हनीट्रैप की मुख्य कड़ी रेशू सागर से गिरफ्तार, सरकारी गवाह बनना चाहती है मास्टरमाइंड श्वेता जैन

हनीट्रैप की मुख्य कड़ी रेशू सागर से गिरफ्तार, सरकारी गवाह बनना चाहती है मास्टरमाइंड श्वेता जैन
भोपाल, यश भारत। इंदौर के रसूखदार शराब व प्रॉपर्टी कारोबारी को जाल में फंसाकर 1 करोड़ रुपए की रंगदारी मांगने वाले हाईप्रोफाइल हनीट्रैप सिंडिकेट में लगातार चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। सोमवार को भोपाल की मीनाल रेसीडेंसी से मास्टरमाइंड श्वेता विजय जैन की गिरफ्तारी के बाद, इंदौर क्राइम ब्रांच ने बुधवार को मामले की मुख्य कड़ी मानी जा रही रेशू उर्फ अभिलाषा चौधरी को सागर से हिरासत में लिया है। रेशू को इस पूरे नेटवर्क का सबसे सक्रिय चेहरा माना जा रहा है, जिसका काम प्रभावशाली लोगों को निशाना बनाना था। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि रेशू के संबंध एक राजनीतिक दल से हैं, जिसकी पुलिस गहराई से जांच कर रही है।
इस बीच, मामले की मुख्य आरोपी श्वेता जैन ने पुलिस पूछताछ में सरकारी गवाह बनने की इच्छा जताई है। यदि कोर्ट से इसकी अनुमति मिलती है, तो मध्य प्रदेश के कई बड़े सफेदपोशों, राजनेताओं और रसूखदारों के चेहरे बेनकाब होना तय है, जिसके चलते भोपाल से लेकर इंदौर तक के प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया है।
क्राइम ब्रांच डीसीपी राजेश त्रिपाठी के मुताबिक, यह पूरा नेटवर्क श्वेता, रेशू और इंदौर की कुख्यात महिला शराब तस्कर अलका दीक्षित की तिकड़ी चला रही थी। रेशू ने श्वेता के जरिए अलका से संपर्क किया था। इसके बाद तीनों ने मिलकर प्रभावशाली लोगों, राजनेताओं और अफसरों को ब्लैकमेल करने की पूरी योजना तैयार की। इस सिंडिकेट ने हाल ही में इंदौर के कारोबारी हितेंद्र सिंह उर्फ चिंटू ठाकुर के निजी फोटो-वीडियो बनाकर उन्हें वायरल करने की धमकी दी थी और 1 करोड़ रुपए की मांग की थी।
जांच में यह भी सामने आया है कि इस गैंग ने निमाड़ क्षेत्र के एक बेहद कद्दावर नेता को भी अपना शिकार बनाया था, जिनका इंदौर में अलका दीक्षित के इलाके में ही मकान है। जब फरियादी चिंटू ठाकुर ने अपनी ऊंची पहुंच का हवाला देकर सिंडिकेट के आगे दबने से इनकार किया, तो अलका ने उसे डराने के लिए निमाड़ के उसी बड़े नेता का कथित हनीट्रैप वीडियो दिखा दिया था। अलका ने दावा किया था कि प्रदेश के कई बड़े नाम उसकी जेब में हैं और कोई उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
इस सिंडिकेट की जड़ें पुलिस महकमे तक भी फैली हुई थीं। क्राइम ब्रांच ने इस मामले में इंटेलिजेंस शाखा के हेड कॉन्स्टेबल विनोद शर्मा को हिरासत में लिया है, जिससे देर रात तक पूछताछ की गई। विनोद शर्मा के सीधे संपर्क अलका दीक्षित से थे और वह गैंग को पुलिसिया कार्रवाई से बचाने व बैकएंड इनपुट देने का काम करता था। इसके अलावा अलका का बेटा जयदीप दीक्षित और प्रॉपर्टी कारोबारी लाखन चौधरी भी पुलिस की गिरफ्त में हैं, जिनसे पूछताछ की जा रही है।
फिलहाल, क्राइम ब्रांच की टीमें आरोपियों के मोबाइल फोन, लैपटॉप और क्लाउड स्टोरेज से डिलीट किए गए ऑडियो-वीडियो और अन्य डिजिटल दस्तावेज रिकवर करने में जुटी हैं। सूत्रों के मुताबिक, कुछ अहम फाइलें पुलिस के हाथ लग भी चुकी हैं। हालांकि, इस हाईप्रोफाइल मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि ब्लैकमेलिंग की शिकायत मिलने के पूरे 19 दिन बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। वहीं, दूसरी ओर शिकायतकर्ता चिंटू ठाकुर का खुद का भी आपराधिक बैकग्राउंड है और वह पहले से ही इंदौर के आजाद नगर थाने में हत्या के प्रयास के एक मामले में आरोपी है। पुलिस अब जब्त डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर इस सिंडिकेट से जुड़े अन्य चेहरों की तलाश कर रही है।







