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विधानसभा में आए अलग- अलग जवाब, प्राचार्य संशय में…उच्च शिक्षा विभाग ने लापरवाही पर कालेजों को जारी किया है पत्र

कटनी, यशभारत। उच्च शिक्षा विभाग ने प्रदेशभर के सरकारी कॉलेजों के प्राचार्यों और क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालकों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। दरअसल यह सख्ती विधानसभा सत्र के दौरान पूछे जाने वाले गंभीर प्रश्नों के उत्तर देने में कॉलेज स्तर पर बरती जा रही भारी लापरवाही को लेकर की गई है। इसे लेकर विभाग ने सभी क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालकों व प्राचार्यों को पत्र लिखा है, जिसमें स्पष्ट रूप से उनकी कार्यशैली को सुधारने के साथ वार्निंग दी गई है कि वे इसे गंभीरता से लें।
बताया जा रहा है कि विधानसभा में विरोधाभास की स्थिति तब निर्मित हो रही है, जब कॉलेजों के प्राचार्य विधानसभा में पूछे जाने वाले एक ही प्रश्न का उत्तर अलग-अलग शाखाओं को ‘पृथक-पृथक’ (अलग-अलग) भेज रहे हैं। इसके चलते उच्च शिक्षा विभाग के साथ सरकार की मुश्किलें भी बढ़ रही हैं।

लापरवाही से बन रही ‘विरोधाभास’ की स्थिति

विभागीय अधिकारियों की मानें तो उच्च शिक्षा विभाग के संज्ञान में आया है कि प्राचार्यों द्वारा विधानसभा के प्रश्नों का गहराई से परीक्षण किए बिना ही उत्तर भेजे जा रहे हैं। जब एक ही सवाल का जवाब विभिन्न शाखाओं को अलग-अलग स्वरूप में प्राप्त होता है, तो इससे विभाग के भीतर ‘विरोधाभास’ की स्थिति निर्मित हो जाती है। इस विसंगति के कारण प्रशासनिक विभाग को विधानसभा में सटीक और समय-सीमा के भीतर जवाब प्रस्तुत करने में अत्यधिक कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।

सिविल सेवा नियमों के तहत होगी कड़ी कार्रवाई

विभाग ने अब इस मामले में अंतिम चेतावनी जारी कर दी है। पत्र के अनुसार, भविष्य में यदि किसी भी प्राचार्य या क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक द्वारा विधानसभा प्रश्नों के उत्तरों में विसंगति या ‘पृथक-पृथक’ जानकारी भेजने की पुनरावृत्ति पाई गई, तो इसे मध्य प्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965′ का सीधा उल्लंघन माना जाएगा। ऐसे दोषी अधिकारियों के विरुद्ध’ मध्य प्रदेश सिविल सेवा वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील 1966′ के तहत कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी।

कई बार निर्देशों के बावजूद ‘उदासीनता’ जारी

पत्र में स्पष्ट किया गया है कि उच्च कार्यालय द्वारा कई बार प्राचार्यों से दूरभाष (फोन) पर चर्चा कर स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए गए। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर कार्य के प्रति घोर ‘उदासीनता’ देखी जा रही है। उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि विधानसभा जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में इस तरह की लापरवाही न केवल अनुशासनहीनता है, बल्कि यह शासन की छवि को भी प्रभावित करती है।

इनका कहना है…

विभाग ने अफसरों और प्राचार्यों को पत्र भेजा है। है। इसमें विधानसभा में पूछे जाने वाले प्रश्नों के जवाब को लेकर विरोधावास न हो, इसे लेकर दिशा-निर्देश दिए हैं। साथ ही सचेत किया है कि पूर्णतः परीक्षण कर ही जवाब प्रस्तुत करें अन्यथा नियमों के तहत कार्यवाही के लिए तैयार रहें।

पीबी चंदेलकर, क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक, जबलपुर संभाग

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