डोलोमाइट खनन से संवरेगा बड़वारा का आदिवासी अंचल, प्रशासन ने कहा : जिले के विकास में नया अध्याय जुडऩे जा रहा, 50 हेक्टेयर भूमि पर तीन विशाल डोलोमाइट ब्लॉक्स को मध्यप्रदेश स्टेट माइनिंग कॉर्पोरेशन के लिए किया आरक्षित

कटनी, यशभारत। जिले के विकास की इबारत में अब एक नया अध्याय जुडऩे जा रहा है। शासन ने आदिवासी बाहुल्य बड़वारा क्षेत्र की आर्थिक तस्वीर बदलने के लिए एक बड़ा निर्णय लिया है। बड़वारा के बड़ेरा और बचरवाड़ा ग्रामों में 50 हेक्टेयर लगभग 125 एकड़ भूमि पर तीन विशाल डोलोमाइट ब्लॉक्स को मध्यप्रदेश स्टेट माइनिंग कॉर्पोरेशन के लिए आरक्षित कर दिया गया है। इस फैसले से न केवल जिले के राजस्व में भारी वृद्धि की उम्मीद है, बल्कि पिछड़े माने जाने वाले आदिवासी अंचल में औद्योगिक क्रांति की सुगबुगाहट भी शुरू हो गई है। कटनी जिला पहले से ही चूना पत्थर, बॉक्साइट, मार्बल और आयरन ओर के लिए वैश्विक पटल पर पहचान रखता है। अब बड़वारा के डोलोमाइट ब्लॉक्स इस फेहरिस्त में नया नाम जोड़ेंगे। जानकारों का मानना है कि डोलोमाइट की उपलब्धता से इस क्षेत्र में खनिज आधारित उद्योगों का विस्तार होगाए जो लंबे समय से केवल पारंपरिक खेती और वनोपज पर निर्भर था। इस परियोजना का सबसे सकारात्मक पहलू रोजगार सृजन है। खनन प्रक्रिया शुरू होते ही क्षेत्र में भारी मशीन ऑपरेटरों, तकनीकी विशेषज्ञों, ड्राइवरों और कुशल अकुशल श्रमिकों की बड़ी मांग निकलेगी।
रोजगार खदानों में स्थानीय युवाओं की भर्ती
परिवहन, वाहन मरम्मत, खान पान और छोटे फुटकर व्यवसायों में तेजी आएगी। यदि स्थानीय प्रतिभा को प्राथमिकता दी जाती है, तो बड़वारा से होने वाले पलायन में भारी कमी देखी जा सकती है। बुनियादी ढांचे में बदलाव आएगा। अक्सर देखा गया है कि खनन परियोजनाओं के आने से दुर्गम क्षेत्रों तक सडक़ों का जाल बिछ जाता है। बड़वारा में भी भारी वाहनों की आवाजाही के लिए बेहतर सडक़ों का निर्माण, बिजली की निरंतर आपूर्ति और जल प्रबंधन के कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है। इसका सीधा लाभ उन गांवों को मिलेगा जो वर्तमान में मुख्यधारा से कटे हुए हैं।
सीएसआर से बदलेगी गांवों की सूरत
खनन कंपनियों के लिए अनिवार्य कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी फंड के माध्यम से आदिवासी गांवों में शिक्षाए स्वास्थ्य और शुद्ध पेयजल की सुविधाओं में निवेश किया जाएगा। स्थानीय स्कूलों का उन्नयन और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की बेहतरी इस परियोजना के दूरगामी परिणाम हो सकते हैं। जिले का सालाना खनिज राजस्व पहले ही 160 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर चुका है। नए ब्लॉक्स से इस कोष में और इजाफा होगा। राजस्व की इस बढ़ोत्तरी के साथही प्रशासन पारदर्शिता को लेकर भी मुस्तैद है। ईचेक गेट और हाईटेक माइनिंग सर्विलांस सिस्टम के जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि एक भी पत्थर अवैध रूप से सीमा से बाहर न जाए। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि औद्योगिक विकास के साथ ही पर्यावरण का संतुलन बना रहे। साथ ही, यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि क्या खनिज संपदा का लाभ वास्तव में जमीनी स्तर पर रहने वाले अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा यदि योजनाबद्ध तरीके से काम हुआ, तो बड़वारा का यह आदिवासी अंचल जल्द ही जिले के सबसे समृद्ध क्षेत्रों में से एक होगा।
इनका कहना है
बड़ेरा और बचरवाड़ा में तीन बड़े डोलोमाइट ब्लॉक्स को माइनिंग कॉर्पोरेशन के पक्ष में आरक्षित किया है। यह कदम खनिज आधारित विकास को नई गति देगा। हमारा प्राथमिक उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इस खनिज संपदा का सीधा लाभ स्थानीय आदिवासियों और युवाओं को मिले।
-आशीष तिवारी, कलेक्टर






