कटनी

जर्जर स्कूल भवन में पढऩे के लिए मजबूर छात्र, छत से टपक रहा बारिश का पानी, कैसे पढ़ाई करें नौनिहाल अव्यवस्थाओं का वीडियो बनाकर छात्रों ने सोशल मीडिया पर किया वायरल

कटनी, यशभारत। राज्य सरकार द्वारा शिक्षा पर करोड़ों रूपए खर्च किए जा रहे हैं, इसके बाद भी जिले की शिक्षा व्यवस्था बदहाल नजर आ रही है। कहीं स्कूलों में शिक्षक नहीं है तो कहीं भवन नहीं है और जहां भवन है तो वहां छत टपक रही है। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि देश के नौनिहालों को शिक्षा ग्रहण करने में कितनी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा होगा। ऐसी स्थिति तब है, जब जिले में पदस्थ प्रमुख प्रशासनिक अधिकारी आईएएस है। ऐसा ही एक मामला ढीमरखेड़ा तहसील में सामने आया है, जहां बारिश के चलते स्कूल भवन की जर्जर छत से पानी टपक रहा है। बारिश होने पर भवन की छत से कई जगहों से पानी टपकने लगता है और कक्षाओं के अंदर पानी जमा हो जाता है। इससे डेस्क-बेंच गीली हो जाती हैं तथा विद्यार्थियों के बस्ते और शैक्षणिक सामग्री भी खराब हो ही है। परेशान विद्यार्थियों ने मोबाइल कैमरा थामकर विद्यालय की वास्तविक स्थिति का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।
बदहाल शौचालय, जर्जर भवन
क्षेत्र के ग्रामीणों ने बताया कि पाली स्थित शासकीय प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय बदहाली के दौर से गुजर रहा है। जर्जर भवन में प्रतिदिन कक्षाएं संचालित होने से विद्यार्थियों और शिक्षकों के सामने सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है। बारिश के दौरान स्थिति और अधिक खराब हो जाती है। बच्चों का कहना है कि वे रोज पढऩे के लिए स्कूल आते हैं लेकिन जब कक्षा में ही पानी टपकने लगे तो पढ़ाई प्रभावित होना स्वाभाविक है। विद्यालय की समस्या केवल भवन और छत तक सीमित नहीं है। यहां शौचालय की स्थिति भी विद्यार्थियों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। जर्जर एवं बदहाल शौचालय के कारण छात्रों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। खासकर छात्राओं के लिए स्वच्छ और सुरक्षित शौचालय की सुविधा बेहद आवश्यक है लेकिन विद्यालय में इसकी स्थिति संतोषजनक नहीं बताई जा रही है।
अधिकारियों से कार्रवाई की उम्मीद
विद्यार्थियों और अभिभावकों को उम्मीद है कि वीडियो में स्कूल की सच्चाई सामने आने के बाद शिक्षा विभाग द्वारा विद्यालय भवन की स्थिति, छत और शौचालय का निरीक्षण कर मरम्मत कराई जाएगी। बारिश के मौसम में बच्चों की परेशानी को देखते हुए जर्जर कक्षों की मरम्मत के साथ सुरक्षित स्थान पर कक्षाएं संचालित करना जरूरी है, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई भी प्रभावित न हो और उनकी सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सके।
इनका कहना है
जिला शिक्षा अधिकारी एस एन पांडेय का कहना है कि स्कूलों में छोटी-मोटी मरम्मत के लिए 10 हजार रुपये की राशि उपलब्ध कराई जाती है। शिक्षक को उपलब्ध राशि से आवश्यक मरम्मत का कार्य कराया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि विद्यालय की समस्या की जानकारी मिलने के बाद तत्काल स्थिति दिखवाई जाएगी। यदि कोई कक्ष जर्जर अथवा अधिक समस्या वाला है तो वहां कक्षाएं संचालित नहीं करने के निर्देश दिए जाएंगे।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button