जर्जर मौत की इमारत में चल रहा सचिवों का दरबार ब्लॉक मुख्यालय के सामने बना रखा है अवैध कार्यालय
कभी भी गिर सकती है छत, फिर भी यहीं बैठ रहे कर्मचारी

जर्जर मौत की इमारत में चल रहा सचिवों का दरबार ब्लॉक मुख्यालय के सामने बना रखा है अवैध कार्यालय
कभी भी गिर सकती है छत, फिर भी यहीं बैठ रहे कर्मचारी
बाराबंकी,यश भारत। विकासखंड सिद्धौर में सरकारी नियमों और सुरक्षा मानकों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। जिन ग्राम पंचायत सचिवों को शासन के रोस्टर के अनुसार पंचायत भवनों में बैठकर ग्रामीणों की समस्याएं सुननी चाहिए, वे ब्लॉक मुख्यालय के सामने स्थित पुराने और डिस्पोज हो चुके प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भवन को अपना स्थायी कार्यालय बनाए हुए हैं। हैरानी की बात यह है कि जिस भवन को जर्जर और खतरनाक घोषित किए जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने खाली कराया था, उसी भवन में आज सचिवों का जमावड़ा लगा रहता है। भवन की दीवारों का प्लास्टर झड़ रहा है, छत से ईंटें और मलबा गिर रहा है, लेकिन इसके बावजूद कर्मचारी यहां बैठकर सरकारी कामकाज चला रहे हैं।
ग्राम पंचायत भवन खाली, सचिवों का अड्डा ब्लॉक मुख्यालय पर
सरकार ने करोड़ों रुपये खर्च कर ग्राम पंचायतों में आधुनिक सुविधाओं से लैस पंचायत भवन बनवाए हैं ताकि ग्रामीणों को उनके गांव में ही सरकारी सेवाएं मिल सकें। लेकिन सिद्धौर में कई सचिव पंचायत भवनों की बजाय ब्लॉक मुख्यालय के सामने स्थित इस खंडहरनुमा भवन में बैठना ज्यादा सुविधाजनक समझ रहे हैं।नतीजा यह है कि ग्रामीणों को अपने कार्यों के लिए गांव से ब्लॉक मुख्यालय तक चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। सवाल उठ रहा है कि जब पंचायत भवन मौजूद हैं तो फिर सचिव वहां बैठने से क्यों कतरा रहे हैं?
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डिस्पोज भवन पर किसका कब्जा?
जानकारी के अनुसार पुराने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की यह बिल्डिंग स्वास्थ्य विभाग द्वारा किसी को किराए पर नहीं दी गई है और न ही किसी विभाग को हस्तांतरित की गई है। इसके बावजूद भवन में सचिवों के कार्यालय संचालित हो रहे हैं। इतना ही नहीं, सूत्र बताते हैं कि कुछ पुलिसकर्मी भी इस जर्जर भवन में रहते हैं। अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस भवन पर कब्जा किसके आदेश से किया गया? यदि कोई बड़ा हादसा हो जाता है तो जिम्मेदार कौन होगा स्वास्थ्य विभाग, ब्लॉक प्रशासन या फिर यहां बैठने वाले कर्मचारी?
बिजली कनेक्शन भी चालू, जांच के आदेश
चौंकाने वाली बात यह भी है कि डिस्पोज भवन में बाकायदा बिजली का उपयोग किया जा रहा है। इस संबंध में विद्युत विभाग के अवर अभियंता दयाल चंद्र ने बताया मामला संज्ञान में आया है। जांच कराई जाएगी। यदि अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए जुर्माना लगाया जाएगा।
अधीक्षक बोले—किसी को नहीं दी गई बिल्डिंग
सिद्धौर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डॉ. हरप्रीत सिंह ने बतायामामले की जानकारी नहीं है। पहले भी भवन खाली कराने के लिए पत्राचार किया गया था। किसी अधिकारी या कर्मचारी को यह भवन किराए पर नहीं दिया गया है।
सीएमओ ने दिए जांच के संकेत
जब इस पूरे मामले पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी बाराबंकी डॉ. रंजन गौतम से बात की गई तो उन्होंने कहा मामला संज्ञान में आया है। संबंधित फाइल मंगाकर जांच कराई जाएगी। यदि भवन पर अवैध कब्जा या अनधिकृत उपयोग पाया गया तो तत्काल भवन खाली कराया जाएगा तथा जिम्मेदार कर्मचारियों पर जुर्माना और विभागीय कार्रवाई की जाएगी







