भोपाल पुलिस के 500 जवानों को दी जा रही सीपीआर और फर्स्ट-एड की ट्रेनिंग

भोपाल पुलिस के 500 जवानों को दी जा रही सीपीआर और फर्स्ट-एड की ट्रेनिंग
भोपाल, यश भारत। राजधानी की सड़कों पर हादसों के दौरान अब पुलिसकर्मी केवल पंचनामा बनाने या भीड़ हटाने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि वे घायल की जान बचाने वाले फर्स्ट रिस्पॉन्डर की भूमिका में भी नजर आएंगे। भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार और एडिशनल सीपी अवधेश गोस्वामी के मार्गदर्शन में जोन-04 के पुलिसकर्मियों के लिए एक विशेष जीवन रक्षक प्रशिक्षण शिविर शुरू किया गया है।
महीने भर चलेगा अभियान
डीसीपी (जोन-04) मयूर खंडेलवाल के निर्देशन में भैंसाखेड़ी स्थित चिरायु अस्पताल एवं मेडिकल कॉलेज में यह ट्रेनिंग आयोजित की जा रही है। एक माह तक चलने वाले इस अभियान के तहत जोन-04 के विभिन्न थानों में तैनात लगभग 500 पुलिस अधिकारी और कर्मचारियों को एक्सपर्ट डॉक्टर्स द्वारा ट्रेनिंग दी जाएगी।
डमी पर सीख रहे बारीकियां
प्रशिक्षण के दौरान पुलिसकर्मियों को डमी मॉडल के जरिए सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) का व्यावहारिक अभ्यास कराया जा रहा है। विशेषज्ञों ने बताया कि अक्सर सड़क दुर्घटनाओं या अचानक हार्ट अटैक की स्थिति में शुरुआती कुछ मिनट (गोल्डन ऑवर) बेहद कीमती होते हैं। यदि पुलिसकर्मी सही तरीके से सीपीआर देना जानते हैं, तो एंबुलेंस आने से पहले ही मरीज की जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
वरिष्ठ अधिकारी कर रहे मॉनिटरिंग
प्रशिक्षण की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इसकी रोजाना मॉनिटरिंग वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की जा रही है। ट्रेनिंग में न केवल सीपीआर, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली ब्लीडिंग को रोकने और प्राथमिक उपचार के अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं पर भी विस्तार से जानकारी दी जा रही है।
इनका कहना है:
इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य पुलिस बल को आपात स्थितियों के लिए अधिक सक्षम और संवेदनशील बनाना है। ड्यूटी के दौरान किसी भी संकट की घड़ी में हमारे जवान तुरंत और प्रभावी सहायता प्रदान कर सकें, यही हमारा लक्ष्य है।
जोन-04 डीसीपी – मयूर खण्डेलवाल







