तो आत्महत्या के लिए मजबूर होंगे बाणसागर डूब प्रभावित क्षेत्र के आदिवासी, 75 किलोमीटर पैदल चलकर पहुंचे कलेक्ट्रेट, आज तक नही मिला मुआवजा, सरकारी जमीन के मालिकाना हक की रखी मांग

कटनी, यशभारत। विजयराघवगढ़ तहसील से 75 किलोमीटर पैदल चलकर करीब 1000 की संख्या में आदिवासी आज कलेक्ट पहुंचे। यहां पहुंचकर उन्होंने अपनी मांग प्रशासन के समक्ष रखी। राष्ट्रीय दलित महासभा के नेतृत्व में किए गए इस प्रदर्शन के दौरान आदिवासी समुदाय के लोगों ने कहा कि ने बाणसागर परियोजना शुरू होने के बाद से उन्हें ना तो किसी प्रकार का मुआवजा मिला है और ना ही सरकारी जमीन का पट्टा। कलेक्टर के नाम सोंपे गए ज्ञापन में बताया गया कि बाणसागर परियोजना लागू होने के बाद उन्हें तालाब के किनारे से विस्थापित कर दिया गया था लेकिन इसके बाद आज तक शासन और प्रशासन के द्वारा उन्हें ना तो किसी प्रकार का मुआवजा दिया गया और ना ही सरकारी जमीन का मालिकाना हक। ज्ञापन में यह भी बताया गया की बरही तहसील के ग्राम पिपरा में बड़ी संख्या में आदिवासी परिवार के लोग सरकारी जमीन पर अपनी झोपड़ी बनाकर रह रहे हैं। समय समय पर शासन एवं प्रशासन के नियमों की आड़ लेकर सरकारी अधिकारी एवं कर्मचारियों द्वारा उन्हें वहां से हटाने के लिए परेशान किया जाता रहा है। उनका कहना है कि वह सालों से इस जमीन पर निवास कर रहे हैं। शासन और प्रशासन ने उनकी आज तक नहीं सुनी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार या प्रशासन के लोग उन्हें इसी तरह परेशान करते रहेंगे और सरकारी जमीन का जिसमे वे निवास कर रहे हैं, उसका मालिकाना हक नहीं देंगे तो वह आत्महत्या करने के लिए मजबूर होंगे







