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पश्चिम एशिया संकट पर केंद्र सरकार ने 25 मार्च को सर्वदलीय बैठक बुलाई

 ऑल पार्टी मीटिंग के बाद कड़े फैसले सामने आ सकते हैं।

पश्चिम एशिया संकट पर केंद्र सरकार ने 25 मार्च को सर्वदलीय बैठक बुलाई

 ऑल पार्टी मीटिंग के बाद कड़े फैसले सामने आ सकते हैं।

ANI Government calls all party meeting on West Asia crisis on March 25

नई दिल्ली: भारत सरकार ने पश्चिम एशिया में जारी संकट को लेकर 25 मार्च (बुधवार) शाम 5 बजे सर्वदलीय बैठक बुलाई है।इससे पहले आज, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हालिया वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा घटनाओं के मद्देनज़र एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में भारत की रक्षा तैयारियों की भी समीक्षा की गई।बैठक में सीडीएस जनरल अनिल चौहान, एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंग, जनरल उपेंद्र द्विवेदी, एडमिरल दिनेश त्रिपाठी, DRDO के अध्यक्ष समीर कामत सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष अब चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है, जिससे स्ट्रेट ऑफ़ होरमुज़ के जरिए होने वाले व्यापार मार्ग प्रभावित हुए हैं।तनाव उस समय और बढ़ गया जब 86 वर्षीय ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुलाह खमनेई की 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल द्वारा संयुक्त सैन्य हमलों में हत्या कर दी गई।इसके जवाब में, ईरान ने कई खाड़ी देशों में अमेरिकी और इज़राइली ठिकानों को निशाना बनाया, जिससे समुद्री मार्गों में और बाधा आई और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार तथा वैश्विक आर्थिक स्थिरता प्रभावित हुई।

इसी बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज राज्यसभा में इस संघर्ष के विभिन्न पहलुओं और भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर बयान दे सकते हैं।एक दिन पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसभा में पश्चिम एशिया की स्थिति और उसके भारत पर संभावित प्रभावों की जानकारी दी। उन्होंने स्थिति को “चिंताजनक” बताया। उन्होंने कहा कि, यह संघर्ष न केवल आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अभूतपूर्व चुनौतियां पैदा कर रहा है, बल्कि मानवीय संकट भी उत्पन्न कर रहा है।

प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि, पश्चिम एशिया के युद्धग्रस्त देशों के साथ भारत के व्यापारिक संबंध हैं और देश की कच्चे तेल व गैस की बड़ी जरूरतें इसी क्षेत्र से पूरी होती हैं। वहीं, विपक्षी दलों ने इसे “आत्मप्रशंसा और पक्षपातपूर्ण संवादबाजी की मास्टर क्लास” बताया।प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, पश्चिम एशिया की स्थिति चिंताजनक है। यह संघर्ष तीन सप्ताह से अधिक समय से चल रहा है। इसका वैश्विक अर्थव्यवस्था और लोगों के जीवन पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है, इसलिए दुनिया के सभी देश इस संघर्ष के शीघ्र समाधान की अपील कर रहे हैं।

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