जबलपुरमध्य प्रदेशराज्य

आयुष विभाग के प्रोफेसर रीडर और लेकचरर के ट्रांसफर पालिसी को चुनोती देने बाली याचिका में समान पदाधारियो का इंटरवेंशन आवेदन स्वीकार

जबलपुर,:- हाई कोर्ट के डिविजन बेंच न्यायाधीश श्री शील नागू तथा श्री वीरेन्द्र सिंह के समक्ष स्वशासी शासकीय महाविद्यालयों के प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर के सेवा नियम बनाने सरकार की शक्ति को उच्च न्यायालय में याचिका क्रमांक wp/8214/22 के माध्यम से कई चिकित्सको द्वारा चुनौती दी गई है उक्त याचिका में दिनांक 20/4/2022 को हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश कर पिटिशनरो के साथ साथ समान रूप से स्थित व्यक्तियों के ट्रांसफर पर भी रोक सम्वन्धी आदेश जारी किया गया है। जिससे व्यथित होकर शासकीय स्वशासी आयुर्वेद महाविद्यालय बुरहानपुर, ग्वालियर इंदौर महाविद्यालयों के प्रोफ़ेसर असिस्टेंट प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसरों के द्वारा अधिवक्ता विनायक शाह एवम रामेश्वर सिंह ठाकुर के माध्यम से इंटरवेंशन/हत्क्षेप याचिका दाखिल मी गई है जिसे आज दिनांक को स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने इंटरवींनरो को याचिका में उठाए गए मुद्दों पर जबाब दाखिल करने की स्वन्त्रता प्रदान की गई है ।

इंटरवींनरो के अधिवक्ताओ ने कोर्ट को बताया की मध्यप्रदेश आयुष मंत्रालय के द्वारा जारी शिक्षकीय संवर्ग के सेवा भर्ती नियम 2022 के द्वारा राज्यस्तरीय रोस्टर, स्थानांतरण, नियुक्ति शासकीय स्वशासी महाविद्यालय को संचालित करने के लिए सरकार नियम बनाने हेतु संवैधानिक रूप से अधिकृत है क्योंकि पंजीकृत की गई समस्त समितियां सरकारी है तथा शासकीय स्वशासी महाविद्यालय के सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों का वेतन राजकोष से निकलता है। न्यायालय को यह भी बताया गया कि याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति आदेश में स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि इनकी नियुक्तियां आरक्षण नियम के अनुसार किया गया है। इनमे से अधिकांश शिक्षक आरक्षित पदों के विरुद्ध एक साल की संविदा मे आये थे, जिनको बाद मे विधि विरुद्ध तरीके से नियमित कर दिया गया। जिनमे से अनेक याचिका कर्ताओ को दूसरे कालेज मे संविलियन करके नियमित किया गया है तथा समस्त याचिका कर्ता कई वर्षों से भोपाल पदस्थ है ।

याचिका कर्ता एक ही स्थान पर पदस्थत रहना चाहते है तथा याचिका कर्ताओ द्वारा विधिक प्रावधानों को मेनूपुलेट करके हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है जिसमे सरकार के द्वारा बनाये गये नियमों की संवैधानिकता को चुनौती देते हुए नियम 2022 के विरोध में याचिका दायर की गयी है तथा कोर्ट को तथ्यों से गुमराह करके दिनांक 20/4/22 को स्थान्तरण पर स्थगन आदेश प्राप्त कर लिया है तथा याचिका कर्ताओ में से उक्त प्रकरण का oic भी बनाया गया है जिसने अभी तक न तो याचिका में जबाब दाखिल किया है और न ही स्थगन रिक्त करने का आवेदन हाईकोर्ट ने उक्त समस्त तथ्यों को गंभीरता से लेते हुए इंटरवींनरो को जबाब दाखिल करने का अवसर दिया गया तथा सरकार को भी जवाब देने के लिए समय दिया गया याचिका की आगामी सुनवाई 9 जनवरी 2023 को नियत की गई ।

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