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यूजीसी के ‘जातिगत भेदभाव रोकथाम नियम 2026’ पर सवर्ण समाज का उग्र विरोध,

बैतूल में 10 हजार हस्ताक्षर जुटे – बड़े आंदोलन की चेतावनी

यूजीसी के ‘जातिगत भेदभाव रोकथाम नियम 2026’ पर सवर्ण समाज का उग्र विरोध,

बैतूल में 10 हजार हस्ताक्षर जुटे – बड़े आंदोलन की चेतावनी

बैतूल ,यशभारत।  (यूजीसी) द्वारा 15 जनवरी 2026 से उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए लागू किए गए नए नियमों का सवर्ण समाज द्वारा तीखा विरोध किया जा रहा है। जिला बैतूल में इस मुद्दे को लेकर सवर्ण समाज के लोगों ने नियमों को दोषपूर्ण बताते हुए इनके खिलाफ हस्ताक्षर अभियान शुरू कर दिया है।

सवर्ण समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि यूजीसी द्वारा लागू किए गए ये नियम एकतरफा हैं और इनसे सवर्ण समाज के छात्र-छात्राओं को पहले से ही दोषी मानने जैसी स्थिति बनती है। उनका आरोप है कि यदि किसी छात्र पर झूठा आरोप भी लगाया जाता है, तो उसे अपनी बेगुनाही साबित करने का उचित अवसर नहीं मिल पाएगा, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।

इस विरोध के तहत सवर्ण समाज जिला बैतूल द्वारा स्थानीय स्तर पर व्यापक हस्ताक्षर अभियान चलाया जा रहा है। अब तक करीब 10 हजार प्रपत्र तैयार किए जा चुके हैं और लोगों से लगातार हस्ताक्षर लिए जा रहे हैं। समाज के लोगों ने इन नियमों को “काला कानून 2026” बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है।

सवर्ण समाज के पदाधिकारियों विवेक उपाध्याय, सुरभ ठाकुर (अध्यक्ष) और आकाश शुक्ला ने कहा कि यदि 15 जनवरी 2026 को लागू किए गए नियमों को वापस नहीं लिया गया तो समाज में भारी आक्रोश पैदा हो सकता है और बड़े आंदोलन की स्थिति बन सकती है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आंदोलन के दौरान किसी प्रकार की अप्रिय घटना होती है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

समाज के प्रतिनिधियों ने सरकार और यूजीसी से मांग की है कि सभी वर्गों के छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए नियमों की पुनः समीक्षा की जाए।

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