साहब… पीएम आवास में नाम जोड़ने जनपद सहायक सेक्रेटरी मांग रहे 2 हजार की रिश्वत, कलेक्टर ने अधिकारियों को लगाई फटकार

रीवा । कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी की पदस्थापना के बाद से जनता के बीच न्याय की उम्मीदें जाग गई हैं. कलेक्टर के तत्काल एक्शन और मौके पर ही मामले का निराकरण करने वाले अंदाज के चलते प्रत्येक मंगलवार को जनसुनवाई में हजारों लोग न्याय की गुहार लगाने कलेक्टरेट पहुंच रहे हैं. मंगलवार के न्याय की उम्मीद में एक पिता अपनी 25 वर्षीय दिव्यांग बेटी को गोद में लेकर कलेक्टर के सामने जा खड़ा हुआ. उन्होंने अपनी दिव्यांग बेटी की फरियाद सुनाई. जिसे सुन क्लेक्टर भी सन्न रह गए और अधिकारियों को फटकार लगाई.
जनसुनवाई मे पहुंचे दिव्यांग रूचि तिवारी के पिता अर्जुन तिवारी ने आरोप लगाते हुए बताया कि “वह सिरमौर जनपद पंचायत स्थित ग्राम पंचायत गोदहा के निवासी हैं. उनका एक बेटा है और एक 25 वर्षीय बेटी है, जो जन्म से ही दिव्यांग है. कई बार उनके द्वारा पीएम आवास के लिए आवेदन किया गया, लेकिन उनका नाम लिस्ट से काट दिया गया. लिस्ट में नाम जोड़ने के लिए जनपद में पदस्थ सहायक सेक्रेटरी रामरती साहू के द्वारा 2000 रूपए मांगे जा रहे है.”
इसके बाद कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी ने जनसुनवाई के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े सिरमौर जनपद सीईओ को जमकर फटकार लगाई. उन्होंने जनपद सीईओ से कहा, “छोटी छोटी समस्याओं को लेकर लोगों को कलेक्ट्रेट कार्यालय आना पड़ रहा है. क्या स्थानीय स्तर पर लोगों की समस्याएं सुनकर उनका निरकारण नहीं किया जा सकता?” जिसके बाद जनपद सीईओ को कार्रवाई के निर्देश देते हुए, शाम तक मामले का निराकरण करने आदेश दिया गया है.
कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी ने मौके पर उपस्थित तहसीलदार शिवशंकर शुक्ला को निर्देश दिए और कहा कि “शासकीय वाहन केवल प्रशासनिक अधिकारियो के लिए नहीं है. आम जनता की सुविधा के लिए भी है. तत्काल दिव्यांग बेटी और उसके पिता को उसके गांव तक छोड़कर आएं.” कलेक्टर के निर्देश मिलते ही तहसीलदार ने फरियादी पिता और उसकी दिव्यांग बेटी को अपने शासकीय वाहन में बैठाकर सिरमौर जनपद के लिए रवाना हुए.
तहसीलदार शिवशंकर शुक्ला ने बताया कि “ग्राम गोदहा की एक दिव्यांग बच्ची है, जो फरियाद लेकर अपने पिता के साथ जनसुनवाई में पहुंची थी. पीएम आवास की मांग को लेकर कलेक्टर के समक्ष उपस्थित हुई थी. उन्होंने बिना किसी देरी के उनकी समस्या निराकरण करने का निर्देश सम्बंधित जनपद सीईओ को दिया है. इसके अलावा फरियादी का गांव दूर होने के कारण शासकीय वाहन से उन्हें छोड़ने के लिए निर्देशित कियाl







