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मातृशक्ति वंदन अधिनियम पर विशेष आलेख-महिला भागीदारी के बिना 5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था का सपना अधूरा,कांग्रेस और विपक्ष ने निहित स्वार्थों में लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर किया-सीए अखिलेश जैन

जबलपुर ..भारत लोकतंत्र की जननी है, भारत को मदर ऑफ डिमोक्रेसी कहा जाता है और भारत की आजादी के स्वर्णिम काल में भारत एक अति महत्वपूर्ण, अत्यावश्यक व दूरदृष्टि से भरा निर्णय होते -होते रह गया, यह निर्णय केवल राजनीतिक निर्णय भर नहीं था। मातृशक्ति वंदन अधिनियम को लागू करना केवल राजनैतिक निर्णय कहना निर्णय के साथ नाइंसाफी है। इस निर्णय के दूरगामी परिणामों का विश्लेषण करना अत्यावश्यक है। 

महिलाएँ पंचायत से लेकर स्थानीय निकायों का नेतृत्व काफी समय से कर रही हैं। अगर महिलाओं को संसद व विधानसभाओं में आरक्षण का लाभ मिल जाता है, तो तमाम राजनैतिक दलों को महिलाओं की उन्नति का नारा देकर काम निकालने की जगह वास्तव में महिला प्रतिनिधियों को संसद व विधानसभाओं के लिए अवसर प्रदान करना पड़ता और धीरे -धीरे महिला नेतृत्व समय के साथ परिपक्वता को प्राप्त कर लेता। 

जिस देश को लोकतंत्र की जननी कहा जाता है, उसी देश में 50 प्रतिशत आबादी को नीति – निर्णय में भागीदारी से दूर रखने का बहुत दुर्भाग्यपूर्ण प्रयास हुआ है, लोकतंत्र की दुहाई देने वालों ने लोकतंत्र की जड़ों को सींचने की जगह, लोकतंत्र की जड़ों पर मठठा डाल दिया, वो भी केवत निहित स्वार्थों के चलते। 

भारत की आर्थिक, राजनीतिक व सामाजिक प्रगति का आधार भारत का लोकतंत्र है। लोकतंत्र व संविधान ने भारत के प्रत्येक नागरिक को समान नागरिक अधिकार प्रदान किये हैं। देश आज उस मोड़ पर आकर खड़ा है जहाँ से विकसित भारत@2047, 5 ट्रिलियन डॉलर कि अर्थव्यवस्था का सपना संजोये हुआ है। आजादी के 78 वर्षों के बाद भी महिलाओं का योगदान विनिर्माण क्षेत्र में 27 प्रतिशत तक ही पहुँच पाया है। वो भी मोदी सरकार के तमाम प्रयासों के बाद, अगर भारत को विकसित भारत@ 2047 तथा 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य निर्धारित समय सीमा में हासिल करना है तो देश की 50 प्रतिशत आबादी को घरों से बाहर निकाल कर देश निर्माण में भागीदार बनाना ही पड़ेगा। 

महिलाओं की नीति – निर्णय में हिस्सेदारी निश्चित रूप से सरकार की नीति – निर्णयों को प्रभावित करती, महिलाओं के पक्ष को मजबूती मिलती, 50 प्रतिशत आबादी का योगदान सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ता, महिला सुरक्षा और मजबूत होती, महिलाओं को तमाम नए अवसर मिलते, विशिष्ट परिवारों की महिलाओं का वर्चस्व टूटता, सामान्य परिवारों और छोटी – छोटी जगह की महिलाओं की आर्थिक, सामाजिक व राजनैतिक निर्णयों में भागादारी होती, वास्तव में सम्पूर्ण देश की महिलाओं का वास्तविक प्रतिनिधित्व होता, निश्चित रूप से प्रगति का पहिया अपने आप तीव्र गति से दौड़ता। नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू करने में आने वाली रुकावटें जब तक जारी रहेंगी, नीति – निर्णयों में महिलाओं की भागीदारी का पक्ष जब तक जनसामान्य की महिलाओं तक पहुँच कर मजबूत व स्थाई नहीं होता, तब तक विकसित भारत@ 2047 व 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य भारत में कठिनाईयों से भरा रहेगा, महिलाओं की नीति – निर्णयों में भागीदारी के बिना अगर एक बार विकसित भारत@ 2047 व 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य किसी तरह हासिल भी कर लिया जाता है तो उसके स्थायित्व पर शंका सदैव बनी रहेगी। 

लेखक- भाजपा मध्‍यप्रदेश के प्रदेश कोषाध्यक्ष हैं

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