आईबी के रिटायर्ड अधिकारी से 1.5 लाख की साइबर ठगी, परिचित बनकर जालसाजों ने लगाया चूना

आईबी के रिटायर्ड अधिकारी से 1.5 लाख की साइबर ठगी, परिचित बनकर जालसाजों ने लगाया चूना
भोपाल, यशभारत। राजधानी के शाहपुरा इलाके में साइबर ठगों ने ठगी का एक सनसनीखेज मामला अंजाम दिया है। इस बार ठगों के निशाने पर कोई आम नागरिक नहीं, बल्कि इंटेलिजेंस ब्यूरो से सेवानिवृत्त एक अनुभवी अधिकारी रहे। जालसाजों ने सोशल मीडिया पर उनके ही एक परिचित अधिकारी का छद्म रूप धरकर घरेलू सामान बेचने के नाम पर करीब 1.5 लाख रुपये ऐंठ लिए।
फेसबुक पोस्ट से बुना गया जाल
पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, फरियादी रविंद्र डोंगे शाहपुरा क्षेत्र के निवासी हैं और आईबी से रिटायर्ड अधिकारी हैं। ठगों ने उनके फेसबुक फ्रेंड लिस्ट में शामिल एक अन्य अधिकारी के नाम से फर्जी प्रोफाइल का सहारा लिया। आरोपियों ने एक पोस्ट डाली जिसमें दावा किया गया कि संबंधित अधिकारी का ट्रांसफर हो गया है और वे अपना कीमती घरेलू सामान बेहद कम कीमतों पर बेचना चाहते हैं।
भरोसे में आकर गंवाए पैसे
परिचित का नाम और फोटो देखकर रविंद्र डोंगे ने पोस्ट में दिए गए नंबर पर संपर्क किया। फोन पर बात करने वाले व्यक्ति ने खुद को वही अधिकारी बताया और सामान का सौदा 1,51,500 रुपये में तय किया। विश्वास इतना गहरा था कि उन्होंने बिना किसी संदेह के तीन अलग-अलग किश्तों में पूरी राशि बताए गए बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी।
ऐसे हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा
रकम ट्रांसफर करने के बाद जब सामान डिलीवर नहीं हुआ और दिया गया मोबाइल नंबर बंद आने लगा, तब फरियादी को शक हुआ। उन्होंने जब उस वास्तविक अधिकारी से संपर्क किया जिसके नाम पर विज्ञापन दिया गया था, तो उनके होश उड़ गए। संबंधित अधिकारी ने बताया कि उनका कोई ट्रांसफर नहीं हुआ है और न ही उन्होंने कोई सामान बेचने का विज्ञापन दिया है।
धोखाधड़ी का अहसास होते ही पीड़ित ने शाहपुरा थाने में मामला दर्ज कराया। पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और आईटी एक्ट की धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया है। साइबर सेल की मदद से उन बैंक खातों और मोबाइल नंबरों की लोकेशन ट्रेस की जा रही है, जिनका उपयोग इस वारदात में हुआ है।
विशेषज्ञ की सलाह: रहें सावधान
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि ठग अब सोशल इंजीनियरिंग के जरिए लोगों की मनोवैज्ञानिक स्थिति का फायदा उठा रहे हैं। किसी भी परिचित के नाम पर किए गए पोस्ट या मैसेज पर भरोसा करने से पहले सीधे कॉल करके पुष्टि जरूर करें। सेना या पुलिस अधिकारियों की पहचान का इस्तेमाल करना ठगों का नया हथियार बन गया है।







