कटनी

जनगणना : 3000 लोगों ने किया सेल्फ रजिस्ट्रेशन, घर बैठे ऑनलाइन भरा फार्म, दिखाई जागरूकता, 30 मई तक होगी मकानों की लिस्टिंग, घर-घर जा रहे प्रगणक

कटनी, यशभारत। 15 साल बाद देश में कराई जा रही जनगणना के प्रथम चरण के तहत घर-घर जाकर मकानों की लिस्टिंग का काम शुरू हो गया है। करीब तीन हजार से ज्यादा कर्मचारी इस काम में जुटे हुए हैं। इसके पहले अपै्रल तक चलाए गए अभियान के तहत जिले में लगभग तीन हजार लोगों ने सेल्फ रजिस्ट्रेशन यानि स्वगणना को ऑनलाइन भरा है। जिले के लोगों ने खुद ही ऑनलाइन माध्यम से अपने परिवार का विवरण दर्ज किया है।
बताया जाता है कि मकानों की लिस्टिंग के लिए जनगणना प्रक्रिया में हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन एप (एचएलओ) प्रगणकों के मोबाइल में इंस्टाल कराया गया है। इसी के माध्यम से मकानों का सूचीकरण हो रहा है। प्रगणकों द्वारा एप डाउनलोड का मकानों का सूचीकरण करने मैदान में उतर चुके हैं। प्रगणकों सहित सुपरवाइजन को निगरानी क लिए फील्ड में उतारा गया है। 2500 प्रगणक व 500 सुपरवाइजर ड्यूटी पर हैंए जो घरों की गणना शुरू कर दिए हैं। मकानों में जाकर नंबर लिख रहे हैं। जनगणना मकान नंबर अंकित करना हैए जो प्रक्रिया शुरू की गई है। यह प्रक्रिया 30 मई तक लगातार चलेगी।
आंकड़ों के आधार पर बनेंगी योजनाएं
जनगणना के माध्यम से सरकार को यह पता चलेगा कि किस क्षेत्र में कितनी आबादी निवास करती है और वहां किन सुविधाओं की आवश्यकता है। जनगणना के आंकड़ों के आधार पर शिक्षा, स्वास्थ्य, सडक़, रोजगार और राशन जैसी योजनाएं बनाई जाएंगी। इसके अलावा संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन में भी जनगणना की अहम भूमिका होगी। विशेषज्ञों के अनुसार सही और पारदर्शी जनगणना से विकास योजनाओं का लाभ जरूरतमंद लोगों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सकता है।
2011 में जिले की आबादी 12 लाख 92 हजार
इसके पहले 2011 में हुई जनगणना के अनुसार जिले की कुल जनसंख्या 12 लाख 92 हजार 42 थी। इसमें 6 लाख 62 हजार 13 पुरुष और 6 लाख 30 हजार 29 महिलाएं शामिल हैं। जिले का लिंग अनुपात प्रति 1000 पुरुषों पर 952 महिलाएं थीं। यह 2001-2011 के दौरान 21.41 प्रतिशत की जनसंख्या वृद्धि को दर्शाता गया है। जनसंख्या घनत्व 261 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर रहा। कुल क्षेत्रफल 4950 वर्ग किलोमीटर माना गया था। दशकीय वृद्धि दर 2001 2011 में 21.41 प्रतिशत रही। साक्षरता दर 71.98 प्रतिशत रही। शहरी आंकड़े के अनुसार जनसंख्या 2 लाख 21 हजार 883 थी। लिंगानुपात 924, साक्षरता दर 85.91 मानी गई थी।
प्रगणक को दी गई यूनिक आइडी
प्रगणक को एप के लिए यूनिक आइडी तय की गई है, उसको यह एरिया दिखेगा। प्रगणक को सैटेलाइट से ऑनलाइन जीपीएस के माध्यम से मकान दिख रहा है। एप में प्रगणक को जो नक्शा दिख रहा है, वह सही है कि नहीं इसका सत्यापन करेगा। उसी के अनुसार नंबरिंग की जा रही है। एक प्रगणक को 200 से अधिक घरों की नंबरिंग करने का काम नहीं दिया गया। उत्तर पश्चिम से इसकी नंबरिंग की जा रही है। चूना, गेरू, नील, मार्कर आदि से नंबरिंग की जा रही है। प्रगणक जब नंबरिंग का काम कर लेगा तो एप में स्व जनरेटेड नंबरिंग आने लगेगी। उसके मालिक से पूछताछ शुरू कर देगा। दो से तीन दिन में जानकारी फीड की जाएगी। 33 प्रकार के प्रश्नों की का जवाब भरना होगा।
कई स्तर पर हो रही निगरानी
नोडल अधिकारी डिप्टी कलेक्टर विंकी सिंहमारे ने बताया कि जनगणना की कई स्तरों पर निगरानी हो रही है। सुपरवाइजर मॉनीटरिंग कर रहे हैं। इसकी रिपोर्टिंग चार्ज अधिकारी को की जा रही है, जिसमें तहसीलदार, नगर परिषद के सीएमओ, नगर निगम के जोन अधिकारी शामिल हैं। जिले में 9 तहसीलें, 4 नगर परिषद, नगर निगम के अंतर्गत जोन बनाए गए हैं। 16 चार्ज अधिकारी इसकी निगरानी कर रहे हैं। जिला स्तर से भी टीम निगरानी कर रही है। जिला जनगणना अधिकारी एडीएम को बनाया गया है, वे भी मॉनीटरिंग कर रहे हैं।

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