गरीबों के सपनों पर डाका? पीएम आवास योजना में गड़बड़ियों के आरोपों से घिरी पंचायतें
बेबा ने छोड़ा गांव लडक़ी के घर ली शरण

गरीबों के सपनों पर डाका? पीएम आवास योजना में गड़बड़ियों के आरोपों से घिरी पंचायतें
डिठवारा में पात्रों को बाहर रखने का आरोप, मझगवां में घर गिरने के बाद भी बेघर परिवार को नहीं मिला आवास

कटनी,यशभारत। प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य हर गरीब परिवार को पक्का घर उपलब्ध कराना है, लेकिन कटनी जिले के ग्रामीण क्षेत्रों से सामने आ रहे मामले इस महत्वाकांक्षी योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। कहीं पात्र हितग्राहियों के नाम सूची से गायब होने के आरोप हैं तो कहीं वर्षों से बेघर परिवार सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने के बावजूद आज भी छत का इंतजार कर रहा है।
कटनी जनपत के ग्राम पंचायत डिठवारा के ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम संयुक्त कलेक्टर जितेंद्र पटेल को ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री आवास योजना की अस्थायी सूची में वास्तविक गरीबों और भूमिहीन परिवारों को बाहर कर आर्थिक रूप से सक्षम एवं प्रभावशाली लोगों के नाम शामिल किए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सूची के सत्यापन के लिए ग्राम सभा तक नहीं कराई गई, जिससे पात्र परिवार आपत्ति दर्ज ही नहीं कर सके। उन्होंने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच, नई ग्राम सभा और दोषी अधिकारियों एवं पंचायत प्रतिनिधियों पर कार्रवाई की मांग की है।
बेघर बेबा ने छोड़ा गांव लड़की के घर ली शरण
वहीं दूसरी ओर, कटनी जनपद की बिस्तरा ग्राम पंचायत के उपग्राम मझगवां की तस्वीर इस योजना की जमीनी हकीकत बयां करती है। यहां रहने वाले सुशील तिवारी (पिता सीताराम तिवारी) का कच्चा मकान गत वर्ष बारिश में पूरी तरह ढह गया। घर उजड़ने के बाद परिवार खुले आसमान के नीचे आ गया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें आज तक प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिल सका।
परिजनों का कहना है कि सुशील ने पंचायत से लेकर जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तक कई बार गुहार लगाई, आवेदन दिए और कार्यालयों के चक्कर लगाए, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला। हालात इतने खराब हो गए कि उनकी वृद्ध मां को अपना गांव छोड़कर बेटी के घर शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ा।
एक तरफ आवास सूची में अपात्र लोगों को शामिल किए जाने के आरोप लग रहे हैं, तो दूसरी ओर जिन गरीबों का घर गिर चुका है, वे भी सरकारी योजनाओं की सूची में जगह नहीं बना पा रहे। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर योजना का वास्तविक लाभ किसे मिल रहा है? यदि पात्र गरीबों को वर्षों तक छत न मिले और प्रभावशाली लोगों के नाम सूची में पहुंच जाएं, तो योजना की पारदर्शिता और निगरानी दोनों पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है।
अब जरूरत है कि जिला प्रशासन केवल कागजी समीक्षा तक सीमित न रहे, बल्कि गांव-गांव जाकर पात्रता सूची का निष्पक्ष सत्यापन कराए, शिकायतों की जांच करे और यह सुनिश्चित करे कि प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ वास्तव में उन्हीं गरीब परिवारों तक पहुंचे, जिनके लिए यह योजना बनाई गई है।







