मध्य प्रदेशराज्य

सोते में ही छीन लीं खुशियां: जिस छत के नीचे सो रही थी सृष्टि, वही बन गई काल : 6 साल की बच्ची की मौत

नगर पालिका की बड़ी लापरवाही— जर्जर मकान गिराने का नोटिस देकर भूली नपा 

सागर यश भारत (संभागीय ब्यूरो)/ मकरोनिया के दीनदयाल नगर में एक रूह कंपा देने वाला हादसा सामने आया है। यहाँ मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड के एक जर्जर पुराने मकान की छत का भारी-भरकम प्लास्टर गिरने से 6 वर्षीय मासूम बच्ची सृष्टि की दर्दनाक मौत हो गई। इस पूरे मामले में मकरोनिया नगर पालिका की घोर प्रशासनिक उदासीनता और पेशे से इंजीनियर मकान मालिक की जानलेवा लापरवाही उजागर हुई है, जिसने दो बार नपा का नोटिस मिलने के बावजूद लालच में आकर इस खतरनाक मकान को एक गरीब परिवार को किराए पर दे रखा था।

 भरभराकर गिरा छत का निचला हिस्सा

दीनदयाल नगर में करीब 30 साल पहले हाउसिंग बोर्ड द्वारा बनाए गए इस मकान को कालीचरण वर्मा (जो कि पथरिया जनपद में इंजीनियर हैं) ने खरीदा था। उन्होंने करीब दो साल पहले यह जर्जर मकान ऑर्डर पर खाना बनाने का काम करने वाले रामभरोसे रैकवार के परिवार को किराए पर दे दिया था। शनिवार सुबह रामभरोसे की 6 वर्षीय नातिन सृष्टि कमरे में सो रही थी, तभी अचानक छत का सीमेंट-कंक्रीट का भारी प्लास्टर उसके ऊपर भरभराकर गिर गया। गंभीर रूप से घायल बच्ची को प्राथमिक उपचार के बाद तत्काल बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (BMC) रेफर किया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

 

 औपचारिकता निभाती रही नगर पालिका

वार्ड पार्षद राजा रिछारिया और मकरोनिया नपा सीएमओ पवन शर्मा ने यश भारत के संभागीय ब्यूरो को बताया कि मकान की हालत अत्यंत जर्जर होने के कारण नगर पालिका द्वारा मकान मालिक कालीचरण वर्मा को परिसर खाली करने और इसे गिराने के लिए दो बार नोटिस जारी किए गए थे। खुद इंजीनियर होने के बावजूद मकान मालिक ने इन नोटिसों को हवा में उड़ा दिया और आर्थिक रूप से कमजोर रैकवार परिवार से लगातार किराया वसूलता रहा। वहीं, नगर पालिका प्रशासन भी सिर्फ कागजी नोटिस थमाकर सो गया और मकान को जमींदोज करने की जहमत नहीं उठाई, जिसकी कीमत एक मासूम को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।

 10 लाख मुआवजे और जिम्मेदारी तय करने की मांग

इस दर्दनाक हृदयविदारक घटना पर प्रदेश कांग्रेस महासचिव रेखा चौधरी ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए मकरोनिया नगर पालिका और हाउसिंग बोर्ड को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जब नगर पालिका प्रशासन को यह अच्छी तरह पता था कि मकान अत्यंत जर्जर है और उसमें एक बेहद गरीब परिवार निवास कर रहा है, तो उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत तत्काल मरम्मत की राशि या नया मकान आवंटित किया जाना चाहिए था। यदि प्रशासन समय रहते संवेदनशीलता दिखाता तो आज उस मासूम बेटी का जीवन बचाया जा सकता था। रेखा चौधरी ने इस पूरे घटनाक्रम में नगर पालिका व हाउसिंग बोर्ड के दोषी अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर सख्त कार्रवाई करने की बात कही है, साथ ही पीड़ित गरीब परिवार को शासन की ओर से 10 लाख रुपए का मुआवजा देने की पुरजोर मांग की है।

 

घटना की सूचना मिलते ही नरयावली विधायक प्रदीप लारिया ने भी तत्काल मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और पीड़ित परिवार से मुलाकात कर हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया। मकरोनिया थाना प्रभारी नितिन पाल ने यश भारत को बताया कि फिलहाल मर्ग कायम कर मामले को जांच में लिया गया है। मकान मालिक की इस आपराधिक लापरवाही के खिलाफ तथ्यों के आधार पर जल्द ही केस दर्ज किया जाएगा। बताया जा रहा है कि सागर शहर और मकरोनिया क्षेत्र में ऐसे करीब 200 जर्जर मकान हैं, जहाँ प्रशासन सिर्फ नोटिस देकर औपचारिकताओं में जुटा हुआ है।

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