl
परिजनों ने किया जमकर हंगामा
कल्पना मिश्रा पति अमित निवासी हटवा थाना बैकुंठपुर की जीएमएच में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। जच्चा और बच्चा दोनों की मौत हो गई। इसके बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया। हंगामा के बाद डीन ने जांच के आदेश दिए हैं। अधीक्षक ने पांच सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी है। इस कमेटी में डॉ शशि जैन प्राध्यापक और विभागाध्यक्ष नेत्र रोग विभाग अध्यक्ष, डॉ प्रियंक शर्मा, एचओडी सर्जरी सदस्य, डॉ अवतार सिंह, एचओडी एनेस्थीसिया सदस्य, डॉ पद्मा शुक्ला एचओडी स्त्री रोग विभाग सदस्य और श्रीमती उर्मिला समद्दार प्रमुख परिचारिका जीएमएच सदस्य के रूप में शामिल किए गए हैं। इस जांच टीम की अध्यक्ष डॉ शशि जैन रही हैं। मेडिकल कॉलेज में जितनी भी इसके पहले जांच गठित की गई। उनमें डॉ शशि जैन रही, लेकिन किसी को भी न्याय नहीं मिला। इन पर नर्सिंग स्टाफ ने भी जांच के दौरान दबाव बनाने का आरोप लगाया था। ईएनटी के डॉक्टर को बचाने के आरोप लगे थे। इसके अलावा नर्सिंग परिचारिका को लेकर भी जांच चल रही है। इस जांच में भी लीपापोती का आरोप लगा।
10 बिंदु पर जांच
जांच टीम को 10 बिंदु दिए गए हैं। इन सभी बिंदुओं पर जांच की जानी है। मरीज की मृत्यु का कारण, मरीज की चिकित्सालय में भर्ती होने पर चिकित्सकीय स्थिति।
अस्पताल में उपचार प्रक्रियाए यदि शल्य क्रिया संबंधी प्रक्रियाएं की गई हो तो उनका विवरण, सभी नर्सिंग और चिकित्सकीय अधिकारियों द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया, परिजनों के कथन अनुसार मरीज को रक्त की आपूर्ति के लिए समय के संबंध में स्पष्ट अभिमत, उपचार प्रक्रिया में लापरवाही हुई है तो दोषियों के नाम, परिजनों से दुव्र्यवहार किए जाने वालों का चिन्हांकन और स्पष्ट अभिमत। समिति द्वारा उक्त प्रकार की घटनाएं भविष्य में न हो इसकी रोकथाम के उपाय, सुझाव और अन्य बिंदु जो समिति को प्रकरण में इंगित हुए हैं के संबंध में प्रतिवेदन मांगा गया है। जिस तरह से डॉक्टरों का ठीकरा नर्सों पर फोड़ा गया है। इससे नर्स एसोसिएशन भी भड़क गया है। डॉक्टरों पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं हुई। नर्सों को सीधे निलंबित कर दिया गया। इससे नर्स एसोसिएशन ने विरोध जताया है।
नर्सों ने दी चेतावनी
एसोसिएशन का साफ कहना है कि यदि नर्सों का निलंबन वापस नहीं हुआ तो आंदोलन करेंगे। गलती किसी और ने की और सजा किसी और को दी जा रही है। डॉक्टर के खिलाफ जांच बैठा दी गई और नर्सों को बिना नोटिस के ही निलंबित कर दिया गया।







