सुरक्षा और संवाद: कोलार में पुलिस ने जानी जनता की समस्याएं, दिए सुरक्षा टिप्स

सुरक्षा और संवाद: कोलार में पुलिस ने जानी जनता की समस्याएं, दिए सुरक्षा टिप्स
भोपाल, यशभारत। राजधानी के कोलार क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने और अपराधों पर लगाम लगाने के उद्देश्य से पुलिस और जनता के बीच एक अहम जन संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के दिशा-निर्देशन में आयोजित इस बैठक में कोलार थाना अंतर्गत वार्ड 82 डीके-3, कोलार रोड के नागरिकों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। संवाद के दौरान जहां जनता ने अपनी रोजमर्रा की सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं साझा कीं, वहीं पुलिस ने मौके पर ही उनके त्वरित निराकरण का भरोसा दिया।
जनता ने उठाई हॉस्टल, बाहरी मजदूर और देर रात दुकानों की समस्या
बैठक में वार्ड 82 की पार्षद सहित डीके-1, डीके-2 और डीके-3 के करीब 150 से 200 वरिष्ठ नागरिक शामिल हुए। नागरिकों ने क्षेत्र की प्रमुख समस्याओं की ओर पुलिस का ध्यान आकर्षित करते हुए बताया कि पार्कों में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है और देर रात तक चाय की दुकानें खुलने से माहौल खराब होता है। इसके अलावा, क्षेत्र के बॉयज हॉस्टल, पेइंग गेस्ट के बाहर लड़के-लड़कियों के खड़े होने, नए निर्माण कार्यों में लगे बाहरी मजदूरों और नाइजीरियन छात्रों के कैंपस की सुरक्षा व उनकी गाड़ियों की नियमित चेकिंग करने की मांग की गई। नागरिकों ने निजी वाहनों में अवैध रूप से हूटर लगाने और मंदाकिनी चौराहे पर चेकिंग व्यवस्था को और प्रभावी बनाने की बात भी कही।
सुरक्षा के लिए व्हाट्सएप ग्रुप तैयार, वेरिफिकेशन पर जोर
जनसंवाद में मौजूद एसीपी चूना भट्टी आलोक श्रीवास्तव, थाना प्रभारी संजय सोनी और बीट प्रभारियों ने नागरिकों के सुझावों को नोट किया। एसीपी श्रीवास्तव ने सुरक्षा के लिहाज से सभी मकान मालिकों को अपने घरों के बाहर अनिवार्य रूप से सीसीटीवी कैमरे लगाने की सलाह दी। साथ ही, घरेलू नौकरों, किरायेदारों और ठेका मजदूरों का पुलिस वेरिफिकेशन कराने पर जोर दिया।
साइबर फ्रॉड से बचने के लिए Safe Clock अभियान
पुलिस टीम द्वारा नागरिकों को साइबर अपराधों से बचाने के लिए Safe Clock अभियान के तहत जागरूक किया गया। उपस्थित वरिष्ठ नागरिकों को सीनियर सिटिजन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करने की समझाइश दी गई और ऑनलाइन फ्रॉड के नए तरीकों से अवगत कराया गया। आपसी समन्वय को बेहतर बनाने के लिए मौके पर ही पुलिस और जनता का एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया, जिसमें नागरिकों को बीट व माइक्रो-बीट प्रभारियों के मोबाइल नंबर साझा किए गए। स्थानीय जनता ने पुलिस की इस पहल की सराहना करते हुए भविष्य में पूरा सहयोग करने का संकल्प लिया।







