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बड़ी खबर : पूर्व आईएसएस अधिकारी मोहम्मद सुलेमान की सजा पर हाईकोर्ट की रोक, रिटायर्ड प्रमुख सचिव ने दायर की थी कंटेम्प्ट अपील, कोर्ट ने विपक्षी को जारी किया नोटिस

इंदौर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग के पूर्व प्रमुख सचिव मोहम्मद सुलेमान को बड़ी राहत दी है। अवमानना मामले में सुनाई गई 2 महीने की जेल की सजा के आदेश पर रोक लगा दी है। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच ने मामले पर सुनवाई की।
सजा के इस आदेश के खिलाफ पूर्व IAS सुलेमान ने हाईकोर्ट में कंटेम्प्ट अपील (CONA No. 32/2026) दायर की थी। अपीलकर्ता की ओर से अधिवक्ता राज सक्सेना ने कोर्ट में दलील दी कि मोहम्मद सुलेमान को अवमानना की कार्यवाही का कोई नोटिस प्राप्त नहीं हुआ था। सुलेमान को न ही अनुपालन के लिए पारित आदेश की जानकारी थी। यह भी बताया गया कि जिस मूल आदेश (06.12.2023) के उल्लंघन का आरोप है, उसे पहले ही रिट अपील (W.A. No. 3612/2025) में चुनौती दी जा चुकी है, जिस पर स्टे मिल चुका है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद डिवीजन बेंच ने अंतरिम राहत देते हुए कहा कि अगली सुनवाई तक 16 मार्च को पारित सजा के आदेश का क्रियान्वयन स्थगित रहेगा। कोर्ट ने इस मामले में विपक्षी पक्ष अशोक कुमार पाडेयार को नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई 4 सप्ताह बाद होगी।
दरअसल 16 मार्च 2026 को हाईकोर्ट की एकल पीठ ने कंटेम्प्ट पिटीशन (CONC No. 1582/2024) की सुनवाई करते हुए मोहम्मद सुलेमान को कोर्ट के आदेश की अवहेलना का दोषी पाया था। अदालत ने आदेश के गैर-अनुपालन (Non-compliance) के लिए उन्हें 2 महीने की सजा सुनाई थी।
अधिवक्ता प्रसन्ना भटनागर के अनुसार यह मामला मंदसौर स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों के नियमितीकरण से जुड़ा है। कोर्ट ने 6 दिसंबर 2023 को कर्मचारियों को वर्ष 2004 से 7 अप्रैल 2016 तक नियमित करने के निर्देश दिए थे।
कोर्ट ने इस आदेश के पालन के लिए विभाग को 3 माह का समय दिया था, लेकिन तय अवधि में कार्रवाई नहीं की गई। आदेश का पालन न होने पर कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में नौ अवमानना याचिकाएं दायर कीं, जिनमें सभी संबंधित अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया।
दिसंबर 2023 में दिए गए आदेश के बाद अप्रैल 2024 में नौ कर्मचारियों ने अलग-अलग अवमानना याचिकाएं दायर कीं। सुनवाई के दौरान स्वास्थ्य विभाग की ओर से कहा गया कि वे आदेश का पालन कर रहे हैं, लेकिन अदालत की बार-बार चेतावनी के बावजूद लापरवाही बरती गई।
6 फरवरी को हाई कोर्ट ने अंतिम चेतावनी देते हुए कहा कि आदेश का जानबूझकर पालन नहीं किया जा रहा है। इसके बाद 12 मार्च को स्वास्थ्य विभाग के आयुक्त ने एक आदेश जारी किया, जिसमें नौ में से केवल दो याचिकाकर्ताओं को एरियर देने की स्वीकृति दी गई।

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