वर्दी का एकमात्र धर्म जनसेवा और राष्ट्रहित: डीजीपी कैलाश मकवाणा

वर्दी का एकमात्र धर्म जनसेवा और राष्ट्रहित: डीजीपी कैलाश मकवाणा
25वीं वाहिनी एसएएफ में 11 माह का कठिन प्रशिक्षण पूरा कर पुलिस बेड़े में शामिल हुए नव आरक्षक
भोपाल, यश भारत। विशेष सशस्त्र बल की 25वीं वाहिनी में गुरुवार को नव आरक्षकों का भव्य दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने परेड का निरीक्षण कर सलामी ली। राष्ट्रगान के साथ शुरू हुए इस गरिमामय समारोह में 11 माह के कड़े प्रशिक्षण के बाद तैयार नव आरक्षक औपचारिक रूप से पुलिस परिवार का हिस्सा बने।
आरक्षक ही संगठन की असली शक्ति
समारोह को संबोधित करते हुए डीजीपी मकवाणा ने कहा कि मध्य प्रदेश पुलिस का इतिहास गौरवशाली रहा है। उन्होंने जोर देते हुए कहा, आरक्षक संगठन की सबसे महत्वपूर्ण शक्ति हैं। 11 माह के कठिन प्रशिक्षण के बाद ये जवान विभाग की कार्यक्षमता को नई मजबूती प्रदान करेंगे। उन्होंने जवानों को सीख दी कि वर्दी धारण करने के बाद शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य, ईमानदारी और संवेदनशीलता ही उनकी पहचान होनी चाहिए। पुलिस सेवा केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि जनसुरक्षा का बड़ा दायित्व है।
साइबर सुरक्षा और सिंहस्थ 2028 पर फोकस
बदलते अपराधों के दौर पर चर्चा करते हुए डीजीपी ने कहा कि अब पुलिसकर्मियों को तकनीकी रूप से सशक्त होना अनिवार्य है। उन्होंने सिंहस्थ 2028 की तैयारियों का जिक्र करते हुए ड्रोन सर्विलांस, सीसीटीवी मॉनिटरिंग और इंटीग्रेटेड कमांड सिस्टम में दक्षता हासिल करने पर जोर दिया। साथ ही नक्सल विरोधी अभियानों और चुनाव ड्यूटी में एसएएफके साहस की सराहना भी की।
पहली बार प्रशिक्षण में सोशल मीडिया अपराध शामिल
सेनानी नागेंद्र सिंह ने प्रशिक्षण प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि 15 जून से शुरू हुए इस बुनियादी प्रशिक्षण में पहली बार साइबर क्राइम और सोशल मीडिया अपराध जैसे विषयों को पाठ्यक्रम में जोड़ा गया। इसके अलावा जवानों को वेपन ट्रेनिंग, बलवा ड्रिल और भीड़ नियंत्रण का विशेष अभ्यास कराया गया। इन जवानों ने खेल के मैदान (हॉकी व कबड्डी) में भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी चमक बिखेरी है।







