भोपाल में बड़ा फर्जीवाड़ा: एक्सीडेंट किसी और का, पुलिस की जब्ती में कोई और! बीमा क्लेम के लिए ट्रैक्टर ही बदल डाला

भोपाल में बड़ा फर्जीवाड़ा: एक्सीडेंट किसी और का, पुलिस की जब्ती में कोई और! बीमा क्लेम के लिए ट्रैक्टर ही बदल डाला
भोपाल, यशभारत। राजधानी के परवलिया सड़क थाना क्षेत्र में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पुलिस की जांच और बीमा क्लेम की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्राम रतनपुरा में हुए दर्दनाक हादसे के बाद अब एक बड़ा सिंडिकेट सक्रिय नजर आ रहा है, जिसने असली दुर्घटनाकारी ट्रैक्टर को बचाने के लिए उसकी जगह दूसरा ट्रैक्टर खड़ा कर दिया। लेकिन कहते हैं न कि अपराधी कितना भी शातिर क्यों न हो, कोई न कोई सुराग छोड़ ही देता है यहाँ जालसाज ट्रैक्टर तो बदल ले गए, लेकिन उसकी एक्सेसरीज बदलना भूल गए।

नए टायर बनाम घिसे टायर: ऐसे पकड़ी गई चोरी
बीती 26 मार्च को जिस नीले रंग के फार्मट्रैक ट्रैक्टर ने एक बाइक सवार की जान ली थी, उसकी वीडियोग्राफी में सामने के टायर बिल्कुल नए थे। लेकिन हैरानी की बात यह है कि पुलिस ने जिस ट्रैक्टर को जब्त दिखाया है, उसके सामने के टायर पूरी तरह घिसे हुए हैं। मामला यहीं खत्म नहीं होता; जब्त ट्रैक्टर के हुड का रंग अंदर-बाहर से सफेद है, जबकि हादसे वाले असली ट्रैक्टर का हुड ऊपर से नीला और अंदर से मिलिट्री कलर का था।
एक्सेसरीज ने खोली पोल, गायब मिले दुर्घटना के निशान
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस कस्टडी में मौजूद ट्रैक्टर में ड्राइवर सीट के पीछे बड़े-बड़े साउंड बॉक्स लगे हैं और स्टीयरिंग के पास साइड मिरर भी है, जबकि असली ट्रैक्टर में ये दोनों चीजें नहीं थीं। इसके अलावा, बंपर पर लिखे किसान ट्रैक्टर्स की लिखावट और मोबाइल नंबरों में भी भारी अंतर पाया गया है। जब्त ट्रैक्टर पर राजपूत और नंबर लिखे हुए हैं, जो असली वाहन पर गायब थे। सबसे बड़ा तकनीकी सवाल यह है कि दुर्घटना में वाहन बाईं ओर पलटा था, लेकिन जब्त ट्रैक्टर पर पलटने या खरोंच का एक भी निशान नहीं है।
जांच के घेरे में सेटिंग का खेल
यह पूरी कवायद बीमा कंपनी को चूना लगाने और रसूखदार आरोपियों को बचाने की ओर इशारा कर रही है। अफसरों को कागजी कार्रवाई में तो सब कुछ ओके मिला, लेकिन मौके की हकीकत और थाने में खड़े वाहन का यह अंतर विभाग की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा करता है। अब मांग उठ रही है कि थाना परिसर और घटना स्थल के रास्ते में लगे सीसीटीवी कैमरों को खंगाला जाए, जिससे पता चल सके कि आखिर बीच रास्ते में ट्रैक्टर का यह कायाकल्प किसने और किसके इशारे पर किया।







