डिजिटल न्याय व्यवस्था पर मंथन, जबलपुर में जुटा न्यायपालिका का शीर्ष नेतृत्व
राष्ट्रीय सेमिनार में सीजेआई सहित सुप्रीम कोर्ट के नौ न्यायाधीश शामिल, न्यायिक सुधारों पर चर्चा

जबलपुर,यशभारत। संस्कारधानी शनिवार को देश की न्यायिक व्यवस्था से जुड़े एक ऐतिहासिक आयोजन की साक्षी बनी। मध्यप्रदेश हाई कोर्ट द्वारा नेताजी सुभाषचंद्र बोस कल्चरल एंड इन्फॉर्मेशन सेंटर में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में देश की न्यायपालिका का शीर्ष नेतृत्व, विधि विशेषज्ञ एवं प्रशासनिक अधिकारी एक मंच पर नजर आए। “फ्रेगमेंटेशन टू फ्यूजन : एम्पावरिंग जस्टिस वाया यूनाइटेड डिजिटल प्लेटफॉर्म इंटीग्रेशन” विषय पर आयोजित इस सेमिनार में डिजिटल न्याय व्यवस्था और न्यायिक सुधारों पर विस्तार से चर्चा की गई।

कार्यक्रम में भारत के प्रधान न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। वहीं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। आयोजन की विशेषता यह रही कि सुप्रीम कोर्ट के नौ वरिष्ठ न्यायाधीश एक साथ कार्यक्रम में शामिल हुए। इनमें जस्टिस जितेंद्र कुमार माहेश्वरी, जस्टिस पीएस नरसिम्हा, जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा, जस्टिस पीबी वारले, जस्टिस एन कोटेश्वर सिंह, जस्टिस आर महादेवन, जस्टिस मनमोहन, जस्टिस आलोक अराधे एवं जस्टिस संजीव सचदेवा शामिल रहे। इसके अलावा मध्यप्रदेश हाई कोर्ट के सभी न्यायाधीश भी उपस्थित रहे।

मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा ने अपने संबोधन में कहा कि वर्षों से न्याय व्यवस्था की सबसे बड़ी चुनौती विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी रही है। पुलिस, न्यायालय, जेल, फॉरेंसिक प्रयोगशाला और चिकित्सा विभाग अलग-अलग कार्य करते रहे, जिसके कारण आम लोगों को अनावश्यक देरी और परेशानियों का सामना करना पड़ता था। अब नई डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से इन सभी विभागों को एकीकृत प्लेटफॉर्म से जोड़ने की दिशा में कार्य किया जा रहा है, जिससे सूचनाओं का आदान-प्रदान तेज, पारदर्शी और प्रभावी हो सकेगा।
उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था में केवल तकनीकी दक्षता ही नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं का भी विशेष महत्व है। डिजिटल नवाचार और संवैधानिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाए रखना समय की आवश्यकता है। उन्होंने मध्यप्रदेश सरकार द्वारा न्याय वितरण प्रणाली को मजबूत करने के प्रयासों की सराहना भी की।

सेमिनार में बंदियों की समयपूर्व रिहाई से जुड़े विशेष डिजिटल मॉड्यूल की जानकारी भी दी गई। बताया गया कि उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप तैयार इस प्रणाली के जरिए अधिकृत अधिकारी प्रकरण क्रमांक, सीएनआर नंबर अथवा एफआईआर नंबर के माध्यम से बंदियों की पात्रता और अभिलेखों की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। इसमें आधार प्रमाणित डिजिटल हस्ताक्षर, समयरेखा निगरानी और रंग आधारित स्थिति मॉनिटरिंग जैसी आधुनिक सुविधाएं शामिल की गई हैं।
कार्यक्रम में “संकेत संवाद मध्यस्थता” पहल को भी सराहा गया। इस पहल के माध्यम से सुनने और बोलने में असमर्थ लोगों को सांकेतिक भाषा के जरिए न्याय प्रक्रिया से जोड़ा जा रहा है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि न्याय केवल शब्दों का नहीं, बल्कि संवेदनाओं का भी विषय है और यह पहल न्याय को अधिक मानवीय बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
वीवीआईपी मूवमेंट को देखते हुए शहर में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। कार्यक्रम स्थल एवं आसपास के क्षेत्रों में पुलिस बल तैनात रहा। प्रधान न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत शुक्रवार शाम को ही जबलपुर पहुंच गए थे। सेमिनार को न्यायिक क्षेत्र में डिजिटल बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।






