रीठी में 100 बिस्तर का अस्पताल स्वीकृत होने के बाद स्लीमनाबाद चली गई सौगात, इलाज के लिए मोहताज रीठी स्वास्थ्य केंद्र, सवा लाख आबादी, फिर भी चिकित्सा सुविधाएं नहीं

कटनी/रीठी, यशभारत। वर्षों से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के भरोसे चल रही रीठी की स्वास्थ्य व्यवस्था अब खुद इलाज की मोहताज नजर आ रही। क्षेत्र की करीब 1.27 लाख से अधिक आबादी की चिकित्सा जरूरतों का बड़ा भार रीठी सीएचसी पर है, लेकिन सुविधाएं अभी भी सीमित है। विडंबना यह है कि जिस रीठी को कभी तहसील का दर्जा मिला और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की उम्मीद जगी, वहां आज भी मरीजों को बेहतर इलाज के लिए कटनी की राह पकडऩी पड़ती है। कहा जाता है कि रीठी में 100 बिस्तरों का सिविल अस्पताल स्वीकृत होने से क्षेत्रवासियों में नई आशा जगी थी। लेकिन यह सौगात स्लीमनाबाद चली गई। अगर ऐसा है तो सवाल यह है कि आखिर रीठी के हिस्से का अस्पताल कैसे दूसरी जगह पहुंच गया। क्षेत्र में चर्चा है कि स्लीमनाबाद में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की नई बिल्डिंग का उद्घाटन तक नहीं हुआ था, फिर उसे सिविल अस्पताल का दर्जा कैसे मिल गया। अगर यह निर्णय नियमों और आवश्यकता के आधार पर हुआ है तो शासन को इसका आधार सार्वजनिक करना चाहिए और यदि रीठी की तुलना में स्लीमनाबाद को प्राथमिकता देने का कोई ठोस कारण है, तो वह भी जनता को बताया जाना चाहिए। रीठी में वर्तमान में 30 बेड की व्यवस्था है, जबकि क्षेत्र की जरूरत कहीं अधिक है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी, सीमित संसाधन और गंभीर मरीजों को कटनी रिफर किए जाने की मजबूरी के बीच सवाल केवल अस्पताल की बिल्डिंग का नहीं, बल्कि इलाज के अधिकार और समय पर चिकित्सा सुविधा का है। कटनी अस्पताल की दूरी लगभग 32 किलोमीटर होने के कारण सडक़ दुर्घटनाए प्रसव संबंधी जटिलता या अन्य गंभीर आपात स्थिति में रिफर किए गए मरीजों के लिए हर मिनट महत्वपूर्ण हो जाता है। ऐसे में रीठी में ही बेहतर आपातकालीन सुविधा उपलब्ध होना क्षेत्र की वास्तविक आवश्यकता है। क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि रीठी को 50 या 100 बिस्तरों वाले सिविल अस्पताल के रूप में अपग्रेड किया जाए। आधुनिक पैथोलॉजी लैब, 24 घंटे इमरजेंसी, ट्रॉमा सुविधा और स्त्री रोगए शिशु रोग तथा एनेस्थीसिया जैसे विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद स्वीकृत कर नियुक्तियां की जाएं।







