सियासत : मध्यप्रदेश में समय से पहले हो सकते हैं पंचायत चुनाव, मोहन यादव सरकार की बड़ी तैयारी, नगरीय निकाय चुनाव भी हो सकते समय पर

भोपाल, यशभारत। मध्यप्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों को लेकर एक बड़ी राजनीतिक हलचल शुरू हो गई है। राज्य की मोहन यादव सरकार इस बार कार्यकाल पूरा होने से पहले ही पंचायत चुनाव कराने की तैयारी में जुट गई है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल के संकेतों के मुताबिक, इस बार चुनाव तय समय से कुछ महीने पहले यानी अप्रैल-मई 2027 में कराए जा सकते हैं। खबर यह भी है कि सरकार नगरीय निकाय चुनाव भी समय पर कराने की तैयारी कर रही है। दिल्ली से भी एमपी को ऐसे ही संकेत भेज दिए गए हैं।
आम तौर पर मध्य प्रदेश की पंचायतों का मौजूदा कार्यकाल जुलाई-अगस्त तक पूरा होना था, लेकिन सरकार इसके पहले ही पूरी चुनावी प्रक्रिया संपन्न कराना चाहती है। इसके पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण माने जा रहे हैं। सरकार मानसून (बारिश का सीजन) शुरू होने से पहले ही चुनाव की प्रक्रिया को पूरी तरह से समाप्त कर लेना चाहती है ताकि प्रशासनिक कार्यों में कोई बाधा न आए। पंचायतों के नए गठन और कार्यभार हस्तांतरण में पर्याप्त समय मिल सके, इसलिए प्रक्रिया को थोड़ा पहले शुरू किया जा रहा है। इसके लिए पंचायत विभाग ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं और मतदाता सूची 1 जनवरी 2027 की स्थिति के आधार पर तैयार करने की योजना है। राज्य में त्रिस्तरीय पंचायत राज व्यवस्था के तहत चुनाव होते हैं, जिसमें जिला पंचायत 52 (हाल ही में 3 नए जिले बनने के बाद यह संख्या बढ़कर 55 तक हो सकती है)। जनपद पंचायत 313 और ग्राम पंचायत 23,006 है।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की प्रक्रिया
मध्य प्रदेश में पंचायत चुनाव तीन अलग-अलग स्तरों पर आयोजित किए जाते हैं, इसमें ग्रामीण स्तर पर सरपंच और पंच पदों के लिए सीधे चुनाव होते हैं। इसमें जनपद सदस्य चुने जाते हैं, जो बाद में अपने बीच से जनपद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव करते हैं। इसमें जिला पंचायत सदस्यों का चुनाव होता है, जो मिलकर जिला पंचायत अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चयन करते हैं।
पंचायत राज नियमों में बड़े बदलाव के संकेत
इस बार के चुनावों की सबसे खास बात यह है कि मोहन यादव सरकार पंचायत राज नियमों में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रही है। इसके लिए जल्द ही आधिकारिक नोटिफिकेशन भी जारी किया जा सकता है।
संशोधित नियमों के तहत पंचायत समितियों को और अधिक अधिकार सौंपे जाने की योजना है। हालांकि ग्राम सभा की अनिवार्यता पहले की तरह ही बनी रहेगी, लेकिन समितियों को नगर निकायों (नगर निगम/नगर पालिका) की तर्ज पर स्थानीय स्तर पर टैक्स लगाने और पंचायत के स्वतंत्र संचालन से जुड़े कुछ विशेष अधिकार दिए जा सकते हैं, जिससे ग्रामीण स्वशासन को और अधिक मजबूत किया जा सके। फिलहाल सरकार की तरफ से तारीखों का आधिकारिक ऐलान होना बाकी है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर बैठकों और तैयारियों का दौर शुरू हो चुका है।







