शहर और ग्रामीण कांग्रेस अध्यक्षों के लिए आएगा चौंकाने वाला नाम, कटनी के संगठन पर दिल्ली में मंथन, 15 अगस्त के पहले घोषणा

कटनी, यशभारत। शहर और ग्रामीण कांग्रेस संगठन में चौंकाने वाला नाम सामने आ सकता है। सूत्रों से खबर मिली है कि दिल्ली में पर्यवेक्षकों के साथ संगठन प्रभारियों की बैठक में एक एक नाम पर चर्चा होने के साथ पार्टी ने अपने स्तर पर सर्वे के माध्यम से जो पड़ताल की है, उससे मिलान कराया जा रहा है। प्रदेश स्तर पर नियुक्त पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष से चर्चा के बाद केंद्रीय पर्यवेक्षकों के साथ दिल्ली में मंथन हो रहा है। संगठन प्रभारी केसी वेणुगोपाल और प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी हरीश चौधरी इस पर माथापच्ची कर रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि 15 अगस्त से पहले कटनी को नए अध्यक्ष मिल जाएंगे।
संगठन सृजन कार्यक्रम के अंतर्गत दिल्ली के इंदिरा भवन में इन दिनों जिला कांग्रेस अध्यक्ष चुनने की कवायद चल रही है। 6 दिन कटनी के विभिन्न ब्लाकों बैठकें लेकर और रायशुमारी के आधार पर पर्यवेक्षकों ने जो रिपोर्ट तैयार की, उस पर पहले भोपाल में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के साथ चर्चा हुई है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की भी राय महत्वपूर्ण बन गई है। जिला कांग्रेस शहर और ग्रामीण कांग्रेस संगठनों के लिए आधा सैकड़ा से ज्यादा नेताओं ने दावा किया, लेकिन फीडबैक और वन टू वन रायशुमारी के आधार पर पर्यवेक्षकों ने दोनों ही संगठनों के लिए 6-6 नामों के पैनल तैयार किए हैं। इन पैनलों को लेकर पर्यवेक्षक भोपाल रवाना हुए जहां प्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी, पीसीसी चीफ जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के साथ बैठकें हुई। सूत्र बताते हैं कि शहर और ग्रामीण के लिए सामने आए कुल नामों में पहला छन्ना तो भोपाल में ही लग गया। इसके बाद लिस्ट शॉर्टआउट कर केंद्रीय पर्यवेक्षक राघवेंद्र सिंह के हाथों दिल्ली भेज दी गई। सूत्र बता रहे हैं कि कटनी जिले के मैटर पर दिल्ली में पहले दौर का डिस्कशन हो चुका है। सबकुछ ठीक रहा तो 15 अगस्त तक कटनी के दोनों अध्यक्ष के नाम प्रदेश के कई जिलों की सूची के साथ सामने आ जाएंगे।
सक्रियता सबसे बड़ा मापदंड
जिले में अध्यक्ष चुनने के लिए चयनकर्ताओं के सामने सक्रियता सबसे बड़ा मापदंड है। पार्टी ने इसके लिए जो प्रोफार्मा तैयार किया है, उसके हिसाब से अध्यक्ष खोजना आसान नहीं लग रहा। कटनी का मसला वैसे भी प्रदेश के अन्य जिलों से अलग है। यहां सांसद, चारों विधानसभा क्षेत्रों के विधायक, महापौर, जिला पंचायत अध्यक्ष से लेकर जनपदों में भी भाजपा का वर्चस्व है, ऐसे में कटनी जिले में कांग्रेस के पास खोने को कुछ नहीं है। अब तो पार्टी को अपनी कोशिशों से पाना ही है। लोकसभा चुनाव के समय शहर कांग्रेस अध्यक्ष के भाजपा में शामिल हो जाने के बाद से यह पद रिक्त है। पार्टी के चयनकर्ताओं को दोनों ही संगठनों के लिए ऐसे नाम चाहिए, जो रेगुलर वर्किंग में हों। घरों से बैठकर पार्टी चलाने वालों को राहुल गांधी की कांग्रेस में कोई जगह नहीं। राहुल ने निर्देश भी ऐसे ही दे रखे हैं कि जो मैदान में हर वक्त सक्रिय रहकर संगठन को मजबूत करते हुए भाजपा से दो दो हाथ को तैयार हो, ऐसे लोगों को जिम्मेदारी सौंपना है। कटनी में दोनों संगठनों के लिए आधा सैकड़ा से ज्यादा नाम आए तो जरूर लेकिन पार्टी ने इन नामों पर अपने सर्वे के हिसाब से पड़ताल की है। सूत्रों का दावा है कि परंपरागत नामों को इस बार किनारे लगा दिया जाएगा और दोनों ही संगठनों में चौंकाने वाले नाम की ताजपोशी कर दी जाएगी।
वोटरलिस्ट पर राहुल का ध्यान
महाराष्ट्र और बिहार में जिस तरह वोटरलिस्ट को लेकर चीजें सामने आई हैं, उसके बाद राहुल गांधी ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को साफ निर्देश दे दिए हैं कि मतदाता सूची को अपडेट करने के अभियान में सक्रियता से जुटें। वोटरलिस्ट में बारीक नजर रखे, क्योंकि पार्टी इस मोर्चे पर हारती है। पता चला है कि पार्टी विधानसभा स्तर पर कमेटियां बना रही है, जो अपने अपने इलाके की वोटर लिस्ट पर काम करेंगे।







