गुम इंसान की रिपोर्ट पर अब सीधे एफआईआर, तलाश के लिए वैधानिक एवं तकनीकी उपाय करने पीएचक्यू के निर्देश, गुमशुदगी के मामलों में बढ़ेगा अपराधिक आंकड़ा

कटनी, यशभारत। गुम इंसान के मामलों में अब त्वरित गति से कार्रवाई होगी। पीएचक्यू ने ऐसे मामलों में एफआईआर करने के साथ ही गुम इंसान की तलाश के लिए सभी आवश्यक वैधानिक एवं तकनीकी उपाय करने के निर्देश दिए हैं। पुलिस मुख्यालय ने यह निर्देश देश की सर्वोच्च अदालत के आदेश के बाद जारी किए हैं। दरअसल पिछले कुछ समय से गुम इंसान के मामलों में बढ़ोत्तरी हुई है। इसमे ज्यादातर कम उम्र या नाबालिग होते हैं, हालांकि पुलिस ऐसे मामलों में अन्य मामलों की तुलना में संवदेनशीनता का परिचय देती है और रिपोर्ट दर्ज करते हुए नाबालिग किशोर-किशोरियों की दस्तयाबी के लिए प्रयास करती है। कईयों बार पुलिस को कम समय में ही सफलता मिल जाती है तो कईयों बार पुलिस को काफी परेशानियां भी आती है। कटनी की बात करें तो महीने में कम से कम 20 केस इस तरह के सामने आ रहे हैं। जिले के शहरी थानोंं में इसकी संख्या अधिक है। खासकर एनकेजे और रंगनाथनगर थाना क्षेत्र में बिना बताए या अन्य कारणों से घर से छोडक़र जाने वाले बच्चों की संख्या अधिक है। जब यह मामले थाने पहुंचते हैं तो पुलिस भी संजीदगी के साथ फरियायिों की शिकायत दर्ज करते हुए उनकी तलाश में जुट जाती है। यही कराण है कि कटनी जिले में गुमशुदगी में दस्तयाबी का रिकार्ड काफी बेहतर है।
अनिवार्य रूप से होगी एफआईआर
सूत्रों के मुताबिक पुलिस मुख्यालय ने प्रत्येक गुम इंसान (महिला एवं पुरुष) के प्रकरण में अनिवार्य रूप से एफआईआर दर्ज करने निर्देश जारी किए हैं। गुमशुदगी की सूचना प्राप्त होते ही तत्काल एफआईआर पंजीबद्ध कर जांच प्रारंभ की जाए। गुम व्यक्ति की शीघ्र तलाश के लिए सभी आवश्यक वैधानिक एवं तकनीकी उपाय किए जाएं। आदेश के तहत किसी भी व्यक्ति की गुमशुदगी पर अब सीधे भारतीय न्याय संहिता बीएनएस की धारा 140 (3) के तहत एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य कर दिया गया है। इस नई व्यवस्था के लागू होने से दर्ज होने वाले गुमशुदगी के मामले सीधे एफआईआर में बदल जाएंगे, जिससे पुलिस की विवेचना के साथ ही अपराध रिकॉर्ड के आंकड़ों पर भी बड़ा असर पड़ेगा।
महिला सुरक्षा शाखा ने तैयार की विशेष कार्ययोजना
सुप्रीम कोर्ट के इस कड़े रुख के अनुपालन में पुलिस मुख्यालय की महिला सुरक्षा शाखा ने एक विशेष कार्ययोजना तैयार की है। इस नई व्यवस्था को दूसरे राज्यों की पुलिस प्रणाली से व्यापक चर्चा और अध्ययन करने के बाद मध्य प्रदेश में लागू किया गया है। आदेश के अनुसार चार सप्ताह के भीतर इसकी कंप्लायंस रिपोर्ट अनुपालन रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को भेजी जाएगी। शुरुआती स्तर पर गुमशुदगी की रिपोर्ट को सीधे एफआईआर में बदला जाएगा। इसके बाद विवेचना जांच के दौरान यदि अपहरण, मानव दुव्र्यापार ह्यूमन ट्रैफिकिंग या किसी अन्य प्रकार के गंभीर अपराध के तथ्य या साक्ष्य मिलते हैंए तभी संबंधित कड़ी धाराएं जोड़ी जाएंगी। ये धाराएं हर केस में शुरुआत से नहीं जोड़ी जाएंगी।









