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“कुछ तस्वीरें सिर्फ तस्वीरें नहीं होतीं, वो वक्त के सीने पर दर्ज दर्द की इबारत होती हैं…इतिहास युद्धों से ही नहीं कांपता, कभी-कभी एक मां की ख़ामोश मौत भी सदियों तक रुला जाती है…”

11 दिन बाद मदर्स डे की खुशियों के बीच दर्द की तस्वीर हुई वायरल..... मां बेटे का वह तस्वीर जिसने पूरे देश को रुलाया था

जबलपुर यश भारत। रविवार को पूरा मुल्क मदर्स डे के जश्न में डूबा हुआ था। सोशल मीडिया पर मां के नाम मोहब्बत लिखी जा रही थी। कहीं तस्वीरें थीं, कहीं केक था, कहीं दुआएं थीं, कहीं मां के कदमों को जन्नत बताया जा रहा था।लेकिन इसी शोर, इसी जश्न और इन्हीं अल्फ़ाज़ों के दरमियान बरगी बांध के बैकवॉटर से जुड़ी एक तस्वीर फिर सामने आई… और उसने पूरे शहर ही नहीं, बल्कि हर संवेदनशील दिल को ख़ामोश कर दिया।

वह तस्वीर कोई साधारण तस्वीर नहीं थी…वह एक मां की आखिरी दुआ थी…वह ममता का आखिरी सज्दा थी…

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वह दर्द का ऐसा मंज़र था, जिसे देखकर रेस्क्यू टीम की आंखें भी नम हो गई थीं।11 दिन पहले हुए दर्दनाक क्रूज हादसे में जब गहरे पानी के भीतर तलाश जारी थी, तब डूबे हुए क्रूज के मलबे के बीच यह दृश्य मिला—एक मां अपने मासूम बेटे को सीने से लगाए हुई थी।दोनों की सांसें थम चुकी थीं…लेकिन मां की बाहों की गिरफ़्त अब भी वैसी ही थी।मानो वह मौत से भी कह रही हो“मेरी जान ले ले…मगर मेरी औलाद को मुझसे जुदा मत कर…”जब मदर्स डे पर यह तस्वीर फिर वायरल हुई, तो जश्न के बीच अचानक ख़ामोशी उतर आई। मुस्कुराती पोस्टों के बीच यह तस्वीर एक ऐसा मातमी पैग़ाम बनकर सामने आई, जिसने याद दिला दिया कि मां सिर्फ एक रिश्ता नहीं… वह आखिरी सांस तक चलने वाली इबादत है।

     यह सिर्फ एक फोटो नहीं…

     यह ममता की तफ़्सीर है।

       यह दर्द की वह दास्तां है…

जिसे पढ़कर आंखें नम होना लाज़िमी है।

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आज शहर फिर अपनी रफ्तार में लौट आया है…

नई खबरें हैं, नए मुद्दे हैं, नए हैशटैग हैं और सोशल मीडिया पर नई बहसें भी।किन्तु बरगी बांध की लहरों में कैद वह मंजर आज भी स्मृतियों के किनारों से टकरा रहा है..एक मां… जो अपनी आख़िरी सांसों के बाद भी अपने मासूम को सीने से लगाए मिली।मौत ने दोनों की धड़कनें थाम दीं…मगर मां की ममता की गिरफ़्त ढीली न कर सकी। कहते हैं “मां की मोहब्बत की कोई तफ़सील नहीं होती,वह आख़िरी सांस के बाद भी औलाद की हिफाज़त में खड़ी रहती है…बरगी की वह तस्वीर अब महज़ एक हादसे की तस्वीर नहीं रही…

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       “वह ममता का मरसिया बन चुकी है…

एक ऐसी दास्तान, जिसे पढ़कर पत्थर दिल भी नम हो जाए।

शायद इसी लिए कहा गया है मां खुद फ़ना हो सकती है”

मगर अपनी औलाद के लिए उसकी दुआएं कभी दफ़्न नहीं होतीं बरगी की लहरें आज भले शांत दिखाई देती हों मगर उनकी ख़ामोशी में आज भी एक मां की ममता की सिसकियां सुनाई देती हैं…और शायद यह शहर उस दृश्य को कभी भुला नहीं पाएगा।

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पूरे देश ने देखा था रूह कंपा देने वाला मंजर

11 दिन पहले हुए क्रूज हादसे ने 39 से अधिक परिवारों की खुशियां हमेशा के लिए छीन लीं। आगरा से बुलाई गई स्पेशल डाइविंग टीम जब गहरे पानी में सर्चिंग कर रही थी, तब जो दृश्य सामने आया उसने अनुभवी रेस्क्यूकर्मियों तक को स्तब्ध कर दिया। डूबे हुए क्रूज के मलबे के बीच एक मां का शव मिला, जो अपने मासूम बच्चे को सीने से लगाए हुए थी। दोनों की सांसें थम चुकी थीं, लेकिन मां की बाहों की पकड़ ढीली नहीं हुई थी।

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मौत भी नहीं तोड़ पाई मां की ममता

कहा जाता है कि मौत इंसान से सब कुछ छीन लेती है, लेकिन बरगी बांध के पानी ने उस दिन देखा कि मां की ममता मौत से भी ज्यादा मजबूत होती है। वह खुद जिंदगी की जंग हार गई, लेकिन आखिरी सांस तक अपने बच्चे को सीने से लगाए रही। यह दृश्य आज भी लोगों की आंखों में ताजा है।

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