टीईटी बिना न नौकरी सुरक्षित, न प्रमोशन सुप्रीम कोर्ट के फैसले से एमपी के डेढ़ लाख शिक्षकों को बड़ा झटका

टीईटी बिना न नौकरी सुरक्षित, न प्रमोशन सुप्रीम कोर्ट के फैसले से एमपी के डेढ़ लाख शिक्षकों को बड़ा झटका
भोपाल यश भारत। मध्यप्रदेश के करीब डेढ़ लाख शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा टीईटी मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि बिना टीईटी पास किए कोई भी शिक्षक नियुक्त नहीं रह सकता और पदोन्नति के लिए भी टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा। कोर्ट ने कहा कि पात्रता नियमों में जितनी छूट दी जानी थी वह पहले ही दी जा चुकी है और अब अतिरिक्त राहत की कोई गुंजाइश नहीं है। मामला 1998 से 2009 के बीच नियुक्त उन शिक्षकों से जुड़ा है, जिन्होंने टीईटी से छूट देने की मांग को लेकर पुनर्विचार याचिकाएं दायर की थीं। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वर्ष 2017 में नियम लागू होने के बाद शिक्षकों को पांच वर्ष की राहत अवधि दी गई थी जिसकी अवधि अब समाप्त हो चुकी है। कोर्ट के पुराने आदेश के अनुसार जिन शिक्षकों की सेवा में पांच वर्ष से अधिक समय शेष है, उन्हें टीईटी पास करना अनिवार्य होगा। परीक्षा में असफल रहने पर सेवा समाप्ति तक की कार्रवाई हो सकती है। साथ ही टीईटी उत्तीर्ण किए बिना किसी भी शिक्षक को प्रमोशन का लाभ नहीं मिलेगा।







