मध्य प्रदेशराज्य

कान्हा से वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व आए बाघ का दर्दनाक अंत: टेरिटरी फाइट में टूटी खोपड़ी, आंखों पर मिले दांतों के निशान

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सागर यश भारत (संभागीय ब्यूरो)/कान्हा नेशनल पार्क से वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (सागर) की आबोहवा में रचने-बसने आए एक बाघ का अंत बेहद दुखद रहा। मुहली रेंज में बाघ का शव मिलने से हड़कंप मच गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट (पीएम) ने इस मौत के पीछे की खौफनाक कहानी बयां की है, जिससे स्पष्ट हो गया है कि बाघ की जान आपसी वर्चस्व की जंग यानी ‘टेरिटरी फाइट’ ने ली है।

संघर्ष की भयावहता: खोपड़ी चकनाचूर, नाखून तक टूटे

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के खुलासे रोंगटे खड़े करने वाले हैं। रिपोर्ट के अनुसार, दो बाघों के बीच हुई इस भीषण भिड़ंत में मृतक बाघ की खोपड़ी की हड्डियां कई जगह से टूटी पाई गई हैं। हमलावर बाघ ने इतना सटीक और शक्तिशाली प्रहार किया कि उसकी आंखों के पास गहरे दांतों के निशान मिले हैं। अपनी जान बचाने के लिए बाघ ने कड़ा संघर्ष किया, जिसका प्रमाण उसका टूटा हुआ नाखून दे रहा है। शरीर पर मिले गहरे जख्मों से साफ है कि यह मुकाबला आर-पार का था।

कॉलर आईडी से मिली लोकेशन, मुहली रेंज में मिला शव

मृतक बाघ की पहचान कान्हा से विस्थापित कर यहां लाए गए बाघ के रूप में हुई है। वन विभाग के अधिकारी रेडियो कॉलर आईडी के जरिए इसकी लोकेशन को ट्रैक कर रहे थे। जब काफी समय तक एक ही स्थान पर स्थिर लोकेशन मिली, तब संदेह होने पर टीम मौके पर पहुंची। मुहली रेंज के घने जंगल में बाघ का क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ।

वर्चस्व की लड़ाई में गया ‘टाइगर’

वन विभाग के विशेषज्ञों का मानना है कि नए क्षेत्र में अपनी सीमाएं तय करने के दौरान पुराने रहवासी बाघ के साथ इसकी भिड़ंत हुई होगी। टाइगर रिजर्व में अपनी सत्ता कायम रखने के लिए बाघ अक्सर एक-दूसरे पर जानलेवा हमला करते हैं। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि बाघ के सभी अंग सुरक्षित हैं, जिससे शिकार की आशंका को सिरे से खारिज कर दिया गया है। फिलहाल रिजर्व प्रबंधन ने क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी है ताकि दूसरे बाघ की स्थिति और सुरक्षा पर नजर रखी जा सके।

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