ट्विशा शर्मा संदिग्ध मौत मामलाः कोर्ट से पीड़ित परिवार को बड़ा झटका, दिल्ली एम्स में दोबारा पोस्टमार्टम की याचिका खारिज

ट्विशा शर्मा संदिग्ध मौत मामलाः कोर्ट से पीड़ित परिवार को बड़ा झटका, दिल्ली एम्स में दोबारा पोस्टमार्टम की याचिका खारिज
सांसद विवेक तन्खा ने क़ी सीबीआई जांच की मांग
10 दिन बाद भी नहीं हो सका अंतिम संस्कार
भोपाल, यश भारत। राजधानी भोपाल में पूर्व मिस पुणे ट्विशा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला अब एक बड़े राष्ट्रीय और सियासी संग्राम में तब्दील हो चुका है। मामले में रसूखदार और कानूनी पृष्ठभूमि से जुड़े ससुराल पक्ष की संलिप्तता को देखते हुए अब देश के वरिष्ठ राजनेता और राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने इस पूरे घटनाक्रम में सीधा हस्तक्षेप किया है। सांसद तन्खा ने मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता को रेखांकित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को एक बेहद कड़ा पत्र भेजा है, जिसमें उन्होंने स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो को सौंपने की पुरजोर मांग की है।
सांसद विवेक तन्खा ने अपने पत्र में साफ तौर पर कहा है कि रसूखदार और कानूनी पृष्ठभूमि से जुड़े ससुराल पक्ष के होने के कारण पीड़ित परिवार के मन में स्थानीय जांच को लेकर गहरा अविश्वास पैदा हो गया है। मृतका के पति भोपाल न्यायालय में अधिवक्ता हैं, जबकि उनकी माता भोपाल की सेवानिवृत्त प्रधान जिला न्यायाधीश रही हैं। तन्खा ने चिंता जताते हुए कहा कि अविश्वास का आलम यह है कि पीड़ित परिवार इस कदर टूट चुका है कि घटना के कई दिन बीत जाने के बाद भी मृतका का अंतिम संस्कार तक नहीं हो पाया है। समय बीतने के साथ महत्वपूर्ण साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका जताते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि इस संवेदनशील प्रकरण में पारदर्शिता और निष्पक्षता केवल सीबीआई जांच के जरिए ही संभव है, ताकि जनता का न्याय प्रणाली पर विश्वास कायम रह सके।
री-पोस्टमार्टम पर जिला अदालत से लगा बड़ा झटका
इस पूरे घटनाक्रम के बीच भोपाल जिला अदालत से मृतका के पीड़ित परिवार को एक बड़ा कानूनी झटका लगा है। कोर्ट ने मृतका के मायके पक्ष की उस मुख्य याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने दिल्ली एम्स में ट्विशा का दोबारा पोस्टमार्टम कराने की अनुमति मांगी थी। अदालत ने उपलब्ध परिस्थितियों और केस डायरी के रिकॉर्ड का अध्ययन करने के बाद स्पष्ट किया कि दूसरी ऑटोप्सी की कोई कानूनी आवश्यकता नहीं बनती। इस कानूनी अड़चन के कारण घटना के 9 दिन बीत जाने के बाद भी मृतका का अंतिम संस्कार नहीं हो पाया है, क्योंकि परिजन स्वतंत्र मेडिकल जांच के जरिए मौत की सच्चाई सामने लाने की मांग पर अड़े हुए हैं। हालांकि, कोर्ट ने यह राहत जरूर दी है कि ट्विशा के शव को सुरक्षित शवगृह में संरक्षित रखा जा सकता है, जिसके बाद भोपाल एम्स के डीप-फ्रीजर में शव को रखने और उसके तापमान को लेकर विशेषज्ञों ने चिंता जताई है।
मुख्यमंत्री ने दिया था आश्वासन, कहा था- कोर्ट के अधीन है री-पोस्टमार्टम
कोर्ट के इस फैसले से ठीक पहले ट्विशा के पीड़ित परिवार ने मंत्रालय में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात की थी। मुख्यमंत्री ने मामले को अत्यंत संवेदनशील मानते हुए आश्वस्त किया था कि राज्य सरकार पूरी तरह पीड़ित परिवार के साथ है और मामले की निष्पक्षता के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो से जांच कराने की अनुशंसा की जाएगी। सीएम ने परिजनों को ढांढस बंधाते हुए यहाँ तक कहा था कि यदि वे चाहें तो पार्थिव शरीर को दिल्ली एम्स भेजने के लिए सरकार खुद वाहन की सुविधा उपलब्ध करा देगी, लेकिन दोबारा पोस्टमार्टम की अनुमति देना पूरी तरह अदालत के अधिकार क्षेत्र में है।
आरोपी पति को हाजिर होने का अल्टीमेटम, नहीं तो पासपोर्ट होगा रद्द
इस मामले में फरार चल रहे आरोपी पति और भोपाल न्यायालय के अधिवक्ता समर्थ सिंह पर कानूनी शिकंजा बेहद कड़ा हो गया है। अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए समर्थ सिंह को आगामी 23 मई को हर हाल में कोर्ट के समक्ष पेश होने का आदेश दिया है। इस मामले में कटारा हिल्स पुलिस ने भी पासपोर्ट निरस्तीकरण की कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस ने साफ कर दिया है कि यदि आरोपी तय तारीख पर अदालत में हाजिर नहीं होता है, तो उसका पासपोर्ट तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया जाएगा।
रिटायर्ड जज सास को पद से हटाने की मांग, राजभवन पहुंचा परिवार
ट्विशा के परिवार ने अब सीधे राजभवन का दरवाजा खटखटाया है। परिजनों ने राज्यपाल को पत्र लिखकर मांग की है कि दहेज मृत्यु के मामले में नामजद और वर्तमान में अग्रिम जमानत पर चल रही रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह को डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर फोरम के अध्यक्ष पद से तत्काल बर्खास्त किया जाए। चूंकि वे खुद एक सेवानिवृत्त प्रधान जिला न्यायाधीश रही हैं, परिजनों का तर्क है कि ऐसे गंभीर आपराधिक मामले के बाद उनका इस न्यायिक पद पर बने रहना अनुचित है। नियमों के मुताबिक गंभीर कदाचार के आधार पर उन्हें हटाने का प्रावधान है। इस पर खाद्य नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि मामला सरकार के संज्ञान में है और वे इस संबंध में अपर मुख्य सचिव से चर्चा कर कानून के मुताबिक सख्त कदम उठाएंगे।
राष्ट्रीय महिला आयोग और पूर्व सैनिकों का फूटा गुस्सा
इधर, नोएडा निवासी ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत पर राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) भी पूरी तरह सख्त रुख अपना चुका है। आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर 7 दिनों के भीतर विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट तलब की है। आयोग ने पुलिस से सीसीटीवी फुटेज, कॉल रिकॉर्ड, फॉरेंसिक साक्ष्य, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और आरोपियों के
पासपोर्ट जब्ती की स्थिति का पूरा ब्योरा मांगा है। वहीं दूसरी ओर, वर्दी
कल्याण सोसायटी के बैनर तले बड़ी संख्या में पूर्व सैन्य अधिकारी और सेवानिवृत्त सैनिक एकजुट हुए और शौर्य स्मारक से सीएम हाउस तक आक्रोश रैली निकाली। पूर्व सैनिकों का कहना है कि मृतका से जुड़े सैन्य अधिकारी वर्तमान में देश की सीमाओं पर तैनात हैं और खुद संघर्ष नहीं कर सकते, इसलिए पूरा पूर्व सैनिक समाज उनके हक के लिए सड़कों पर उतरा है। उन्होंने 7 दिन में ठोस कार्रवाई न होने पर राष्ट्रव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है।
पुलिस कमिश्नर बोले- हत्या नहीं सुसाइड, जांच के लिए 6 टीमें एक्टिव
इस चौतरफा राजनीतिक और सामाजिक दबाव के बीच भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने स्पष्ट किया कि शुरुआती जांच और गले पर मिले बेल्ट के निशानों के मिलान के आधार पर यह हत्या नहीं, बल्कि सुसाइड का मामला प्रतीत हो रहा है। परिजनों के आरोपों पर उन्होंने कहा कि पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चोटों और फंदे के उल्लेख को लेकर जो आपत्तियां उठाई गई हैं, उन्हें देखते हुए पुलिस पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी कार्रवाई कर रही है। घटना के दो दिन के भीतर ही एफआईआर दर्ज कर ली गई थी और हर एंगल की सूक्ष्म जांच के लिए एसआईटी का गठन किया जा चुका है। फरार आरोपी पति समर्थ सिंह के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी कर दिया गया है और उसकी गिरफ्तारी पर 30 हजार रुपये का इनाम घोषित कर पुलिस की 6 टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। पुलिस कमिश्नर ने पहले यह भी कहा था कि परिजनों की संतुष्टि के लिए अगर दूसरा पोस्टमार्टम भी कराना पड़े, तो पुलिस को आपत्ति नहीं है, लेकिन अब कोर्ट ने इस मांग को खारिज कर दिया है।







