कटनी

दशहरे में भीड़ की वापसी, गरिमा की विदाई, डीजे के कंपन ने बिगाड़ा व्यवस्थाओं का स्वास्थ्य, रात साढ़े 10 के बाद भगवान भरोसे रहा चल समारोह, भीड़ में सिपाही करते रहे हुज्जत, सुबह के अंतिम पहर तक घाटों पर चलता रहा दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन

कटनी, यशभारत। शहर में इस बार दशहरे का जलसा पिछले कुछ सालों से हटकर था। अरसे बाद दशहरे में भीड़ की वापसी तो हुई लेकिन डीजे के कानफोडू शोर और भौंड़े नृत्यों में चल समारोह की गरिमा की विदाई हो गई। डीजे के कंपन ने व्यवस्थाओं का स्वास्थ तो बिगाड़ा ही, बची खुची कसर पुलिस की लापरवाही ने पूरी कर दी। चल समारोह दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर से शाम साढ़े 7 बजे शुरू हुआ लेकिन रात 10 बजते ही पुलिस और प्रशासन ने दशहरा भगवान भरोसे छोड़ दिया। कटनी दशहरा उत्सव समिति ने अपनी तरफ से जलसे को गरिमा प्रदान करने की पूरी कोशिश की लेकिन समिति को जैसा साथ प्रशासन के नुमाइंदों का मिलना चाहिए था, वैसा नहीं मिला। विद्युत मंडल की टीम ने सडक़ों पर फैला तारों का मकडज़ाल पहले ठीक कर लिया होता तो 12 फुट से ज्यादा ऊंचाई वाली दुर्गा प्रतिमाएं तारों में नहीं फंसती। प्रशासनिक नियंत्रण के अभाव में जुलूस में बेवजह लेटलतीफी होती रही। प्रतिमाओं के बीच अनावश्यक अंतराल भी बढ़ता रहा और प्रतिमा के साथ शामिल युवाओं के समूह अपनी मर्जी के मालिक बने रहे। मुख्य चल समारोह में शामिल करीब तीन दर्जन प्रतिमाओं को विसर्जन घाट पहुंचने में रात का तीसरा पहर बीत गया। रावण महाराज का पुतला भी लगभग साढ़े 11 बजे आजाद चौक पहुंच सका। पूरे जलसे का सबसे मायूस कर देने वाला पहलू जुलूस में हनुमानजी की प्रतिमा की गैरमौजूदगी रही। हर बरस रावण महाराज और हनुमान जी ही कटनी के ऐतिहासिक दशहरे की शान होते थे। इस बार घंटाघर रामलीला कमेटी ने न तो रामलीला का मंचन कराया और न ही हनुमान जी की प्रतिमा निकाली। इससे बड़ी संख्या में लोग निराश हुए। एक खास बात यह भी है कि कटनी का दशहरा अब सीधे तौर पर 2 दिन के जलसे में बदल गया। पिछले वर्षों तक चौपाटी में रावण के दहन चल समारोह के दिन ही होता था लेकिन इस बार दूसरे दिन यानि आज 21 अक्टूबर को होगा। आज उपनगरीय क्षेत्र माधवनगर में भी चल समारोह आयोजित होगा। इसके पहले विसर्जन घाटों पर सारा दिन जय दुर्गे-जय काली के जयघोष के साथ जगत जननी को विदाई दी जाती रही। आज दूसरे दिन भी बड़ी संख्या में प्रतिमाएं जुलूस की शक्ल में विसर्जन घाट ले जाई जाएंगी। 

शारदेय नवरात्र के समापन और विजयादशमी के पावन अवसर पर मंगलवार को शहर में चल दशहरा समारोह उत्साह और धार्मिक उल्लास के साथ आयोजित किया गया। गोलबाजार रामलीला कमेटी के नेतृत्व में निकले भव्य चल समारोह में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और शहरवासी शामिल हुए। मां दुर्गा की प्रतिमाओं के जुलूस से शहर की सडक़ें भक्तिमय नजर आईं। चल समारोह की शुरुआत गोलबाजार रामलीला कमेटी के रावण महाराज की अगुवाई में हुई। उनके पीछे मां दुर्गा की प्रतिमाओं का भव्य जुलूस निकला। जगह-जगह नागरिकों ने जुलूस का स्वागत किया। पूरे मार्ग में धार्मिक उत्साह और विजयादशमी के उलास माहौल दिखाई दिया।
चल समारोह में शामिल नहीं हुई हनुमान जी की प्रतिमा
दशहरा चल समारोह में इस बार हनुमान जी की प्रतिमा शामिल नहीं हुई। हनुमान जी की प्रतिमा की गैरमौजूदगी में रावण महाराज का पुतला जुलूस में सबसे आगे चल रहा था। दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर के सामने शाम साढ़े 7 बजे झंडाबाजार की भव्य प्रतिमा की आरती के बाद बाद दशहरा चल समारोह शुरू हुआ। दशहरे में सबसे आगे गोलबाजार रामलीला के रावण महाराज चल रहे हैं। इसके बाद रामलीला के भगवान श्री राम, लक्ष्मण और हनुमान एक रथ पर विराजमान हैं। एक वाहन में दशहरे के जनक स्व रामदास अग्रवाल लल्लू भैया का तेलचित्र भी लगाया गया था।
जुलूस में प्रतिमाओं के प्रथम क्रम को लेकर विवाद
जुलूस में प्रथम क्रम को लेकर कुछ विवाद भी सामने आया। गर्ग चौराहा की प्रतिमा दोपहर 1 बजे पहुंच गई, लिहाजा समिति के लोग पहले क्रम की मांग करने लगे, जबकि झंडाबाजार की प्रतिमा प्रतिवर्ष पहले क्रम पर शामिल होती रही है। विवाद को टालने के लिए कटनी दशहरा महोत्सव समिति ने बातचीत करते हुए हल निकाल लिया।
इनकी रही मौजूदगी
दशहरा चल समारोह में विधायक संदीप जायसवाल, शहर कांग्रेस अध्यक्ष अमित शुक्ला, कांग्रेस नेता प्रियदर्शन गौर, भाजपा जिलाध्यक्ष दीपक सोनी, भरत अग्रवाल, रवि खरे, निरंजन पंजवानी, मनीष गेई, विक्रम खम्परिया, मनोज निगम, कन्हैया तिवारी, रमेश सोनी, मंजूषा गौतम, जिला पंचायत उपाध्यक्ष अशोक विश्कर्मा, रामरतन पायल, पीताम्बर टोपनानी, रामचंद्र तिवारी, चमनलाल आनंद, भरत अग्रवाल, राजेश पाठक, शरद अग्रवाल, डॉ. सुब्बाराव, महेश रोचलानी, आशीष गुप्ता, पारस जैन, सुरेश पंजवानी, महेश शुक्ला, नवलेश मालिक, पवन यादव, ललित सोनी, रौनक खंडेलवाल, यशभारत के संपादक आशीष सोनी, पत्रकार आशीष रैकवार, प्रदीप द्विवेदी, सत्यनारायण अग्रहरी, रणवीर कर्ण, अंतिम गुप्ता, प्रशांत जायसवाल, गिरधारी शर्मा, संतु परोहा, संजय गिरी, मनीष दुबे, सुरेश सोनी, संजय खूबचंदानी, अंबरीश वर्मा, अमन गुप्ता, यज्ञदत्त मिश्रा, प्रदीप उपाध्याय, सरमन तिवारी, आशीष तिवारी सहित बड़ी संख्या में गणमान्य जन शामिल है।
डीजे की तेज आवाज को लेकर उठे सवाल
भव्य आयोजन के बीच तेज आवाज में बज रहे डीजे को लेकर भी सवाल खड़े हुए। शहर के मुख्य मार्गों से निकले चल समारोह में कई स्थानों पर भारी-भरकम साउंड सिस्टम की आवाज सुनाई दी। इसे लेकर नागरिकों के बीच प्रशासन के हालिया ध्वनि नियंत्रण संबंधी निर्देशों के पालन को लेकर चर्चा होती रही। गौरतलब है कि प्रशासन द्वारा कुछ दिन पहले जारी की गई प्रेस विज्ञप्ति में ध्वनि प्रदूषण और निर्धारित मानकों के पालन को लेकर सख्ती की बात कही गई थी। ऐसे में समारोह के दौरान तेज आवाज वाले डीजे नजर आने पर सवाल उठना स्वाभाविक है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया था कि दुर्गा प्रतिमा विसर्जन और पंडालों में डीजे पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। साउंड बॉक्स पर केवल भक्ति एवं धार्मिक गीत बजाने की अनुमति होगी। प्रतिमा विसर्जन के लिए निर्धारित जलकुंडों का उपयोग करना होगा तथा नदियों, तालाबों और नालों में सीधे विसर्जन पर रोक रहेगी। इसके बावजूद इन निर्देशों का खुलेआम उल्लंघन हुआ, जिससे प्रशासन की निगरानी और अधिकारियों की जिम्मेदारी पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
चौराहों पर तैनात रहा पुलिस बल
पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा के निर्देशन में दुर्गा पूजा एवं दशहरा पर्व को शांतिपूर्ण, सुरक्षित एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न कराने चौराहों पर पुलिस बल तैनात रहा। दुर्गा पूजा पंडालों, प्रमुख चौक-चौराहों, संवेदनशील क्षेत्रों एवं विसर्जन मार्गों पर निगरानी रखी गई। भीड़ नियंत्रण एवं यातायात व्यवस्था सुचारू बनाए रखने अधिकारी व्यवस्थाओं की मॉनीटरिंग करते रहे। विसर्जन स्थलों पर बैरिकेडिंग, प्रकाश व्यवस्था, गोताखोरों की तैनाती रही।
आज भी होगा दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन
मुख्य दशहरा चल समारोह संपन्न होने के बाद जिन स्थानों पर अभी भी प्रतिमाएं स्थापित हैं, उनका विर्सजन आज होगा। अधिकांश दुर्गा प्रतिमाओं का विर्सजन रात्रि में किया जाएगा। चल समारोह से अलग हटकर दुर्गा प्रतिमाओं का विर्सजन करने की परंपरा कुछ वर्षों पूर्व शुरू हुई थी। इस वर्ष दशहरा महोत्सव समिति ने दुर्गा प्रतिमाओं को जुलूस में शामिल कराने का प्रयास किया था, जिससे काफी संख्या में समितियां जुलूस में शामिल हुई हालांकि ज्यादातर समितियों द्वारा जुलूस से अलग हटकर ही दुर्गा प्रतिमा का विर्सजन किया जाता रहा है। आज रात को भी शायद ऐसा ही होगा। शहर में अनेकों जगह स्थापित दुर्गा प्रतिमाओं को डीजे की धुन गाजेबाजे के साथ नाचते गाते हुए दुर्गोत्सव समितियों द्वारा विर्सजन घाटों तक ले जाया जाएगा। जहां भक्तिभाव के बीच दुर्गा प्रतिमाओं का विर्सजन किया जाएगा।
माधवनगर में दशहरा चल समारोह आज
शहर का दशहरा चल समारोह शांतिपूर्वक संपन्न होने के बाद आज बुधवार को उपनगरीय क्षेत्र माधवनगर में दशहरा चल समारोह का आयोजन किया जा रहा है। माधवनगर में रामलीला कमेटी के तत्वावधान में आयोजित होने वाले दशहरा चल समारोह की सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई है। दशहरा जुलुस में करीब आधा सैकड़ा से अधिक दुर्गा प्रतिमाओं के शामिल होने की संभावना है। दशहरा चल समारोह जुलूस रात ठीक 8 बजे माधवनगर रामलीला पंडाल से प्रारंभ होगा, जो माधवनगर के मार्गों से होते हुए निकलेगा। चल समारोह जुलूस में माधवनगर दशहरा के जनक स्व. परचाराम बजाज का तैलचित्र, रावण महराज का पुतला, रथ पर विराजमान भगवान श्री राम, सीता माता, भगवान श्री लक्ष्मण, बजरंगबली शामिल होंगे।
विधायक निवास पर भंडारा
शहर के लोकप्रिय विधायक संदीप जायसवाल की ओर से दशहरा पर्व पर गुरुनानक वार्ड में विजयादशमी के अवसर पर विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। दोपहर डेढ़ बजे कन्या भोज के बाद शुरू हुआ भंडारा देर शाम तक चलता रहा। भंडारे में बड़ी संख्या में शहर के सभी वर्गों के प्रतिष्ठित लोगों ने पहुंचकर प्रसाद ग्रहण करने का पुण्य लाभ अर्जित किया। इस मौके पर विधायक संदीप जायसवाल ने सभी से आत्मीय मुलाकात भी की।
सराफा के भंडारे में पहुंचे हजारों लोग
सराफा एसोसिएशन द्वारा प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी सराफा बाजार में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। शाम 6 बजे से शुरू हुआ विशाल भंडारा भोर होने तक चलता रहा। भंडारे का यह 27वां वर्ष रहा। इस दौरान हजारों लोगों ने भंडारे में पहुंचकर प्रसाद ग्रहण किया। भंडारे में सराफा एसोसिएशन के पदाधिकारी लगातार अपनी सेवाएं देते रहे।
11 कुंड में प्रतिमाओं का विसर्जन
दशहरा चल समारोह में शामिल दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन कटनी नदी के गाटरघाट, मसुरहाघाट और मोहनघाट सहित अन्य घाटों में किया गया। जुलूस में शामिल प्रतिमाएं मध्यरात्रि गाटरघाट पहुंची। यहां नगर निगम प्रशासन द्वारा दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए कृत्रिम कुंड बनाया गया था, जहां जुलूस में शामिल प्रतिमाओं का श्रद्धा के साथ विसर्जन किया गया। नगर निगम प्रशासन द्वारा दुर्गा प्रतिमाओं के 08 2

09 10 1 11 1 18के लिए 11 कुंड बनाए गए थे, जहां सुबह से ही दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन शुरू हो गया था। दोपहर बाद विसर्जन में तेजी आई। गाटरघाट में सबसे ज्यादा दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। यहां चल समारोह में शामिल प्रतिमाओं का विसर्जन सुबह तक चलता रहा। विसर्जन स्थलों पर जेसीबी मशीन से क्रेन के जरिए प्रतिओं को कुंड में विसर्जित किया गया।
दशहरा उत्सव समिति के प्रयासों की सर्वत्र सराहना
दशहरा चल समारोह में जिस खास बात की सराहना होती रहीए वह दशहरा महोत्सव समिति से आकर जुड़ती है। समिति ने दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर के करीब मेन रोड पर मंच लगाकर दुर्गा प्रतिमाओं के साथ चल रहे समितियों के पदाधिकारियों का अभिनंदन किया। जैसे ही कोई प्रतिमा मंच के सामने से गुजरती तत्काल दशहरा उत्सव समिति के लोग दुर्गा समिति के सदस्यों को आमंत्रित करते और पटका पहनाकर उन्हें सम्मानित करते। इस परंपरा की सराहना होती रही। इस दौरान दशहरा उत्सव समिति ने कटनी के ऐतिहासिक दशहरे की इस परम्परा को लेकर गणमान्य नागरिकों को विचार रखने का मौका भी दिया। इस पूरी व्यवस्था का संचालन समिति के रौनक खंडेलवाल, ललित सोनी, पत्रकार अमर ताम्रकार, विक्रम खम्परिया, पत्रकार आशीष सोनी, प्रदीप द्विवेदी, मनोज निगम, मंजूषा गौतम, रजनी सोनी आदि ने किया। मंच पर क्षेत्रीय विधायक संदीप जायसवाल, जिला कांग्रेस शहर अध्यक्ष अमित शुक्ला53 54 55 1 57 1 58 1 सहित अन्य जनप्रतिनिधियों का सम्मान भी किया गया।

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