विजयनगर का एकता चौक बना मौत का गलियारा, एक साल में पांचवीं जान गई;
विधायक से लेकर पार्षद तक मौन, जनता पूछ रही—आखिर कब जागेगा सिस्टम?

जबलपुर। शहर के सबसे तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों में शामिल विजयनगर का एकता चौक आज यातायात अव्यवस्था, अतिक्रमण और सड़क हादसों का पर्याय बनता जा रहा है। हाल ही में हुए दर्दनाक सड़क हादसे में एक व्यक्ति की मौत के बाद एक बार फिर क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय नागरिकों का दावा है कि बीते एक वर्ष के दौरान यह पांचवीं ऐसी दुर्घटना है, जिसमें किसी न किसी व्यक्ति की जान गई है। इसके बावजूद न तो यातायात सुधार के लिए कोई ठोस योजना दिखाई दे रही है और न ही जनप्रतिनिधियों की ओर से कोई प्रभावी पहल।
विकास के दावों के बीच बदहाल यातायात व्यवस्था
विजयनगर को शहर का आधुनिक और विकसित क्षेत्र माना जाता है, लेकिन यहां की यातायात व्यवस्था विकास के दावों की पोल खोल रही है। एकता चौक, अहिंसा चौक और एसबीआई चौक जैसे प्रमुख मार्गों पर हर दिन हजारों वाहन गुजरते हैं। बढ़ती आबादी, नए व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और यातायात के बढ़ते दबाव के बावजूद सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक प्रबंधन को लेकर गंभीरता दिखाई नहीं दे रही है।
शाम होते ही सड़क पर उतर आता है अव्यवस्था का राज
स्थानीय लोगों के अनुसार शाम 5 बजे से रात 8 बजे तक एसबीआई चौक, अहिंसा चौक और एकता चौक की स्थिति सबसे ज्यादा खराब रहती है। कार्यालयों, कोचिंग संस्थानों, स्कूलों और बाजारों से लौटने वाले लोगों के कारण सड़कों पर वाहनों का भारी दबाव बन जाता है। कई बार वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं और लोगों को कुछ सौ मीटर की दूरी तय करने में भी काफी समय लग जाता है।
अतिक्रमण ने सड़क को बना दिया संकरा
क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या सड़कों के दोनों ओर फैला अतिक्रमण है। दुकानों के सामने खड़े वाहन, सड़क तक फैले व्यापारिक प्रतिष्ठान और अव्यवस्थित पार्किंग व्यवस्था ने यातायात को बुरी तरह प्रभावित किया है। चौड़ी सड़कें भी कई स्थानों पर संकरी नजर आती हैं। राहगीरों और वाहन चालकों को रोजाना जोखिम उठाकर सफर करना पड़ता है।
ट्रैफिक सिग्नल का अभाव बन रहा दुर्घटनाओं की वजह
एकता चौक पर ट्रैफिक सिग्नल नहीं होने के कारण चारों दिशाओं से आने वाले वाहन अनियंत्रित तरीके से गुजरते हैं। व्यस्त समय में यह स्थिति और भी खतरनाक हो जाती है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि यहां समय रहते ट्रैफिक सिग्नल और अन्य सुरक्षा उपाय लागू किए जाते तो कई हादसों को रोका जा सकता था। पांच मौतों के बाद भी इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाना लोगों को खटक रहा है।
एकता चौक से जीरो डिग्री तक रात में बढ़ता खतरा
क्षेत्रवासियों का आरोप है कि रात के समय एकता चौक से जीरो डिग्री तक का मार्ग तेज रफ्तार वाहनों और शराब के नशे में वाहन चलाने वालों का अड्डा बन जाता है। कई बार बाइक सवार और कार चालक तेज गति से वाहन दौड़ाते हुए नजर आते हैं। इससे आम लोगों के साथ-साथ सड़क किनारे रहने वाले परिवारों और व्यापारियों में भी भय का माहौल बना रहता है।
विधायक, पार्षद और जिम्मेदार विभागों की चुप्पी पर सवाल
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि क्षेत्र की इस गंभीर समस्या से विधायक, पार्षद और संबंधित विभाग पूरी तरह अवगत हैं। दुर्घटनाओं के बाद कई बार मांगें उठीं, शिकायतें हुईं और जनप्रतिनिधियों का ध्यान भी इस ओर आकर्षित किया गया, लेकिन आज तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया। लगातार हो रही मौतों के बावजूद जिम्मेदारों की चुप्पी लोगों को परेशान कर रही है।
हर हादसे के बाद कुछ दिन चर्चा, फिर सब सामान्य
क्षेत्रवासियों का कहना है कि जब भी कोई बड़ा हादसा होता है, कुछ दिनों तक सड़क सुरक्षा और यातायात व्यवस्था पर चर्चा होती है। अधिकारियों के दौरे और आश्वासन भी मिलते हैं, लेकिन कुछ समय बाद मामला फिर ठंडे बस्ते में चला जाता है। नतीजा यह है कि एकता चौक पर हादसों का सिलसिला लगातार जारी है।
जनता की प्रमुख मांगें
-एकता चौक पर तत्काल ट्रैफिक सिग्नल स्थापित किए जाएं।
-एसबीआई चौक, अहिंसा चौक और एकता चौक क्षेत्र में यातायात सुधार योजना लागू की जाए।
-सड़क के दोनों ओर फैले अतिक्रमण को हटाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए।
-शाम के व्यस्त समय में अतिरिक्त ट्रैफिक पुलिस बल की तैनाती की जाए।
-एकता चौक से जीरो डिग्री तक रात में विशेष चेकिंग अभियान चलाकर शराब पीकर वाहन चलाने वालों पर कार्रवाई की जाए।
-सड़क सुरक्षा ऑडिट कराकर दुर्घटनाओं के कारणों की जांच की जाए।
जनता का सीधा सवाल
जब एक वर्ष में पांच लोगों की जान जा चुकी है, तब भी यदि व्यवस्था नहीं सुधरती, तो आखिर और कितनी मौतों के बाद सिस्टम जागेगा? विजयनगर के रहवासी अब आश्वासनों से आगे बढ़कर ठोस और दिखाई देने वाली कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।






