320 फीसदी मुनाफे के लालच में फंसी महिला, 5.71 लाख गंवाए
व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़कर साइबर ठगों ने बनाया फर्जी ट्रेडिंग अकाउंट

जबलपुर,यशभारत। शेयर बाजार में निवेश कर रातोंरात मोटा मुनाफा कमाने का लालच एक महिला को महंगा पड़ गया। साइबर ठगों ने रांझी थाना क्षेत्र की रहने वाली हेमलता यादव को अपने जाल में फंसाकर उससे 5 लाख 71 हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर करा लिए। ठगी का पता तब चला, जब महिला ने ट्रेडिंग अकाउंट में दिखाई जा रही रकम को निकालने का प्रयास किया, लेकिन जालसाजों ने रकम वापस करने के बजाय लगातार नए बहाने बनाकर उससे और पैसे मांगना शुरू कर दिया।
जानकारी के अनुसार, ठगों ने हेमलता यादव को ‘फोर्ब्स ईएमएफ सेबी रजिस्टर्ड एफपीआई’ संस्था के नाम से बनाए गए एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा था। ग्रुप में शेयर बाजार से संबंधित टिप्स और निवेश पर भारी मुनाफे के दावे किए जाते थे। महिला को बताया गया कि सही शेयरों में निवेश करने पर उसे 320 प्रतिशत तक का लाभ मिल सकता है। मुनाफे के लालच में महिला ठगों के बताए तरीके से निवेश करने के लिए तैयार हो गई।
इसके बाद आरोपियों ने महिला का एक फर्जी सब-अकाउंट खुलवाया और अलग-अलग यूपीआई आईडी तथा बैंक खातों में रकम जमा कराने लगे। महिला ने भरोसा करते हुए कुल 5 लाख 71 हजार रुपये उनके बताए खातों में ट्रांसफर कर दिए। कुछ समय बाद फर्जी ट्रेडिंग अकाउंट में महिला की जमा रकम के साथ भारी-भरकम मुनाफा दिखाया जाने लगा। इससे उसे लगा कि उसका निवेश वास्तव में बढ़ रहा है।
रकम निकालने की बारी आई तो शुरू हुआ ठगों का असली खेल
जब महिला ने अपने अकाउंट में दिखाई जा रही रकम को वापस निकालने की कोशिश की तो जालसाजों ने उसे रकम देने के बजाय ट्रेडिंग और अन्य तकनीकी प्रक्रियाओं का हवाला देकर टालना शुरू कर दिया। इसी दौरान ठगों ने ‘सनसाइन पिक्चर’ आईपीओ में निवेश के नाम पर भी महिला से और रकम मांगने की कोशिश की। उसे इस निवेश पर करीब 200 प्रतिशत तक मुनाफा होने का झांसा दिया गया।
बार-बार रकम की मांग और पैसे निकालने में आ रही परेशानी से महिला को संदेह हुआ। जब उसने पूरे मामले की पड़ताल की तो उसे समझ आया कि वह साइबर ठगों के बनाए फर्जी निवेश के जाल में फंस चुकी है। इसके बाद उसने रांझी थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने शिकायत के आधार पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया है। मामले की जांच की जा रही है। साइबर सेल की मदद से आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर, व्हाट्सएप ग्रुप, यूपीआई आईडी और बैंक खातों की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस का प्रयास है कि ठगी की रकम के लेन-देन का पता लगाकर साइबर जालसाजों तक पहुंचा जा सके।







