जमकर हुई थानेदार व हवलदार में…

खाकी वर्दी जब एक दूसरे पर हमला करने लगे तब उस शहर की सुरक्षा का क्या कहना, हुआ यूं कि नागपुर रोड जाते वक्त एक थाने में पदस्थ सिपाही से बने थानेदार की ना जाने किस बात पर हवलदार से तू-तू मैं-मैं , गालीगलौज हो गई।अब इसके पहले कि थाने में मौजूदा सहकर्मी नाजारा कुछ समझ पाते कि हवलदार व थानेदार की मारपीट ने अनुशासन वाले विभाग को तार तार कर दिया । गाली तक तो ठीक है, लेकिन वे तो एक दूसरे पर मरने-मारने पर उतारू हो गए। कहा तो ये भी जा रहा है कि वहां जूतम पैजार भी हो गई। देखने वाले मजा लेने से कैसे बाज आते, नजारा ही फिल्मी था। तभी मौजूदा खाकीधारियों की अंतरात्मा जागृत हुई और फिर याद आया कि हम तो अनुशासन वाले विभाग से हैं। अचानक थानेदार को थानेदारी व हवलदार को हवलदारी भी याद आ गई तब बात जूतम पैजार से समाप्त हो गई।
दहशत में है थाना कप्तान
ऊपर भगवान नीचे पुलिस कप्तान की कहावत कहने वाली पुलिस कभी भी अलसेट में आ जाती है । इस समय थाना कप्तान अलसेट में हैं । अलसेट कागजों की नहीं है बल्कि अलसेट है ओडी काल की। पुलिज कप्तान कभी-भी रात में थानेदारों को ओडी काल से बात करते हुए उनके थानों की जानकारी लेते हैं। ऐसे में सभी की कार्यप्रणाली की कलई खुल जाती है। जिसके चलते डींगे हांकने वाले थाना कप्तान सतत रूप से व्यथित हैं और चीजें उजागर होने से बगलें झांक रहे हैं।
वाह री किस्मत डेढ़ माह की सल्तनत
कब किसके भाग्य में क्या हो जाए कहा नहीं जा सकता । अच्छे – खासे डुमना में विमान उतरते चढ़ते देख रहे थे। विधायक को गुस्सा इतना आया कि जिनका आदेश कैंट थाने जाने का हुआ था उसको थानेदारी ही नहीं करने दी। बस फिर क्या था रिटायरमेंट के लिए लगे साहब की किस्मत डेढ़ महिने के लिए खुल गई। हुआ यूं एपरपोर्ट का प्रभार संभाले निरीक्षक पर कप्तान की नजर चली गई और उन्हें बचे डेढ़ माह के लिए थाने की कमान दे दी। इसे कहते हैं विदाई भी हुई तो शानदार हुई।







