कटनीमध्य प्रदेश

कटनी से नेपाल तक उम्मीदों का सफर: जब प्रशासन बना बिछड़े मासूम का सहारा

रेलवे स्टेशन पर अकेला मिला मासूम, प्रशासन की संवेदनशील पहल से लौटी परिवार की खुशियां

🔳कटनी से नेपाल तक उम्मीदों का सफर: जब प्रशासन बना बिछड़े मासूम का सहारा

🔳रेलवे स्टेशन पर अकेला मिला मासूम, प्रशासन की संवेदनशील पहल से लौटी परिवार की खुशियां

🔳कटनी से नई दिल्ली और फिर नेपाल तक चला मानवीय प्रयासों का अभियान

🔳कटनी ,यशभारत।  कभी-कभी एक छोटी सी चूक किसी बच्चे को अपनों से मीलों दूर कर देती है। लेकिन जब संवेदनशील प्रशासन, समर्पित अधिकारी और मानवीय प्रयास एक साथ खड़े हो जाएं, तो बिछड़े रिश्तों को फिर से मिलाया जा सकता है। ऐसी ही एक भावुक और प्रेरणादायक कहानी है नेपाल निवासी बालक आरव (परिवर्तित नाम) की, जो अपने परिवार से बिछड़ गया था, लेकिन कलेक्टर श्री आशीष तिवारी द्वारा विगत कई दिनों से किये जा रहे प्रयास फलीभूत हुए और विदेश मंत्रालय भारत सरकार की मदद से आरव को नेपाल दूतावास को सौंप दिया गया। जहां से आरव का अपने माता-पिता से सुखद मिलन हुआ।

रेल यात्रा में बिछड़ा, कटनी स्टेशन पर मिला

अकेला आरव अपने परिजनों के साथ रेल यात्रा कर रहा था। सफर के दौरान परिस्थितियां ऐसी बनीं कि वह अपने परिवार से बिछड़ गया। मासूम बालक खुद को एक अनजान जगह पर अकेला पाकर घबरा गया। कटनी रेलवे स्टेशन पर जब आरपीएफ की नजर उस पर पड़ी, तो उसे तत्काल संरक्षण में लिया गया।

सूचना मिलते ही जिला बाल संरक्षण इकाई कटनी सक्रिय हुई। बालक की सुरक्षा और देखरेख सुनिश्चित करते हुए उसे मिशन वात्सल्य के अंतर्गत संचालित आशा किरण बाल देखरेख संस्था में आश्रय दिया गया। साथ ही नियमानुसार उसका प्रकरण बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया।

पहचान की तलाश से शुरू हुआ उम्मीदों का सफर

बालक की भाषा, व्यवहार और उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर उसके परिवार की तलाश शुरू हुई। यह काम आसान नहीं था। एक ओर मासूम की चिंता थी, दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं का पालन भी करना था।

ऐसे में कलेक्टर श्री तिवारी द्वारा किए गए विशेष प्रयास खासतौर पर विदेश मंत्रालय के अफसरों से संपर्क और संवाद कर किया गया मानवीय और संवेदनशील प्रयास सराहनीय रहा।। खोजबीन के बाद बालक के परिजनों का पता लगाया गया और यह स्पष्ट हुआ कि उसका परिवार नेपाल में निवास करता है।

सीमाओं से परे संवेदनशीलता

इसके बाद शुरू हुआ वह प्रशासनिक अभियान, जिसमें संवेदनशीलता और कानून दोनों का संतुलन आवश्यक था। किशोर न्याय अधिनियम 2015 के प्रावधानों के अनुरूप विस्तृत प्रतिवेदन तैयार कर महिला एवं बाल विकास विभाग के संचालनालय को भेजा गया। विदेश मंत्रालय, भारत सरकार तथा नेपाली दूतावास से समन्वय स्थापित किया गया।

कई स्तरों की औपचारिकताओं और सत्यापन प्रक्रियाओं के बाद बालक की सुरक्षित वापसी का मार्ग प्रशस्त हुआ। कटनी से नई दिल्ली तक की यात्रा और उसके बाद नेपाली दूतावास में परिजनों से मिलन की व्यवस्था की गई।

जब माता-पिता से मिला बेटा,छलक उठीं आंखें

वह पल बेहद भावुक था, जब नई दिल्ली स्थित नेपाली दूतावास में आरव अपने माता-पिता से मिला। कई दिनों की चिंता, बेचैनी और इंतजार के बाद माता-पिता ने अपने बेटे को सीने से लगाया तो खुशी और राहत के आंसू छलक पड़े।

बालक के चेहरे पर लौट आई मुस्कान और माता-पिता की आंखों में झलकती संतुष्टि इस बात का प्रमाण थी कि प्रशासनिक सेवाएं केवल नियमों का पालन नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं की रक्षा का भी माध्यम हैं।

IMG 20260605 WA0043 Screenshot 20260605 124822 Samsung Notesजिला प्रशासन की संवेदनशील पहल बनी मिसाल

बालक के माता-पिता ने विदेश मंत्रालय, कलेक्टर कटनी तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके समर्पित प्रयासों के कारण उनका बेटा सुरक्षित घर लौट सका।

यह सफल अंतरदेशीय प्रत्यावर्तन केवल एक प्रशासनिक उपलब्धि नहीं, बल्कि मानवता, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का ऐसा उदाहरण है, जिसने एक परिवार की बिछड़ी खुशियों को फिर से जोड़ दिया। कलेक्टर श्री आशीष तिवारी के मार्गदर्शन में किया गया यह प्रयास इस बात का सशक्त संदेश है कि जब शासन संवेदनशील हो, तो सीमाएं भी रिश्तों को मिलने से नहीं रोक सकतीं।

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