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विवेक तन्खा व आशीष शुक्ला की जुगलबंदी ने दुबई में बढ़ाया संस्कारधानी का मान  

अरब की सरज़मीं पर प्रवासी भारतीयों का संगम                                                                

अरब की सरज़मीं पर प्रवासी भारतीयों का संगम                                                                

विवेक तन्खा व आशीष शुक्ला की जुगलबंदी ने दुबई में बढ़ाया संस्कारधानी का मान 

जबलपुर  तालिब हुसैन  एक राजनेता है तो दूसरा पत्रकार. दोनों की जीवन गाथा काफी मिलती जुलती है. राजनेता ने जहाँ पिता से मिली समाजसेवा व वकालत की विरासत को आगे बढ़ाया. वहीं पत्रकार ने अपने पिता से सीखा पत्रकारिता के गुण और मेहनत की दम पर शून्य से शिखर तक पहुँचने का हुनर. अब आप समझ तो गए होंगे कि हम बात किस की कर रहे हैं..? राजनेता हैं राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा और पत्रकार हैं यश भारत के संस्थापक आशीष शुक्ला. फिलहाल दोनों संयुक्त अरब अमीरात यूएई के दुबई में हैं जहाँ दोनों ने  ना केवल  संस्कारधानी के गौरव की शमां जलायी है बल्कि अरब की सरज़मीं पर प्रवासी भारतीयों का समागम करके भारत की सांस्कृतिक विरासत की झलक दुनिया के सामने प्रस्तुत की है. दरअसल यह सब सम्भव हुआ है राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा के जीवन पर आधारित फिल्म की स्क्रीनिंग के चलते.एमपी फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित किए गए समारोह में प्रवासी भारतीयों के साथ ही स्थानीय गणमान्य नागरिकों की भारी भीड़ समारोह में जुटी. दो राय नहीं कि इस समारोह का मुख्य  आकर्षण विवेक कृष्ण तन्खा रहे. जिनकी डाक्यूमेन्ट्री फिल्म देखने के बाद लोगों को मालूम हुआ कि जबलपुर के राजनेता ने किस तरह दलगत राजनीति से ऊपर उठकर, धर्म, जाति का भेद किए बिना पीडि़त मानवता की सेवा की है. बिना झिझक यह कहा जा सकता है कि विवेक तन्खा के बाद इस समारोह में सबकी निगाहें पत्रकार  आशीष शुक्ला पर टिकी रहीं. दरअसल  जबलपुर में गढ़ा फाटक की गलियों से दुबई तक पत्रकारिता की बुलंदियों तक पहुँचने वाले आशीष शुक्ला ने मौजूदा मुकाम तक पहुँचने के लिए जो संघर्ष किया है, वोह उन पत्रकारों के लिए एक सबक है जो हमेशा संस्साधनों का रोना रोते हैं. अपने पिता स्व. अरूण शुक्ला की तरह पूरा जीवन पत्रकारिता को समर्पित करने वाले आशीष ने दैनिक नवभारत से बतौर क्राईम रिपोर्टर  पत्रकारिता की शुरूआत की. और आज  यश भारत के माध्यम से देश में पत्रकारिता के मिशन को आगे बढ़ाने में जुटे हुए हैं. इतना ही नहीं  अब दुबई में भी यशभारत के डिजीटल एडीशन की शुरूआत होने वाली है, जो निश्चित रूप से संस्कारधानी और प्रदेश के लिए गौरव की बात है. कुल मिलाकर यह कहना बेहतर होगा कि विवेक तन्खा और आशीष शुक्ला की जुगलबंदी ना सिर्फ देश बल्कि विदेशों में भी जबलपुर का नाम रोशन कर रही है।
(लेखक प्रेस क्लब आफ वर्किंग जर्नलिस्टस जबलपुर के अध्यक्ष हैं.)

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