कटनी

सिरदर्द नहीं रोजगार का माध्यम बनने जा रही लैंटाना झाड़ी, लैंटाना की पत्तियों से जैविक खाद और लकड़ी से तैयार होगा ईधन, वन विभाग ने किया डेमन्स्ट्रेशन

कटनी, यशभारत। कटनी जिले के जंगलों में तेजी से फैल रही लैंटाना झाड़ी अब तक वन विभाग और किसानों के लिए सिरदर्द बनी थी, आज वही लोगों के लिए रोजगार और संसाधन का माध्यम बनने जा रही है। कभी बेकार और नुकसानदायक मानी जाने वाली इस विदेशी प्रजाति का इस्तेमाल अब जैविक खाद और वैकल्पिक ईधन के रूप में किया जाएगा। कटनी वन विभाग ने इसके उन्मूलन और उपयोग को लेकर एक नई पहल शुरू की है, जिससे जंगलों की सुरक्षा के साथ ही स्थानीय लोगों को भी लाभ मिल सकेगा। वन मंडल अधिकारी गर्वित गंगवार के अनुसार लैंटाना एक आक्रामक विदेशी झाड़ी है, जो वर्षों पहले अमेरिका से किसी बीज के माध्यम से भारत पहुंची और हिमालयी क्षेत्र से होते हुए देश के विभिन्न हिस्सों में फैल गई। वर्तमान में यह प्रदेश के कई जिलों के वन क्षेत्रों और निजी भूमि पर कैंसर की तरह फैल चुकी है। लैंटाना की सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसकी पत्तियां और लकडिय़ां अत्यधिक ज्वलनशील होती हैं, जिससे जंगलों में आग लगने का खतरा बढ़ जाता है।
लैंटाना की पत्तियों से तैयार होगा जैविक खाद
उन्होंने बताया कि यह झाड़ी स्थानीय वनस्पतियों को नष्ट कर देती है और जैव विविधता को प्रभावित करती है, साथ ही वन्यजीवों के लिए भोजन की उपलब्धता भी कम कर देती है, इसके कारण फलदार पौधों की संख्या घट रही है। पौधारोपण प्रभावित हो रहा है और मवेशियों के लिए हरे चारे का संकट पैदा हो रहा है। वन विभाग फिलहाल कट-रूट सिस्टम तकनीक से इसकी जड़ों को जमीन के भीतर से काटकर समाप्त करने का प्रयास कर रहा है, हालांकि इसे पूरी तरह खत्म करने में हर साल लाखों रुपये खर्च होते हैं। इसी चुनौती को अवसर में बदलने के लिए अब लैंटाना की पत्तियों से जैविक खाद और लकड़ी से ईधन तैयार करने की दिशा में काम शुरू किया गया है।
्रअन्य जिलों में भी लागू हो सकता है मॉडल
डीएफओ गर्वित गंगवार ने बताया कि जंगलों में तेजी से फैल रही लैंटाना की झाडिय़ां वन एवं जैव विविधता के लिए बड़ा खतरा बन चुकी हैं। इस समस्या से निपटने के लिए कटनी वन विभाग ने एक अभिनव मॉडल तैयार किया है, जिसके तहत हटाई गई लैंटाना झाडिय़ों का उपयोग ईधन और अन्य उत्पादों के निर्माण में किया जाएगा। कटनी वनमंडल के अंतर्गत बंगलुरु के सहयोग से लैंटाना के पेलेट्स बनाने का और उसका ईधन के रूप में उपयोग का डेमन्स्ट्रेशन किया गया। आहूजा पेलेट निर्माता की यूनिट में पेलेट बनाए गए और आसपास स्थित दाल मिलों में इसकी टेस्टिंग की गई। निर्माता और उपयोगकर्ता सभी ने पेलेट्स की गुणवत्ता को सराहा।
क्या है वन विभाग की योजना
वन विभाग की योजना है कि लैंटाना की लकड़ी से तैयार ईधन का उपयोग जिले की फैक्ट्रियों और औद्योगिक इकाइयों में किया जाए, वहीं इसकी पत्तियों से जैविक खाद तैयार कर कृषि क्षेत्र में इस्तेमाल किया जा सकेगा, इससे एक ओर जंगलों को इस हानिकारक प्रजाति से मुक्ति मिलेगी तो वहीं दूसरी ओर वैकल्पिक ऊर्जा और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मॉडल सफल रहा तो प्रदेश के अन्य जिलों में भी इसे लागू किया जा सकता है।

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