महाघोटाला: वेयरहाउस में गेहूं की जगह मिलीं मिट्टी भरी 600 बोरियां, DSO हटाई गईं, सहायक आपूर्ति अधिकारी सस्पेंड

सागर यश भारत (संभागीय ब्यूरो)/ जैसीनगर ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले ‘श्रीदेव प्रभाकर वेयरहाउस’ में समर्थन मूल्य पर खरीदे गए गेहूं की बोरियों में बड़े पैमाने पर मिट्टी और कंकड़ मिलाए जाने के सनसनीखेज मामले में शासन और जिला प्रशासन ने मिलकर अब तक की सबसे बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की है। मध्य प्रदेश के खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के कड़े रुख और सख्त निर्देशों के बाद सागर कलेक्टर प्रतिमा पाल ने इस पूरे मामले में त्वरित और ऐतिहासिक प्रशासनिक सर्जरी की है। सरकार ने सागर की जिला आपूर्ति अधिकारी (DSO) को तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया है, वहीं लापरवाही बरतने के आरोप में सहायक आपूर्ति अधिकारी को सस्पेंड कर दिया गया है।
यह पूरा मामला समर्थन मूल्य पर उपार्जित किए गए गेहूं के परिवहन और भंडारण से जुड़ा हुआ है। जब वेयरहाउस पहुंचे स्टॉक की औचक जांच की गई, तो वहां मौजूद अधिकारी और कर्मचारी दंग रह गए। सरकारी खजाने को चूना लगाने के लिए बोरियों में गेहूं के नाम पर सिर्फ मिट्टी, धूल और कंकड़ भरे हुए थे। गरीबों के हक के अनाज में इस कदर मिलावटखोरी का यह मामला जैसे ही सामने आया, खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने इसे अत्यंत गंभीरता से लिया। उन्होंने दो टूक शब्दों में निर्देश दिए कि सरकार की छवि और जनता के राशन से खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा, जिसके बाद कलेक्टर प्रतिमा पाल ने खुद पूरी जांच की कमान संभाली।
प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में घोर लापरवाही और सुपरविजन की भारी कमी पाए जाने पर कलेक्टर प्रतिमा पाल के प्रतिवेदन के आधार पर शासन स्तर से यह बड़ी कार्रवाई की गई है। इसके तहत जहां केंद्र की मॉनिटरिंग में पूरी तरह नाकाम रहने वाली जिला आपूर्ति अधिकारी (DSO) को तत्काल प्रभाव से उनके पद से मुक्त कर दिया गया है, वहीं संभागायुक्त के आदेश और कलेक्टर की रिपोर्ट पर सहायक आपूर्ति अधिकारी को सस्पेंड (निलंबित) कर दिया गया है। इसके साथ ही वेयरहाउसिंग लॉजिस्टिक्स कॉरपोरेशन के संबंधित नोडल अधिकारी की भूमिका को संदिग्ध मानते हुए उन्हें कारण बताओ (शो-कॉज) नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है।
इस महाघोटाले की जड़ें उपार्जन केंद्र के भीतर तक फैली हुई थीं और इस फर्जीवाड़े व मिलावटखोरी के खेल में शामिल उपार्जन केंद्र के स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष, केंद्र प्रभारी और परिवहन से जुड़े मुख्य आरोपियों समेत तीन लोगों के खिलाफ पुलिस ने पहले ही विभिन्न गंभीर धाराओं और धोखाधड़ी के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली है। कलेक्टर प्रतिमा पाल ने स्पष्ट कर दिया है कि खाद्य मंत्री के निर्देशों का अक्षरशः पालन करते हुए इस पूरे सिंडिकेट को ध्वस्त किया जाएगा। फिलहाल पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीमें इस घोटाले में शामिल अन्य बिचौलियों, ठेकेदारों और विभागीय सांठगांठ की गहराई से जांच कर रही हैं, जिससे आने वाले दिनों में कुछ और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।







