यशभारत संपादकीय के वरिष्ठ सदस्य गिरीश बिल्लौर जी का असमय देहांत।

यशभारत संपादकीय के वरिष्ठ सदस्य गिरीश बिल्लौर जी का असमय देहांत।
जबलपुर यशभारत,ईश्वर का विधान इतना निर्दीय होगा,यह लिखते वक्त गिरीश बिल्लौर का सेवानिर्वती के बाद यशभारत को मजबूत करने का जुनून से प्रभावित होकर लिखने मजबूर हो,न्याय नहीं यह धोखा है,सेवानिर्वत्ति के पहले से आशीष हम यशभारत में सेवाये देंगे,वायदे के तहत गिरीश भैया आ गए,हमने उनको अपना चेम्बर दे दिया,निश्चिंत आशीष का चेम्बर में याशिका ने कंप्यूटर लगाकर कहा आप यहाँ बैठकर अच्छे से बैठिये,क्या मालूम था अब जब भी आएगी पूछेगी दादा नहीं आए तो क्या जवाब दूँगा,मम्मी के साथ महिला बाल विकास विभाग ,नवीन दुनिया में पापा के साथ मैंने उनको देखा,यशभारत के एक एक खबर को हिज्जे ताज की गलती अब कोन सुधारेगा,शारीरिक परेशानी को अपना हौसला बनाए रखना गिरीश भैया से सीखने काबिल था,चुनाव के वक्त यशभारत की गलती को ठीक भी वही कराते थे,काफ़ी कम दिनों में यशभारत को जो उन्होंने दिशा दी उससे हर वक्त यशभारत आत्मसाथ करना ही आत्मीय श्रद्धांजलि होगी

वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक गिरीश बिल्लौरै जी का 63 वर्ष की आयु में आकस्मिक निधन हो गया। कुछ समय पूर्व ही वे यश भारत परिवार से जुड़े थे और संपादकीय विभाग के वरिष्ठ सदस्य के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। रविवार को अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी और हृदयघात के कारण उनका निधन हो गया। उन्होंने लंबे समय तक महिला बाल विकास में अपनी सेवाएं देते हुए अनेक महत्वपूर्ण कार्य किये। शासकीय सेवा में होने के बावजूद भी लेखन में उनकी विशेष रुचि रही और वे अनेक सामाजिक सांस्कृतिक संगठनों से भी जुड़े रहे हैं। तथा सामायिक विषयों पर उनकी लेखनी के सभी कायल थे। उन्होंने अनेक समाचार पत्र पत्रिकाओं के लिए भी लेखन कार्य किया। उनकी एक लड़की और एक लड़का हैं और दोनों ही बाहर हैं। उन्होंने अपने जीवन काल में कला साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान भी दिया है। उनका निधन शहर के लिए एक बड़ी छति है।







