सिवनी यश भारत:-राजस्थान भेजने चिंहित पीएन 224 बाधिन को हाथियों से घेरकर शुक्रवार को पेंच प्रबंधन ने बेहोश (ट्रेंकुलाइज) कर सेटेलाइट रेडिया कालर लगाकर वापस जंगल में छोड़ दिया था। लेकिन 24 घंटे भी बाघिन के गले में रेडियो कालर निकलकर जंगल में गिर गया। शनिवार को पेंच टाइगर रिजर्व के मैदानी अमले को निगरानी के दौरान जंगल की झाड़ियों में बाघिन के गले से निकाला रेडियो कालर मिला है। हालाकि कुछ दूरी पर स्वच्छंद रूप से बाघिन विचरण करती देखी गई है। ऐसे में बाघिन के गले में पुनः रेडियो कालर लगाने का प्रयास आगामी दिनों में पेंच प्रबंधन प्रारंभ करेगा।
डिप्टी डायरेक्टर रजनीश सिंह ने बताया कि 5 दिसंबर को तीन वर्ष आयु की पीएन 224 बाघिन को पेंच प्रबंधन ने सेटेलाइट कालर पहनाया था, जिससे लगातार उसका लोकेशन ट्रैक किया जा रहा था। शनिवार को कालर संभवतः किसी झाड़ी में फंसने से निकलकर रूखड़ बफर जंगल में गिर गया, जो मैदानी अमले को मिला है। कालर से कुछ दूरी पर स्वस्थ अवस्था में बाघिन को विचरण करते हुए देखा गया है। इस बाघिन को राजस्थान भेजने चयनित किया गया है। आगामी दिवसों में पुनः बाघिन को कालर करने का प्रयास किया जाएगा।
गौरतलब है कि अभियान में आठवें दिन हाथियों से घेरकर डाट लगाकर बाघिन को बेहोश (ट्रॅकुलाइज) कर सेटेलाइट रेडिया कालर लगाया था, ताकि उसकी गतिविधियों, व्यवहार, शिकार के तरीके पर लगातार नजर रखी जा सके। विस्तृत विश्लेषण के बाद बाघिन को राजस्थान के विषधारी टाइगर रिजर्व स्थानांतरित भेजने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाना हैं। राजस्थान के बाघों का जीन पुल सुधारने देश का पहला इंटर स्टेट बाघ ट्रांसलोकेशन पेंच टाइगर रिजर्व से किया जाना हैं। 28 नवंबर से बाघिन को पकड़ने का अभियान चल रहा था।
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