क्या सचमुच “पंडा की बूटी” जोड़ देती है टूटी हड्डियां? संकटमोचन हनुमान मंदिर बना आस्था और आश्चर्य का केंद्र

कटनी, यशभारत। जिले की रीठी तहसील के छोटे से मुहांस गांव में एक अनोखी चर्चा दूर-दराज तक लोगों को खींच ला रही है। कटनी-दमोह मार्ग से कुछ ही दूरी पर स्थित संकटमोचन हनुमान मंदिर न केवल पूजा-अर्चना का स्थान है, बल्कि “चमत्कारी बूटी” के कारण रहस्य और विश्वास का केंद्र बन चुका है। गांव में कदम रखते ही सबसे पहले सुनाई देती हैं आस्था की कहानियां। कोई कहता है टूटी हड्डी जुड़ गई, तो कोई वर्षों पुराने दर्द से राहत मिलने की बात करता है। मंदिर परिसर में हर मंगलवार और शनिवार को मेला-सा दृश्य होता है, लंबी कतारें, भजन-कीर्तन और आंखों में उम्मीद लिए श्रद्धालु
40 साल पुरानी परंपरा, आज भी अटूट विश्वास
स्थानीय निवासी नरेंद्र विश्वकर्मा बताते हैं कि करीब चार दशक पहले मंदिर की स्थापना हुई थी। शुरुआत में यह एक छोटा-सा स्थान था, लेकिन समय के साथ यह आस्था का बड़ा धाम बन गया। कहानी शुरू होती है पंडा आधारी लाल पटेल से, जो जंगल से लाई गई एक विशेष जड़ी-बूटी श्रद्धालुओं को देते थे। उनके निधन के बाद अब उनके पुत्र सरमन पटेल इस परंपरा को निभा रहे हैं। उनका कहना है
हम कोई इलाज का दावा नहीं करते, सब भगवान की कृपा और श्रद्धा की शक्ति है।
बूटी देने की रहस्यमयी विधि
मंदिर में जड़ी-बूटी यूं ही नहीं दी जाती। इसके पीछे एक विशेष धार्मिक प्रक्रिया है पहले मरीज सीता-राम का भजन जपते हैं फिर हनुमान आरती होती है आरती के बाद ही बूटी दी जाती है बूटी न दिखाई जाती है, न छूने दी जाती है यही रहस्य और आस्था लोगों के मन में कौतूहल और विश्वास दोनों पैदा करता है।
लंगड़ाते आए, सीधे चलकर गए
मंदिर के बाहर बैठे बुजुर्ग बताते हैं कि उन्होंने कई लोगों को बैसाखी के सहारे आते और बिना सहारे लौटते देखा है। जबलपुर से आई सावित्री देवी कहती हैं कि गिरने से पैर में फ्रैक्चर हुआ था, लेकिन यहां की बूटी लगाने के बाद दर्द में काफी राहत मिली।
आस्था, आश्चर्य और विश्वास का संगम
क्या यह चमत्कार है? क्या यह जड़ी-बूटी का असर है? या फिर अटूट विश्वास की शक्ति। इसका जवाब शायद विज्ञान और श्रद्धा के बीच कहीं छिपा है। फिर भी एक बात तय है—मुहांस का यह संकटमोचन मंदिर आज हजारों लोगों के लिए उम्मीद की किरण बना हुआ है, जहां लोग दर्द से राहत के साथ-साथ मन का सुकून भी पाने आते हैं।








