बरगी नहर के पानी के लिए अभी और इंतजार, फरवरी तक काम पूरा करने की गाइडलाइन, अब अपै्रल भी बीता, अधिकारी कह रहे : दो माह और लगेंगे

कटनी, यशभारत। बरगी व्यपवर्तन नर्मदा नहर परियोजना का निर्माण अब भी अधूरा है। करीब 185 मीटर सुरंग निर्माण में दो माह का अतिरिक्त समय लगने की संभावना जताई गई है। इससे पहले फरवरी तक कार्य पूरा करने की गाइडलाइन तय की गई थी, लेकिन अप्रेल बीतने के बाद भी काम पूरा नहीं हो पाया। परियोजना की हालत यह है कि स्लीमनाबाद क्षेत्र में बन रही 12 किलोमीटर लंबी अंडरग्राउंड टनल अब तक पूरी नहीं हो सकी है। बार-बार समय सीमा तय होने के बावजूद निर्माण कार्य अटकता जा रहा है। विदित हो कि वर्ष 2008 में शुरू हुई इस महत्वाकांक्षी योजना को 40 माह में पूरा कर 2011 तक किसानों और शहरों को पानी पहुंचाने का लक्ष्य था लेकिन 2026 में भी परियोजना अधूरी पड़ी है। पिछले दिनों कलेक्टर आशीष तिवारी ने परियोजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई थी। यह परियोजना जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना और रीवा जिलों के लिए जीवनरेखा मानी जा रही है। योजना पूरी होने के बाद करीब 2 लाख 45 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी, जबकि कटनी शहर को पेयजल संकट से राहत मिलने की उम्मीद है।
पुरानी मशीनें बनीं सबसे बड़ी बाधा
स्लीमनाबाद में पहाड़ के नीचे लगभग 30 मीटर गहराई में बन रही देश की सबसे लंबी जल सुरंग का निर्माण टनल बोरिंग मशीन टीबीएम से किया जा रहा है। लेकिन पुरानी मशीनों में लगातार खराबी आने से काम बार.बार रुक जा रहा था। डाउन स्ट्रीम की मशीन खराब होने के बाद उसकी मरम्मत के लिए करीब 100 फीट गहरी खुदाई करनी पड़ी थी। मशीन सुधार के लिए अमेरिका से इंजीनियर और उपकरण बुलाए गए थे। जानकारों के अनुसार क्षेत्र की भूगर्भीय संरचना भी चुनौती बनी रही। पत्थर, मिट्टी और पानी की मिश्रित परतों के कारण मशीनों के कटर बार-बार टूट रहे थे। कई बार पानी रिसाव और मिट्टी धंसने जैसी घटनाओं के कारण छह.छह माह तक काम बंद रखना पड़ा।
लागत के साथ इंतजार भी बढ़ा
करीब 5200 करोड़ रुपए की इस परियोजना में अकेले टनल निर्माण पर अब तक 800 करोड़ रुपए से अधिक खर्च हो चुके हैं और अनुमान है कि यह लागत 1400 करोड़ रुपए तक पहुंच सकती है। हर माह करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद काम समय पर पूरा नहीं हो पा रहा। वर्ष 2023 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ने जून तक टनल निर्माण पूरा करने की समय सीमा तय की थी लेकिन वह भी पूरी नहीं हो सकी। अब अधिकारियों का अनुमान है कि पूरी परियोजना को पूरी तरह गति पकडऩे में अभी और समय लग सकता है।
किसानों और शहरों को बड़ी उम्मीद
परियोजना पूरी होने पर जबलपुर में 60 हजार हेक्टेयर, कटनी में 21 हजार 823 हेक्टेयर, सतना में 1 लाख 59 हजार 655 हेक्टेयर और रीवा में 3 हजार 532 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी। कटनी जिले के बहोरीबंद, रीठी, स्लीमनाबाद और विजयराघवगढ़ क्षेत्र के हजारों किसानों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। बैठक में कटनी शहर की पेयजल योजना की भी समीक्षा हुई। कलेक्टर ने नगर निगम अधिकारियों को निर्देश दिए कि घिनौची नाला क्षेत्र में पक्के निर्माण और पाइपलाइन की कार्ययोजना अभी से तैयार की जाएए ताकि नहर से पानी छोड़े जाने पर रिसाव न हो और शहरवासियों को जल्द नर्मदा जल मिल सके।






