भोपालमध्य प्रदेश

एसी की आदत बना रही शरीर को कमजोर, मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा असर अत्यधिक इस्तेमाल से बढ़ रहीं जकड़न, तनाव और रोगों की आशंका विशेषज्ञों ने दी सावधानी की सलाह

Habitual use of ACs is weakening the body and impacting mental health Excessive use increases the risk of stiffness, stress, and ailments; experts advise caution

एसी की आदत बना रही शरीर को कमजोर, मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा असर

अत्यधिक इस्तेमाल से बढ़ रहीं जकड़न, तनाव और रोगों की आशंका विशेषज्ञों ने दी सावधानी की सलाह

भोपाल यश भारत। गर्मी से राहत पाने के लिए एयर कंडीशनर एसी का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि घंटों तक एसी में रहना और लगातार ठंडे वातावरण का आदी बन जाना सेहत के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। इससे न केवल शरीर की प्राकृतिक अनुकूलन क्षमता प्रभावित होती है बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार एसी सीधे तौर पर हड्डियों को नुकसान नहीं पहुंचाता लेकिन लंबे समय तक ठंडे वातावरण में रहने से मांसपेशियों और जोड़ों में जकड़न बढ़ जाती है। गठिया और हड्डियों की कमजोरी से पीड़ित लोगों में यह समस्या अधिक गंभीर हो सकती है। वहीं एसी में अधिक समय बिताने वाले लोग धूप से दूर रहते हैं जिससे शरीर में विटामिन डी की कमी होने लगती है। विटामिन डी हड्डियों को मजबूत बनाए रखने के लिए आवश्यक माना जाता है। लगातार एसी में रहने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कमजोर पड़ सकती है जिससे सर्दी-जुकाम और अन्य संक्रमणों का खतरा बढ़ जाता है। एसी की शुष्क हवा त्वचा और जोड़ों में सूखापन पैदा करती है, जिसका असर विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों में देखने को मिलता है। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि बंद कमरों और कृत्रिम वातावरण में लंबे समय तक रहने से चिड़चिड़ापन तनाव मानसिक थकान और सुस्ती जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। इससे व्यक्ति धीरे धीरे एसी के आराम का आदी हो जाता है और सामान्य तापमान में असहज महसूस करने लगता है। डॉक्टरों ने एसी का तापमान 24 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच रखने ठंडी हवा को सीधे शरीर पर न पड़ने देने नियमित रूप से धूप लेने और शारीरिक गतिविधियां बनाए रखने की सलाह दी है। उनका कहना है कि एसी का संतुलित उपयोग ही गर्मी से राहत के साथ बेहतर स्वास्थ्य की कुंजी है।

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