अनोखा रोजगार : ‘कैश फॉर कीड़ा’ स्कीम , साल के जंगलों पर बोरर कीट का हमला : 2 रुपये में कीट खरीद रहा वन विभाग

डिंडौरी। जिले के साल के घने जंगल इन दिनों बोरर (Borer) कीट के गंभीर प्रकोप से जूझ रहे हैं। विशेष रूप से वन परिक्षेत्र करंजिया के जंगलों में साल के वृक्ष सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। पेड़ों को बचाने और पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से वन विभाग ने अनूठी पहल करते हुए ग्रामीणों से बोरर कीट खरीदना शुरू किया है। विभाग प्रत्येक कीट के बदले 2 रुपये का भुगतान कर रहा है, जिससे एक ओर जंगलों को बचाने का प्रयास हो रहा है तो दूसरी ओर ग्रामीणों को रोजगार का अवसर भी मिल रहा है।
वन विभाग के अनुसार बोरर कीट साल के वृक्षों में घुसकर उन्हें भीतर से खोखला कर देता है। धीरे-धीरे यह कीट पेड़ों को इतना कमजोर कर देता है कि उनका सूखना और गिरना शुरू हो जाता है। इस खतरे को देखते हुए विभाग ने ग्रामीणों की मदद से कीट पकड़ने का अभियान शुरू किया है। ग्रामीण कीट का सिर काटकर 100-100 कीटों के सिर की माला बनाकर विभाग को सौंप रहे हैं, जिसके आधार पर भुगतान किया जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि करीब 25 वर्ष पहले भी साल के जंगलों में इसी प्रकार का बोरर कीट फैला था। उस समय वन विभाग प्रत्येक कीट के बदले 40 पैसे देता था, जबकि अब बढ़ाकर 2 रुपये प्रति कीट कर दिया गया है।
वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में अब तक करीब 12 लाख बोरर कीट पकड़े जा चुके हैं, जिनके एवज में लगभग 24 लाख रुपये का भुगतान किया जा रहा है। इससे सैकड़ों ग्रामीणों को अतिरिक्त आय का स्रोत भी मिला है।
हालांकि यह स्थिति वन संरक्षण की चुनौतियों को भी उजागर करती है। वैज्ञानिक और तकनीकी विकास के इस दौर में भी साल के वृक्षों को नुकसान पहुंचाने वाले ऐसे कीटों के प्रभावी नियंत्रण के लिए कोई स्थायी और कारगर दवा उपलब्ध नहीं हो सकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी वैज्ञानिक समाधान नहीं खोजा गया तो साल के जंगलों को दीर्घकालीन नुकसान उठाना पड़ सकता है।
उधर, वन मंडल डिंडौरी ने बोरर कीट से अत्यधिक प्रभावित करीब 7 हजार साल के पेड़ों को काटने की अनुमति के लिए उच्च स्तर पर प्रस्ताव भेजा है। प्रस्ताव स्वीकृत होने के बाद गंभीर रूप से संक्रमित पेड़ों को हटाने की कार्रवाई की जाएगी, ताकि संक्रमण अन्य स्वस्थ वृक्षों तक न फैले।
वन विभाग का कहना है कि विभागीय अमला लगातार प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी कर रहा है और ग्रामीणों के सहयोग से कीट नियंत्रण अभियान चलाया जा रहा है। विभाग को उम्मीद है कि जनसहभागिता के माध्यम से साल के जंगलों को बड़े नुकसान से बचाया जा सकेगा।
फैक्ट फाइल
करंजिया क्षेत्र में साल के वृक्षों पर बोरर कीट का सबसे अधिक प्रकोप।
वन विभाग प्रत्येक बोरर कीट के बदले दे रहा 2 रुपये।
अब तक 12 लाख कीट पकड़े गए, लगभग 24 लाख रुपये का भुगतान।
7 हजार संक्रमित पेड़ों को काटने के लिए उच्चस्तरीय अनुमति का इंतजार।
पर्यावरण संरक्षण के साथ ग्रामीणों को मिला अतिरिक्त रोजगार।







