भोपालमध्य प्रदेश

जहां अपनों का साथ छूटता है, वहां मां अन्नपूर्णा बनती हैं सहारा

8 वर्षों से भोपाल में कैंसर पीडि़तों के लिए अन्न सेवा की मिसाल बना सेवा भारती नानक मंडल

Table of Contents

जहां अपनों का साथ छूटता है, वहां मां अन्नपूर्णा बनती हैं सहारा

8 वर्षों से भोपाल में कैंसर पीडि़तों के लिए अन्न सेवा की मिसाल बना सेवा भारती नानक मंडल

अरविंद कपिल, भोपाल। कैंसर केवल एक बीमारी नहीं, बल्कि धैर्य, हिम्मत और उम्मीद की कठिन परीक्षा है। यह वह दौर होता है जब इलाज की लंबी प्रक्रिया में कई बार अपनों का साथ भी छूटने लगता है और जीवन की राह अकेली सी लगने लगती है। ऐसे समय में यदि किसी को स्नेह, सहारा और सम्मान के साथ भोजन मिल जाए, तो वह सिर्फ पेट नहीं, मन भी भर देता है। भोपाल में सेवा भारती नानक मंडल पिछले 8 वर्षों से इसी भावना के साथ मां अन्नपूर्णा के आशीर्वाद स्वरूप कैंसर पीडि़तों और उनके परिजनों के लिए अन्न सेवा कर रहा है।

जवाहरलाल नेहरू कैंसर अस्पताल परिसर में रोज़ाना सेवा
भोपाल स्थित जवाहरलाल नेहरू कैंसर अस्पताल परिसर वह स्थान है, जहां देश के अलग-अलग हिस्सों से आए मरीज और उनके परिजन उम्मीद के साथ इलाज की राह देखते हैं। चिंता, थकान और आर्थिक दबाव से जूझते इन लोगों के लिए सेवा भारती नानक मंडल प्रतिदिन गरम, स्वच्छ और पौष्टिक भोजन की व्यवस्था करता है। यह सेवा न किसी मौसम को देखती है, न परिस्थितियों को—हर दिन, बिना रुके, लगातार जारी है।

यह सिर्फ भोजन नहीं, संवेदना है
सेवा भारती नानक मंडल के सचिव चेतन पटेल बताते हैं कि यह पहल केवल भूख मिटाने तक सीमित नहीं है। उनके शब्दों में यह अन्न सेवा उस समय एक-दूसरे का हाथ थामने का प्रयास है, जब जीवन सबसे कठिन दौर से गुजर रहा होता है। हमारा संकल्प है कि अस्पताल परिसर में कोई भी व्यक्ति भूखा न सोए। बीते 8 वर्षों से यह संकल्प बिना किसी अवकाश के निभाया जा रहा है।

WhatsApp Image 2025 12 15 at 17.10.19 1

जन्मदिन और वर्षगांठ अब अन्न सेवा से जुडक़र बनते हैं खास
इस पहल की सबसे खूबसूरत बात यह है कि यह अब एक सामाजिक आंदोलन का रूप ले चुकी है। भोपाल के विभिन्न वर्गों के लोग अपने जन्मदिन, विवाह की वर्षगांठ या किसी प्रियजन की पुण्यतिथि को भव्य आयोजनों में खर्च करने के बजाय, अन्न सेवा से जोड़ रहे हैं। लोगों का मानना है कि भूखे को भोजन कराना ही सच्चा उत्सव और सच्ची श्रद्धांजलि है। इससे खुशियों को करुणा और मानवीय संवेदना का नया अर्थ मिल रहा है।

समाज को मिलता है मानवता का संदेश
लगातार 8 वर्षों तक बिना रुके चल रही यह सेवा न केवल जरूरतमंदों के लिए राहत है, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा भी है। यह संदेश देती है कि मानव सेवा किसी एक धर्म, वर्ग या अवसर तक सीमित नहीं होती। सच्ची सेवा वही है, जो निरंतर और निस्वार्थ भाव से की जाए। सेवा भारती नानक मंडल की यह अन्न सेवा उन लोगों के लिए उम्मीद की थाली है, जिनके लिए हर दिन एक नई चुनौती लेकर आता है। जब इलाज के लंबे सफर में अपनों का साथ कमजोर पड़ जाता है, तब मां अन्नपूर्णा के रूप में यह सेवा यह विश्वास दिलाती है कि मानवता अभी ज़िंदा है और वही सबसे बड़ा सहारा है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button